Tuesday, 26 June 2018

लाइफ मंत्रा: जो अपने खुद के मालिक नही बन सकते वो किसी के नौकर बन जाते है

लाइफ मंत्रा: जो अपनें मालिक नहीं बन सकते किसी के नौकर बन जाते है

एक बन्दर को आप अगर 2 केले दिखाये और 100 रुपया का नोट दिखाये तो वो  झट से 2 केले ले लेगा,और उस पर टूट पडेगा,क्योकि उसे नहीं मालूम की अगर वो 100 रूपये ले ले तो उससे ऐसे 200 केले ले सकता है,उसे इस बात का ज्ञान नहीं है कि पैसा क्या है,इसका उपयोग क्या है, बस वो ये जानता है कि केले खाने में अच्छे लगते है,उसमे सोचने और समझने की क्षमता ही नहीं है कि कैसे बेहतर चीजो का चुनाव किया जाए,हर बेहतर फैसला लेना मुश्किल होता है और हर कोई सिर्फ आसान रास्ते का चुनाव करना चाहता है

हम में से अधिकतर लोग ऐसे ही पढ़े लिखे काबिल बन्दर है, जो 2 केले (नौकरी) के लिए अपने100 रूपये (व्यापर/ प्रोफेशन) छोड़ देते है, ये बिना सोचे समझे की की इस 2 केले की कितनी बड़ी कीमत आने वाले दिनों में हमे चुकानी पड़ेगी,लेकिन आसान रास्ते की खासियत है कि वो हमें अपनी और खींचता है आकर्षित करता है,खूबसूरत झूठ बदसूरत सच से ज्यादा अच्छा लगता है,

खुद के दम पर काबिलियत को साबित करना बहुत कठिन है,क्योकि इसमें रिस्क बहुत है,कई अनिश्चित्तताये है,हार जाने का खतरा है, और हम लोगों की आदत है कि हम लोग हार जाना नहीं चाहते और हारने से बचने के लिए हम ये आसान  रास्ता चुनते है कि लड़ते ही नहीं,ये भूल जाते है कि लड़े तो शायद हार भी जाए लेकिन न लड़े तो हमने मान ही ली है,

हमें नौकरी करना बहुत सेफ लगता है क्योंकि यहाँ हमें एक निश्चिंतता नजर आती है, 8 घंटे काम के बदले कई हजार या की बार कई लाख रूपये हमें बहुत ज्यादा लगते है, हम इस बात का कभी आकलन ही नहीं करते की इन कुछ हजार रुपए के बदले हमें क्या क्या देना पड़ता है,
इन कुछ हजार रुपये के लिए हम सिर्फ अपने 8 घंटे ही नहीं बल्कि अपनी स्वतंत्रता गिरवी रख देते है, हम कब खुश/या उदास होंगे इसका निर्णय हम नहीं हमारा बॉस करने लगता है, जैसे माँ को ठण्ड लगे तो बच्चे को भी स्वेटर पहनना पड़ता है वैसे ही हम हँसे,खुश हो या उदास रहे इसका निर्णय बॉस का मूड करता है,एक सेफ इनकम के एवंज् में हम अपने सपनो को गिरवी रख देते है,अपने बढ़ने की इच्छा को विराम दे देते है,

ऐसा नहीं है कि लोग प्रयास नहीं करते सेल्फ डिपेंडेंट बनने का मगर ज्यादातर लोग इतने कमजोर होते है कि क्षणिक असफलता को अपनी किस्मत मानतेे हुए इस निर्णय पर पहुच जाते है की शायद नौकरी ही उनकी नियति है,
गलती हमारी भी नहीं है हमें  बचपन से सिखाया गया है,की अच्छे से पढोगे औरअच्छे मार्क लाओगे तो अच्छी कंपनियां में तुम्हे नौकरी मिलेगी,खुश रहोगे,यहाँ तो खुद माँ बाप हमारे मन में इस बात को घर कराते है कि हमें बड़ा हो कर नौकर ही बनना है, हम खुद अपने बच्चों को नौकर बनाने के लिए पढ़ा रहे है,क्या पता ये विकृत मानसिकता कब जायेगी की 90 % प्लस मार्क्स ही काबिलियत है,जबकि हम दिन रात यही देखते है कि हर टॉपर सिर्फ कंपनी का सी इ ओ है मालिक नहीं,आज भी 8 वी पास लोग देश को कई पढ़े लिखे लोगो से ज्यादा बेहतर ढंग से चला रहा है,

