Monday, 24 June 2019

लाइफ मंत्रा: धर्म सिर्फ आध्यत्म ही नही प्रेरणा की भी विषयवस्तु है,

लाइफ मंत्रा: धर्म सिर्फ आध्यत्म की ही नही प्रेरणा की भी विषयवस्तु है

आज कल सोशल मीडिया में मोटिवशनल स्पीकेरो की भीड़ है,हर दूसरी या चौथी पोस्ट एक मोटिवेसनल वीडियो,या कोई प्ररेणादायक कविता,या कोई फ़ोटो है,ये सब फ़ोटो वीडियो और कोटेसन बहुत पसंद भी किये जाते है क्योंकि आज कल हर कोई एक निराशा के दौर से गुजर रहा है,बढ़ते भौतिकतावाद के दबाव के कारण हमने अपने आप को और अपने जीवन शैली को बहुत जटिल कर लिया है,और इसलिए हर दूसरा आदमी डिप्रेसन से ग्रस्त है और ये सभी मोटिवेसन इस डिप्रेसन से बाहर आने के लिए वक्ती तौर पर काफी सहायता करते है,हम ये सब वीडियो देखकर खुद को हौसला देते है और काफी रिलेक्स फील करते है,लेकिन क्या कभी सोचा है कि दुनिया का सबसे पहला मोटिवेशनल लेक्चर कौन सा था??,दुनिया का सबसे पहला सक्सेस लिटरेचर कौन सा था,??इस सवाल का जवाब आपको गर्व महसूस कराणे के साथ साथ आप  का मोटिवेसन के प्रति नजरिया भी बदल देगा,

आपका सोचना सही है ,विश्व का सबसे पहला। सक्सेस लिटरेचर *श्रीमद भगवत गीता* है,लेकीन  कभी हमारा इस और ध्यान ही नही गया,असल मे आज कल हम पश्चिमी शिक्षा पद्धति"मैकाल सिस्टम" का अनुसरण कर रहे है जिसमें भारतीय संस्कृति एवं धार्मिंक मान्यताओं की जगह नगण्य  है,यहा सनातन धार्मिक ग्रंथो को सिर्फ आध्यत्म का विषय बनाया गया है,जबकि असल मे ये धार्मिक ग्रन्थ एक आदर्श जीवन शैली के लिए प्रेरित करते है,हमारा सनातन साहित्य ऐसा है कि हर समस्या का समाधान इसमे है,हर प्रकार की विधाओं के भविष्य के लिए कल्पना शक्ति है,हर तरह के विज्ञान के सूत्र है,लेकिन ये विडंबना है हमारी गलत शिक्षा प्रणाली के कारण हमारे ग्रन्थ एवं उपनिषद हमे सिर्फ कोरी कल्पना मात्र लगते है जबकि विश्व के लगभग सभी प्रसिद्ध आविष्कार किं कल्पना हमारे ग्रन्थों ने हजारो वर्ष पूर्व ही कर ली थी जब कि बाकी सभी संस्कृतियां अभी अपने शैशव काल मे ही थी,

इस बात को कुछ उदाहरण दे कर आप के समक्ष रखना चाहूंगा,भारतीय संस्कृति में भगवान के दशावतारों को हम काल्पनिक एवं कोरी गप्प बताते है जबकि अगर इस पर ध्यान दे तो आप पाएंगे कि यही थ्योर्री डार्विन के क्रमिक वंशवाद के विकास की थ्योरी की नींव है,की कैसे मानव सभ्यता का पानी से आविष्कार हुआ और क्रमशः विकाश होता हुआ कलयुग(कल मतलब मशीन युग) मे आया,

रामायण काल मे पुष्पक विमान की कल्पना आज के जम्बो बोइंग जेट की नींव है,इसे हमने कहानी बताया लेकिन विदेशियों ने इससे प्रेरणा ली,समुद्र पार पत्त्थर के सेतु आज हर बड़ी परियोजना की नींव है,