लेकिन हम है कि नौकर ही बनना चाहते है, एक आदमी जो 10 लोगो को नौकरी देने की ताकत रखता है खुद किसी बड़े शहर में जाकर कुछ हजार की नौकरी कर रहा है क्योंकि इसमें उसे आसानी होती है,उसे आजादी महसूस होती है,हम अपनी क्षणिक और भौतिक इच्छाओ को अपने मन मुताबिक़ पूरा करने की आजादी समझते है
असल में हमें संघर्ष करना बड़ा मेहनत वाला काम लगता है,हम को अंधेरो को इतनी आदत पड़ गयी है कि उजाला आँखों को चुभता है,हम बदलना नहीं चाहते,अपने आप को तकलीफ देकर बदलाव करना नहीं चाहते,चाहे वो हमारी भलाई के किये भी क्यों न हो?

हम भूल जाते है कि कुछ हजार की सेफ इनकम के लिए हमें अपना जमीर से समझौता करना पड़ता है, उन बातों पर चुप रहना पड़ता है जो हम जानते है कि गलत है क्योकि  नौकरी का पहला उसूल है कि बॉस इस ऑलवेज राईट,नौकरी में सर सिर्फ ऊपर से नीचे हिलाने की आजादी होती है दाए से बाएं नहीं,नौकरी में "यस मेन" बनना पड़ता है,यहाँ सही नही बल्कि मालिक का पसंदीदा काम करना पड़ता है,

मालिक बनना इसलिए भी हमें मुश्किल लगता है क्योकि मालिक बनने से पहले इसके लायक बनना पड़ता है, अपनी कई इच्छाओ को मारना पड़ता है,रोज छोटी छोटी ख्वाहिशो को मारना पड़ता है जो की छोटी बात नहीं इसलिए हम अपने खुद के मालिक बनने की बजाय दूसरे का गुलाम बनना पसंद करते है,

नौकरी करना कोई बुरी बात नहीं,जीविका का कोई भी साधन जो इज्जत से कमाया जाए गलत नही, यहां बात है खुद के काबिलियत के उपयोग की,हम अपनी काबिलियत को खुद के लिए उपयोग करके उससे कंही हासिल कर सकते है जितना हम अपनी काबिलियात को दूसरों के लिए उपयोग करके हासिल करते है, लेकिन इसमें वक्त लगता है और वक्त किसी के पास नहीं है, हर कोई 2 मिनट मैग्गी की तरह हों गया है जिसे इंस्टेंट रिजल्ट चाहिए,

धैर्य रखिये,अपने रास्तो का चुनाव करने से पहले अपने विवेक का उपयोग कीजिये,संघर्ष की राह आरम्भ में मुश्किल जरूर होती है लेकिन बाद में जिंदगी आसान कर देती है और इसका उलटा भी इतना ही सही है,

जो हंस रहा है उसी ने दर्द पाला होगा,
जो चलता रहा है उसी के पाँव में छाला होगा,
एक बार जल के देख जीवन में सूरज की तरह
तेरी भी शोहरत होगी तेरे पीछे भी उजाला होगा

Friday, 18 May 2018

लाइफ मंत्रा:करत करत अभ्यास के मूढमति होए सुजान

लाइफ मंत्रा:करत करत अभ्यास के मूढमति होए सुजान

भारत को गाँव का देश कहा जाता है और इसकी लगभग 70% आबादी गाँव में रहती है,भले ही लोग आज शहरी चकाचौन्ध के मृग मरीचिका के पीछे भाग रहे हो मगर हर कोई कंही न कंही ये मानता है कि रहने का मजा तो गाँव या छोटे कस्बो में ही है क्योंकि यहाँ आपको यहाँ  पहचान के लिए सबसे बड़ा प्रमाणपत्र आअपका चेहरा है आपके दस्तावेज नहीं, आप यहाँ बिना जेब में पैसे लिए भी कुछ खरीद सकते है,