महाभारत काल मे जब कुरुक्षेत्र के  युद्ध का विवरण जब संजय हस्तिनापुर में बैठकर अन्धे धृतराष्ट्र को सूनाते है तो यही आज के लाइव टेलिकास्ट के लिए प्रेरणा है,मगर हम इसे सिर्फ काल्पनिकता के लिहाज से लेते है,

आगे चलकर महाकवि कालिदास ने महाकाव्य मेघदूत लिखा जिसमे एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को बादलो में अपना संदेश लिख कर भेजता है और हम इसे पढ़कर अपने पूर्वज कवियो की कल्पना का मजाक उड़ाते है जबकि इसी तकनीक को गंभीरता से ले कर अगर हम प्रेरित हुए होते तो आज व्हाट्सएप्प,फेसबुक,क्लाउड टेक्निक सब भारत की देन होता,लेकिन हम पर पश्चिमी करण इतना हावी है कि आज कल समस्याओ में हमे सुपर मैन और स्पाइडर मैन याद आते है हनु मैन(मान) नही,

ये बात सत्य है कि हमने अपने धर्मगनाथो को सिर्फ आध्यत्मिक दृष्टि से पढ़ा है कभी प्रेरणात्मक दृष्टि से नही पढ़ा है,कभी हनुमान चालिशा को पढ़ कर संमझ कर देखिये,हमें शास्त्रों में  संकट में हनुमान चालीसा पढ़ने को कहा गया है तो इसलिए नही की किसी भी संकट में हनुमान जी आकार हामारे संकट दूर करेगे,बल्कि इसलिए कहा गया है कि हनुमान चालिसा से प्रभावित होकर हम स्वयं ये याद करेंगे कि किनसे संकट के समय हनुमान जी ने अपनी बिसरी हुई शक्ति को एकत्रित किया और फिर अपनी स्वयं की शक्ति से सौ योजन का समुद्र लांध गए,ये है प्रेरणा,

रामचरित मानस में जो श्रींराम का चरित्र है आदर्श है,इससे सिर्फ रामभक्ति नाहींश्री राम के आदर्शो को सीखिये की कैसे जंगलो में 14 वर्ष तकलीफ पाने के बाद ही प्रभु श्री राम *मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम* हुए,श्री राम से धैर्य सीखिये की विपत्ति में कैसे धैर्य रखा जाता है,

महाभारत काल मे श्री कृष्ण का चरित्र तो भारतीय संस्कृति की अतुलनीय चरित्र है जो बांसुरी भी बजाता है और सुदर्शन चक्र भी चलाता है,श्री कृष्ण का चरित्र किशोरवस्था में पवित्र प्रेम सिखाता है तो महाभारत के युद्ध मे गीता का ज्ञान देता है,

भारतीय ग्रंथ एवं धर्म ग्रहणीय एवं पठनीय है इसलिए नही किए सभी  धार्मिक मान्यताओं से जुड़े है बल्कि इसलिए पठनीय है क्योंकि ये दैन्यदिनी जीवन के हर क्षेत्र में हमारे लिए प्रेरणात्मक है

आपके आम जीवन के हर समस्या का हल हमारे पुराणों मे धर्म मे है बस इसे एक बार ठीक से पढ़ने की और  समझने की आवश्यकता है,हमारा धर्म और संस्कृति सिर्फ आध्यात्मिक ही नही बल्कि वैज्ञानिक और तार्किक भी है,इस बात को जिस दिन हम समझकर अपने धर्म को सिर्फ कोरी कल्पना न समझ कर एक प्रेरणादायक ग्रंथ के रूप में लेंगे उस दिन हमारी शिक्षा का स्तर सही मायने में बढ़ जाएगा,अपनी सोच का दायरा बढाइये,अपने धर्मग्रन्थो की और वापस आईये,

क्योकि
कमजोर हो  नीव  तो किला ध्वस्त हो जाता है,
गलत हो दिशाएं तो हौसला पस्त हो जाता है,
जरा बच कर रहिये पश्चिमी सभ्यता से
सूरज पश्चित में जाकर अस्त हो जाता है,

धन्यवाद
विकाश खेमका

Wednesday, 22 May 2019

बाजार vs बाजारवाद

लाइफ मंत्रा: बाजार vs बाजारवाद

सफर आसान चाहते है तो समान काम रखिये,
जिंदगी आसान चाहते है तो अरमान कम रखिये,

किसी अनजान लेखक की लिखी ये पंक्तियां सर्वदा शास्वत सत्य है,लेकिन इन दो पंक्तियो को चरितार्थ करना इतना आसान भी नही है,हमारे आस पास फैलता हुआ बाजारवाद हमे ऐसा करने से  रोकता है, वर्तमान समय मे हम बाजारवाद को बाजार समझ बैठने की भूल समझ बैठे है,बाजार मतलब वो स्थान जहाँ हमे हमारे जरूरतों की चीज खरीदते है और बाजारबाद मतलब चीजे बना कर उनकी जरूरत महसूस कराई जाती है,साधारण सब्दो में इसे "मार्केटिज़्म"कहा जाता है,जहां बाजार का मतलब सिर्फ जरूरते पूरा करना है वहा बाजारवाद का मतलब जरूरते creat करना है,और ये बाजार जब से बाजारवाद बन गया है तब से जीवन मुश्किल हो गया है,बेवजह आपाधापी ,भागदौड़ बढ़ गयी है,

बहुराष्ट्रीय कम्पनियो में एक खासियत होती है उनके व्यापार का एक ही तरीका है किसी भी तरह से अपना प्रोड्कट बेचना,और इसके लिए वो हर विधा में पारंगत है,और आज कल  अपना सामान बेचने के लिए उन्होंने आम जनमानस पे भावनात्मक अत्याचार (इमोशनल ब्लैकमेलिंग) शुरू कर दी है,नए नए प्रोडक्ट को सोशल स्टेटस के प्रतीक से जोड़कर,अनचाहे फ़ूड सप्पलीमेंट को बच्चो के स्वास्थ्य एवं सफलता से जोड़कर,या अनचाहे समान को जिंदगी के आराम से जोड़कर अपने प्रोडक्ट को धड़ल्ले से बेच रहे है हमे लग रहा है कि हमे उस सभी प्रोडक्ट की आवष्यकता है लेकिन असल मे हमे उनकी आवश्यकताएं महसूस करा कर उन्हें खरीदने को विवश किया जा रहा है,

इसी बात को एक उदाहरण से समझते हैं,ओडोनिल का जो कि बाथरूम फ्रेशनर है,इस विज्ञापन में दिखाया जाता है कि जिस घर के बाथरूम में आडॉनील नही है उस घर का स्टेटस बेकार है,कॉम्प्लान और होर्लिक्स के विज्ञापन में दिखाया जाता है कि जो बच्चे ये नही पीते उनका विकाश सही ढंग से नही होता,बिना फेयर एन्ड लवली लगाए आप गोरा नही होंगे और इसके बिना लड़कियों को नौकरी नही मिलती,एक खास कंपनी का डीओ लगाने से लडकिया पटती है,रजनीगंधा खाने पर आप सफल बिज़नसमेन बनते है,बिना केंट प्यूरीफायर के पानी पिये हम बीमार हो जाते है,सॉफ्टड्रिंक्स पीने से हम कूल नजर आते है,उदाहरण हजारो है,उपरोक्त  बाते पढने में  बेतुकी लगती है लेकिन जब बड़े बड़े सितारे एक मोटी फीस लेकर उपरोक्त बाते हमारे मनपसनद टी वी चैनलो पर  बार बार दोहराते है तो ये बात हमे सच प्रतीत होने लगती है और फिर सुरु होती है बाजारवाद की दोहन प्रक्रिया,