गाँव/छोटे कस्बो के बारे में एक बात अक्सर सुनने को मिलती है कि छोटे कस्बो में बहुत पैसा है यहाँ लोगों के पास ठोस पैसा है,सिर्फ शहरो की तरह पोल या दिखावा है मैंने भी खुद महसूस किया है आस पास के कई छोटे और दुर्गम गाँव जहां पहुचंने के लिए आपको मशक्कत करनी पड़ती है वहां के लोगो के पास इतना पैसा है कि वो कई बड़े बड़े कथित बिज़नस के धाकड़ो को 10 बार खरीद लेंगे और बेचेंगे भी नहीं,आखिर इतना पैसा उनके पास आया कहा से??क्या कोई कुबेर का खजाना मिला??एक छोटे से गाँव के मुश्किल से मेट्रिक तक शिक्षा प्राप्त आदमी आज धन मशीन है तो उसमें कुछ न कुछ *एक्स फैक्टर* अवश्य होगा,

मैं यहाँ उसी एक्स फैक्टर की चर्चा करना चाहता हु,ये *एक्स फैक्टर है उनकी निरन्तरता*,बहुत पढेलिखे और बहुत जानकार लोगो के साथ ये समस्या होती है कि वो हर चीज में तर्क ढूंढते है उन समस्याओं के समाधान भी ढूंढते है जो समस्याए उनके साथ है ही नहीं,जबकि जीवन में सफलता के लिए जो सबसे जरुरी और आवश्यक बात है वो है *निरंतरता*, एक पुरानी कहावत है कि *100 ग्राम निरंतरता कई टन काबिलियत पर भारी है*

एक छोटी सी किराना दुकान से एक साधारण पढ़ा लिखा व्यक्ति सिमित संसाधनों से करोड़पति बन जाता है और एक बहु आयामी डिग्री धारी जानकार व्यक्ति पढ़लिख कर जिंदगी भर में अपना खुद का एक मकान के लिए भी तरसता है,शास्त्रों में कहा गया है कि ज्ञान कंही से भी मिले ग्रहण कीजिये बहुत सही है बात है लेकिन कई बार मैंने महसूस किया है कि जो ज्ञान आप उपयोग नहीं करते वो ज्ञान आपके लिए एसेट्स नहीं बल्कि लाइबिलिटी बन जाता है, बहुत ज्यादा जानकारी कन्फ्यूज़ करती है, जबकि सिमित ज्ञान वाले लोग अपने सिमित दायरे में निरंतर कार्य करते हुए कई गुना आगे बढ़ जाते है,

कई बार मैंने महसूस किया है कि दुनिया विशेषग्यो को सलाम करती है उनकी इज्जत करती है चाहे वो किसी भी विषय में स्पेशलिस्ट हो,और स्पेशलिस्ट बनने का एक।ही तरिका है निरन्तरता,पानी कोमल  होता है लेकिन निरंतर बहकर वो पत्थर को रेत बना देता है, मिटटी से बना घड़ा पत्थरो के पनघट पर अपनी छाप छोड़ देता है,ऐसे ही निरंतर अपने काम में लगा व्यक्ति सफलता के नए आयाम गढ़ता है, अक्सर हम सफलता न मिलता देख अपना काम बदल देते है,लेकिन काम नहीं हमें अपने काम करने का तरिका बदलने की आवश्यकता है,दुनिया में मेरे जैसे लाखो करोडो लोग है जो रोज फ़ेसबुक और व्हात्सप्प पर सैकड़ो अच्छी बातें करते है मगर अपने आप से प्रेरणा नहीं लेते ,वो ज्ञान देते है पर सिर्फ दुसरो को,अपने आप को सही करने का यही तरिका है की अपने काम में लगे रहो, कोई भी अच्छा या बड़ा काम अचानक नहीं होता,उसमे समय लगता है,धैर्य रखिये,अपने प्रयास जारी रखिये,बून्द बून्द से घड़ा भरता है,अपने ज्ञान को अपने शब्दों में नहीं अचार एवम व्यवहार में लाइए,

घनी धुंध ने ये बात मुझे सिखायी है,
बस चलते रहो रास्ता खुद ब खुद नजर आएगा,

रुक जाना नहीं तू कंही हार के...
कांटो पे चल के मिलेंगे साये बाहर के.

ओ राही ओ राही....
ओ राही ओ राही....