हम भौतिकतावाद की दौड़ में धनमशीन बन जाते है और फिर धीरे धीरे मन मे ये बात घर करने लगती है कि बिना धन के जीवन बेकार है जबकि ऐसा नही है जीवन मे हमारी खुशिया वस्तुओ से नही है बल्कि लोगो से है,"दुनिया मे लोग प्यार करने के लिए है और वस्तुए उपयोग करने के लिए,लेकिन भौतिकतावाद और बाजार बाद के बहकावे में हम बस्तुओं से प्यार करते है और व्यक्तियों का उपयोग करते है,"

लगभग हर इंसान की मासिक आय विगत 10 वर्षों में लगभग दुगुनी हुई है और आप किसी भी वस्तु की कीमत देख लीजिए विगत 10 वर्षों में दुगुनी नही हुई है,लेकिन फिर भी हर आदमी आर्थिक तंगी से गुजर रहा है तो सिर्फ इसलिए कि हमारे खर्चो का दायरा बढ़ गया है,बाजार बाद ने हमे सोशल स्टेटस के चक्रव्यूह में कुछ ऐसा घेर लिया है कि हम इसमे अभिमन्यु बनकर रह गए है,अभी भी संभाल जाइये,इस बाजारवाद से सावधान रहिये,

वरना आप की हालात क्या होगी इस पर मुझे विश्व के सबसे बड़े निवेशक वारेन बुफे की एक बात याद आती है कि
"अगर आप उन चीजों को खरीदना नही छोड़ेंगे जिनकी आप को आवश्यकता नही है तो जल्द ही आपको वो सभी चीजें बेचनी पड़ेगी जिनकी आपको बहुत ज्यादा आवश्यकता है

धन्यवाद

Tuesday, 21 May 2019

चुनाव 2019: एक विश्लेषण

विश्लेषण : आम चुनाव 2019

साधारणतः मेरी छवि एक "भक्त" की है मगर फिर भी राजनीतिक निरपेक्षता की कोशिश करते हुए एक निष्पक्ष विश्लेषण की कोशिश की है,

आम चुनाव 2019 खत्म हो गया,अब सिर्फ एग्जिट पोल के जरिये ये कयास लगाए जा रहे है कि 23 मई को कौन प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठेगा,ये चुनाव बहुत मायने में ऐतिहासिक रहा,नेताओ की बदजुबानी अपने चरम सीमा पर रही,राजनीति का स्तर रसातल से और नीचे गिर कर नित नए नए आयाम रच रहा है,इस चुनाव में बाकी चुनाव
के विपरीत मुख्य मुद्दा भ्रष्ट्राचार,रोजगार,महगाई,बिजली ,पानी,अपराध,या भूख नही थी,ये चुनाव सिर्फ एक ही मुद्दे पर लड़ा गया,सभी पार्टियों का एक कॉमन एजेंडा था,भाजपा का एजेंडा मोदी,कांग्रेस का भी मोदी,महागठबन्धन का भी मोदी,और देशकी मीडिया का मुद्दा भी मोदी, अब इसे लोकतंत्र की विडंबना ही कहा जाए कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनावी मुद्दा सिर्फ एक व्यक्ति है,पूरा चुनाव मोदी केंद्रित रहा,ऐसे लगा कि जैसे देश मे समस्या बेरोजगारी,भुखमरी और महगाई नही बल्कि मोदी है,

हर पार्टी ने अपने अपने ढंग से,अपने अपने स्तर पर अपनी और से अपने प्रचार के लिए पूरी ताकत झोंक दी,कई समीकरण बदले,कई पुराने दुश्मनो ने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए अपनी पुरानी रंजिश को राजनीतिक महत्वाकांक्षा की सूली पर चढ़ा दिया,एक बात हमेशा की तरह और ज्यादा स्पस्ट हो गयी कि राजनीति का सिर्फ एक ही उसूल है कि इसका कोई उसूल ही नही है,

इस बार के चुनाव को निष्पक्ष ढंग से निपटने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की जानी चाहिए,विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव अगर शांतिपूर्ण ढंग से(बंगाल की छिटपुट हिंसक घटनाओं को छोड़ कर) निपट जाना एक ऐतिहासिक सफलता है,लेकिन इतने भीषण प्रचार और वोट की अपील के बाद भी वोट प्रतिशत का न बढ़ना इस बात का प्रतीक है कि इस वृहदतम गणतंत्र में लोग देश के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नही है,उनका देश के प्रति प्यार सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित है,

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ  मीडिया के लिए चुनाव ठीक उतना ही मतत्व पूर्ण है,जितना स्पोर्ट्स चेनल के लिए क्रिकेट और फुटबाल का वर्ल्डकप, ये सिर्फ इसलिए चुनाव को गंभीरता से लेते है क्योंकि ये उनकी trp बढाता है,पार्टियों के एजेंडे की तरह यहां भी मुख्य मद्दे गायब नजर आए,

इस बार के चुनाव के मुख्य बिंदु मोदी,नेताओ की भाषा का गिरता स्तर, और evm की निष्पक्षता रहे,जुबानी जंग देश के शीर्ष नेतृत्व को चोर कहने से शुरु हुई और धर्म,जाति, महिलाओं के अंतःवस्त्रों के रंग से होती हुई दिवंगत आत्माओ के अपमान तक चली,कई पुराने दंगो की कब्रे खोदी गयी,देश को जाति धर्म और क्षेत्र के आधार के नाम पर बाट कर अपने लिए वोट हासिल करने की भरपूर कोशिश की गई,देश के टैक्स पेयर्स के गाढ़ी मेहनत की कमाई को मुफ्त में बाटने के वादे किए गए,सभी पार्टिया लोकलुभावन वादे करते नजर आयी,इस बार चुनाव में हिंदुत्व का मुद्दा  हावी रहा,सभी पार्टियां रमजान का महीना होने के बावजूद जालीदार टोपी पहनने से बचती रही,जातीय समीकरणो से ज्यादा धार्मिक समिकरनों को तरजीह दी गयी,

सोशल मीडिया ने इस चुनाव में बहुत अहम रोल अदा किया अगर ये कहा जाए कि इस बार चुनाव सॉशल मीडिया पर लड़े गये तो कोई अतिशयोक्ति न होगी, राष्ट्रवाद और देशद्रोह के नारों के बीच आम जनता के बुनियादी मुद्दे गुमनामी की मौत मर गए,इस बार का चुनाव इन सिद्धान्तों पर लड़ा गया कि जीत ही सब कुछ है और अपने आप को जस्टीफ़ाइड कर देती है,

इस बार चुनाव कोई भी जीते लोकतंत्र का हारना तो तय है,इस चुनाव के नातीजो पर पद्मश्री सुरेद्र शर्मा की कुछ पंक्तिया या आती है,

" इससे कोई फर्क नही पड़ता कि राजा रावन बने या राम,
जनता तो सीता है राजा रावण हुआ तो  हर ली जाएगी,राजा राम हुआ तो फिर से अग्नि परिषा के लिए अग्नि में झोंक दी जाएगी,

इससे कोई फर्क नही पड़ता कि राजा कौरव बने या पांडव,
जनता तो द्रौपती है राजा कौरव हुए तो भरे दरबार मे चीरहरण कर लिया जाएगा,
राजा पाण्डव हुए तो जुए में हार दी जाएगी,

और इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि राजा हिन्दू बने या मुस्लिम
जनता तो लाश है हिन्दू बना तो जला दी जाएगी,
मुस्लिम बना तो दफना दी जाएगी,

चुनाव का नतीजा चाहे जो भी हो आपको कल भी कुछ  पिछड़े,मुफ्तखोर और कथित गरीबो के लिए कमाना था,अब भी कमाना है,सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकलते रहिये क्योकि यही वो एंटीडोट है जो आपकी मन कि भड़ास निकलता है,