Friday, 27 April 2018

लाइफ मंत्रा: आकर्षण के नियम(ला ऑफ़ अट्रैक्शन)

लाइफ मंत्रा:आकर्षण के नियम

एक अच्छी और सफल जिंदगी जीने का कोई निर्दिष्ट सूत्र या फॉर्मूला नहीं है मगर फिर भी कुछ बाते है जो एक सफल और सुखी जीवन और सफल होने के लिए हमेशा ही आवश्यक है, ऐसा ही एक मनोवैज्ञानिक नियम है "आकर्षण का नियम" जिसे "लॉ ऑफ़ अट्रेक्शन" के नाम से जाना जाता है,ये जीवन प्रबंधन का एक छोटा सा सूत्र है जो की अपने भीतर कई गहरी बात छुपाये हुए है, इसके अनुसार " हर वो चीज जिसके बारे में हम सोचते है वो बढ़ती है,हम वैसे बन जाते है और वैसा ही काम करते है जैसा हम सोचते है,"

सुन कर सायद कुछ अटपटा लगा हो लेकिन अधिकतर जगह ये सूत्र सत्य साबित होता है,इसके अनुसार इंसान के शारीरिक ऊर्जा और शक्ति उसकी मानसिक सोच के अनुसार कार्य करती है,और उसी के अनुसार बढ़ती/कमती है,इसलिए हमारा हमेशा सकारत्मक रहना बहुत जरुरी है,इस नियम को साधारण उदाहरण से संमझते  है,अगर हम सोचते है कि कोई काम हम कर सकते है तो हम सही सोचते है,और अगर हम सोचते है कि वही काम हम नहीं कर सकते तो भी हम सही सोचते है, हमारी सकारत्मक सोचने की क्षमता ही हमें सफल होने में सहायक सिद्ध होती है, अगर हम समस्या के बारे में सोचते है तो हमारी समस्याए बढ़ती है अगर समाधान के बारे में सोचते है तो समाधान बढ़ते है,

हमारा व्यक्तिवव हमारी सोच से है,और हम अक्सर उसी तरह रियेक्ट करते है जैसे सोचते है, नकारात्मक विचार से सकारत्मक ऊर्जा नहीं आ सकती, अगर मैं आपको कहु की सफ़ेद हाथी के बारे में मत सोचिये तो सबसे पहले आपके मन में जो तस्वीर आएगी वो सफ़ेद हाथी की ही आएगी,इसलिए हमेशा अपने मन को सकारात्मक रखिये,अगर आप सोचते है कि आप फेल हो जाएंगे तो समझिए की आप हो गए, अगर आप संजहते है कि आप पास हो जाएंगे तो समझिए की आप हो गए,अगर आप सोचते है कि आप पैसे कमाना लेंगे  तो समझिये की आप ने कमा लिए,

जीवन में आपको क्या क्या करना है इस पर अपना ध्यान केंद्रित कीजिये और आपके साथ अपने आप वो सब बातें होने लगेगी जो की आप करना चाहते है, इसका विपरीत भी इतना ही सही है उन बातों पर ध्यान केंद्रित कीजिये जो आप नहीं करना चाहते तो आपके साथ वही बाते होने लगेंगी जो की आप नहीं करना चाहते,

समस्या का हिस्सा बनकर समाधान नहीं किया जा सकता है ,लेकिन समाधान का हिस्सा बनकर समस्या जरूर खत्म की जा सकती है, अन्धेरा अँधेरे से नहीं ख़त्म होता...

हमारी सोच हम जितना सोचते है उससे ज्यादा कंही शक्तिशाली है,उसका उपयोग कीजिये,अच्छी बातें सोचिये,सकारत्मक सोहिये, सफलता के लिए सोचिये,खुश रहने के तरीके सोचिये,मुस्कुराने के बारे में सोचिये

आपके भविष्य का प्रतिबिंब आपकी आज की सोच  है, आप निर्धारित कीजिये की आपको कैसा भविष्य चाहिए,