जय हिंद
जय भारत,

Friday, 17 May 2019

लाइफ मंत्रा: नौकर नही मालिक बनना सीखिये

लाइफ मंत्रा: नौकर नही मालिक बनना सीखिये

दो दोस्त थे,दोनो एक ही कंपनी में एक ही पद में कार्यरत थे,एक ही समय मे उन्होंने नौकरी से vrs (स्वैच्छिक रिटायरमेंट) लिया और अपना काम शुरू किया,10 साल बाद तक पहला व्यक्ति एक बहुत बड़ी कंपनी का मालिक बन चुका था,और दूसरा कई बार व्यापार में फैल हो कर फिर नौकरी की तलाश में घूम रहा था, और नौकरी की तलाश में ही वो पहले व्यक्ति के आफिस में आया और ये देखकर बड़ा हैरान हुआ कि कैसे 10 साल पहले उसके साथ काम करने वाला एक कलीग एक 200 करोड़ की टर्नओवर वाली कंपनी का मालिक है,पहले व्यक्ति ने भी अपनी पुरानी जानपहचान के हवाले से दूसरे व्यक्ति को काम पर रख लिया,

कुछ दिनों बाद दोनों की फिर से मुलाकात हुई,आपस मे पुरानी यादें ताजा हुई तो दूसरे ने पहले से पूछा कि हम दोनों ने एक साथ काम किया,एक साथ काम छोड़ा,लेकिन किस्मत की बात थी तो आज मालिक बन गया और में कल भी नौकर था और आज भी नौकर हु,

पहले व्यक्ति ने समझाया,सुन- दोनो  ने एक साथ काम किया और काम छोड़ा ,तू कल भी नौकर था,आज भी नौकर है,तुझे एक किस्सा याद दिलाता हूं जब हम दोनो अपने कंपनी केएक ही कमरे में रहते थे,हम अपने कमरो से खाने के लिए मेस जा रहे थे,और अचानक मेस पहुचने के बाद मुझे याद आया कि हम अपने का लाइट और पंखा चालू छोड़ आये,तब मैंने कहा कि चलो बंद कर आते है,तो तूने कहा - छोड़ न यार,क्या लाइट पंखा बंद करने के लिए अब चौथे माले पर जाएगा,कंपनी का तो बिल आ रहा है अपना क्या जा रहा है?? तब तू नही गया मैं गया था,पंखा और लाइट बंद करके आया था,
"तू तब भी नौकर था तू आज भी नौकर है *मैं तब भी मालिक था,मैं आज भी मालिक हु "

बस यही फर्क है मालिक और नौकर वाले नजरिये में,जब आप अपने काम के प्रति ईमानदार और समर्पित हो जाते है तब आप नौकर नही रहते मालिक बन जाते है,मालिक बनना मतलब सिर्फ साधनो का उपयोग करना नही है उन पर अधिकार जताना नही है बल्कि साधनो के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करना है,मालिक बनने के लिए चीजो पर अधिकार जमाने से पहले उनके प्रति अपना अधिकार जताना नही पहले उसके लायक बनना एवं उसके प्रति अपना कर्तव्य पूरा करना है,जब तक आप अपने आप में मालिक वाली जिम्मेदारी पैदा नही नही  करेंगे आप  मालिक नही बन पाएंगे,आप के पास सौ बहाने हो सकते है अपने काम से अपने जिम्मेदारियों से भागने के,लेकिन इसके बाजजुद जब आप अपने जिम्मेदारियों को पूरा करते है तब आप मालिक बनते है,जब आप अपनी नौकरी बचाने के लिए नही बल्कि अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए काम करते है तब मालिक बनते है,जब आप अपने काम के प्रति अपनत्व जगाते है तब आप अपने मालिक बनते है,

तो आज ही बहाने छोड़िये,मालिक बनना है तो जिमेदारिया पूरा करना सीखिये,

विकाश खेमका

Saturday, 23 March 2019

लाइफ मंत्रा: द एक्स फैक्टर

लाइफ मंत्रा: द एक्स फैक्टर

दुनिया कई प्रकार के लोगो से भरी हुई है,यहाँ टेलेंट की कोई कमी नहीं,और न ही कमी है असफल आदमियों की,और उससे भी ज्यादा संख्या है यहाँ टेलेंटेड असफल व्यक्तियों की,जो टेलेंटेड तो बहुत है मगर फिर भी असफल है,एक सफल इंसान बनने के लिए जो कुछ चाहिए वो सब कुछ होते हुए भी वो असफलता की श्रेणी में आते है तो सिर्फ इसलिए की उनमे कुछ मिसिंग है वो एक महत्वपूर्ण चीज मिसिंग है जिसे आम बोलचाल की भाषा में  "एक्स फैक्टर"कहा जाता है,

मैंने खुद महसूस किया है कि मेरे आस पास के कुछ लोग जो मुझ से कमतर थे, आज मुझसे कंही बेहतर स्थिति में है,चाहे वो सामाजिक क्षेत्र हो,आर्थिक क्षेत्र हो ,पारिवारिक  क्षेत्र हो,या राजनितिक क्षेत्र हो,मगर अपने एक सिमित टेलेंट की बावजूद वो आज अपने अपने क्षेत्र में सफलता से स्थापित है,बचपन से ये पढ़ते और सुनते आये है कि नॉलेज इस पॉवर, लेकिन आज कल महसूस होने लगा है कि बहुत ज्यादा ज्ञान कंफ्यूज करता है, जिस ज्ञान को आप उपयोग में नहीं लेते है वो आपके लिए एसेट्स नहीं बल्कि लाइबिलिटी के तौर पे काम करता है,हर चीज का ज्ञान होना बहुत अच्छी बात है लेकिन एक चीज में स्पेशलिस्ट होना भी आवश्यक है,

आपका दिमाग तेज है अच्छी बात है,लेकिन आपके तेज दिमाग एक दोधारी तलवार की तरह होता है जिसे अगर ढंग से संभाला नहीं गया तो वो खुद को ही काट लेता है,वैसे है अपने आप इकठ्ठा किया गया ज्ञान अगर सही ढंग से उपयोग होने पर आपको मेंटल स्ट्रेस देता है,

आज मोबाइल में कई एप्प्स है जो हमारी जिंदगी को आसान बनाते है,और हम उन्हें मोबाइल में इंस्टाल कर के रखते है,और धीरे धीरे इतने सारे एप्प्स इनस्टॉल कर लेते है कि उनका उपयोग ही नहीं करते और यही सभी एप्प्स धीरे धीरे आपका मोबाइल डाटा बरबाद करते है मोबाइल का स्टोरेज बढ़ा कर उसे स्लो करते है और मोबाइल को हैंग करने लगते है,और लगभग ऐसा ही हम अपनी जिंदगी के साथ भी करते है,कोई भी यूटिलिटी जब तक उपयोग  ना की जाए तो एक लियाबिलिटी है,

मुम्बई में मेरे बहन का एक किराए का घर है इस 500 स्क्वायर फ़ीट के घर का भाड़ा लगभग 45000 है और मेन्टेन्स का 5000 अलग से है लगभग 50000 रूपये महीना,मतलब 100 रूपये स्क्वायर फ़ीट भाड़ा,एक बार उन्हें एक मॉल में शॉपिंग में एक फ्लावर पॉट फ्री ऑफर हुआ, और फ्री का माल किसे अच्छा नहीं लगता,लेकिन घर आने के बाद जब वो फ्लावर पॉट घर में लगाया गया तो।उसने 2x 2 फ़ीट की जगह घेर ली अब देखा जाए तो एक फ्री के फ्लावर पॉट के लिए वो हर महीने 400/-भाड़ा दे रहे है, ऐसे ही मुफ्त की चीजे और ज्ञान हमें लगता है कि हमारी जिंदगी आसान बना देंगे लेकिन अंततः वो हमारे लिए लियाबिलिटी ही साबित होते है,

घर में छोटी मोटी इलेक्ट्रीक प्रॉब्लम के लिए अक्सर इलेक्ट्रीशियन आते है और ठीक कर के चले जाते है एक छोटे से 10 मिनट के काम के लिए 200-300 रुपये ले जाते है,बहुत तकलीफ होती है ऐसा लगता है कि इतना सा काम था ,कितना आसान काम था,हम ही कर लेते,लेकिन कभी कर के देखिये आपको उस 10 मिनट का काम के लिए 2 घंटे से अधिक समय लगेगा तब लगेगा कि नहीं यार इससे अच्छा तो हम उसे 100-200 दे देते,एक्चुअली प्रोफ़ेशनल लोगो द्वारा किया हुआ काम देखने में आसान लगता है क्योंकि उन्होंने इस काम में महारथ हासिल की हुई है,वो एक्सपर्ट है उसी काम के,स्पेशलिस्ट है,और इस स्पेश्लिटी को हासिल करने के पीछे उनकी कई सालों की कड़ी मेहनत है,हम जो प्रोफ़ेशनल लोगो को पेमेंट करते है वो 10 मिनट के काम की नहीं उस बरसो की मेहनत का पेमेंट करते है,

दुनिया में आपकी कीमत उस काम से निर्धारित नहीं होती की आप क्या काम कर सकते है,बल्कि आपकी कीमत इस बात से निर्धारित होती है कि वो काम आपके अलावा कोई नहीं कर सकता,और ऐसा करने के लिए स्पेशलिस्ट बनना पड़ता है,और स्पेसलिस्ट बनने के लिए एक्स फैक्टर चहिये,कैंडी क्रश हो या जिंदगी आप आगे तभी बढ़ते है जब आप आगे आने वाली चुनीतियो को स्वीकार करते है और अपने काम में लगे रहते है,अक्सर 1 किलो काबिलियत पर 100 ग्राम निरंतरता भारी पड़ती है,

खुद को किसी काम के लिए मोटिवेट करना बहुत आसान है आप किसी अच्छे लेखक की किताब पढ़कर,कुछ अच्छे विचार पढ़कर,कभी किसी को देखकर मोटीवेट हो सकते है लेकिन ये मोटिवेशन बनाए रखना बहुत मुश्किल है,हम तभी आगे बढ़ते है जब वो मोटिवेशन हमारी आदत बन जाती है,और आदत बनाने के लिए हमें किसी भी चीज को निरंतर करना पड़ता है,लेकिन किसी भी काम को लगातार करना इतना आसान नहीं है,थोड़े दिनों बाद हम अपने आप से बोर होने लगते है,हमारा धैर्य जवाब देने लगता है,हमें काम बोझ लगाने लगता है और अंततः हम काम को तब छोड़ देते है जब वो पूरा होने वाला होता है, रेस में फर्स्ट आने वाला ,सेकंड आने वाले से दुगुनी मेहनत नहीं करना बस थोड़ी सी ज्यादा मेहनत करता है और यही थोड़ा सा अतिरिक्त प्रयास उसे दुगुना लाभ और सफलता देता है,

जिंदगी के साथ भी लगभग यही है हमें अपने आप में एक क्षेत्र में कोई आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है बल्कि हर क्षेत्र में थोड़े बहुत निरंतर सुधर की आवश्यक्ता है,और ये कंटीन्यूटी ही वो एक्स फैक्टर है जो आपको सफल बनाती है आपको पहचान दिलाती है जो आपको सम्मान दिलाती है, जो आपको स्पेसलिस्ट बनाती है,

विकल्प कई मिलेंगे राह भटकाने के लिए,
संकल्प एक ही काफी है मंजिल तक पहुचाने के लिए,

अपने संक्लपो पर अडिग रहिये,

इस लेख के प्रति आप सभी की अमूल्य राय की प्रातिक्षा में,