Monday, 12 March 2018

लाइफ मंत्रा : शिकायत नही शुक्रिया कहना सीखिए

स्थान- kims हॉस्पिटल,भुबनेश्वर,

अपने एक परिचित के इलाज के लिए उनके साथ आया हु, उन्हें यहां एडमिड किया गया है,उनका इलाज चल रहा है, यहाँ आकर मन में एक साथ कई भावनाये बदली है, दुनिया में अगर कोई जगह जहा सबसे ज्यादा भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास उमड़ता है तो वो मंदिर नहीं हॉस्पिटल है,

यहां आकार महसूस हुआ की  इंसान प्रकृति के आगे कितना बेबस है, अपने किसी प्रिय की बिमारी में हम सिर्फ उनके ठीक होने की प्राथना के अलावा और कुछ नहीं कर सकते,अक्सर हम सभी का मन कभी न कभी उदास होता है और हम अपने आप को काफी छोटा दुखी महसूस करते है अपनी तखलीफ़ो से परेशान होते है तो अपनी किस्मत को बहुत कोसते है,उसके लिए भगवान् को कुछ दोष देते है की उन्होंने ये सारे दुःख हमारी किस्मत में ही क्यों लिखे, मगर यकीन मानिये आपका दुःख चाहे जितना भी हो कम है दुनिया में कई लोग है जिनके पास इतना भी खाना नहीं है जितना आप झूठा छोड़ देते है,

अभी अभी एक 6 साल के बीमार बच्चे की माँ से मिला हु जो पिछले 1 साल से अपनी वच्चे की किडनी की समस्या के कारण हॉस्पिटल में एडमिट है,एक नौजवान और स्वस्थ व्यक्ति अचानक किसी बिमारी का।शिकार होकर अभी स्वयं चलने फिरने में भी असमर्थ है,एक परिवार है जिसके 2 वृद्ध यहाँ एडमिट है मगर सुध लेने केलिए सिर्फ नर्सिंग स्टाफ है और कोई घर का व्यक्ति नहीं है,एक पत्नी अपने पति का इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है इसलिए उसके मौत के इंतजार में उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर रही है,एक व्यक्ति का किडनी ट्रांस्प्लेंट हो रहा है मगर वो अपनी आने वाली जिंदगी भर उसे अब सिर्फ दवाइयों के सहारे ज़िंदा रहना है,और डॉक्टर के हिसाब से रहना है,

असल में हमारी जिंदगी उतनी भी बुरी नहीं है जितना हम सोचते है न जाने कितने ही लोग इस बात की दुआ कर रहे है कि उनको मेरे जैसे या आंम जिंदगी मिल जाए, मगर एक हम है कि हमारी शिकायते कम ही नहीं होती ,जो है उसका मजा लेने के बजाय जो नहीं है उसके लिए रोने में लगे है जो नहीं है,

कमी कंही नहीं है बस हमारी सोच में है, हम अपनी सोच से गरीब/दुखी/परेशान है, जिंदगी भर हाय हाय कर के कमाते है जैसे कभी मारेंगे ही नहीं और ऐसे  मर जाते है जैसे कभी थे ही नहीं,

मुझे पता है मैं भी आम इंसानो की तरह सिर्फ इसलिए भवनाओं में बहा जा रहा हु क्योकि अभी ये सारी बाते मेरे सामने घटित हुई है कल हॉस्पिटल से वापस आयुंगा और फिर से अपनी कमियों की तलाश में रोना चालु कर दूंगा,लेकिन क्या पता ये सच की हम जैसे भी है बहुत अच्छी स्थिति में है हमेशा सच है,

शिकायते नहीं शुुक्रिया कीजिये,

Friday, 15 December 2017

लाइफ मंत्रा : सादगी है सदा के लिए,सादा जीवन उच्च विचार

लाइफ मंत्रा : सादगी है सदा के लिए,सादा जीवन उच्च विचार

आरएसएस का नाम लेते ही अधिकतर लोगों के मन मे एक कट्टर हिंदूवादी संगठन की छवि उभरती है लेकिन जो लोग आरएसएस से जुड़े है वो जानते है कि आरएसएस क्या है,कैसे कार्य करता है,कैसे बिना किसी विज्ञापन के और ढकोसलों के एक संगठन लगभग 90 वर्षो से निरंतर कार्यरत है,और आज विश्व मे सबसे बड़े स्वयं सेवक समूह में।रूप में जाना जाता है,जिसके पूरे देश- विदेश में 50 लाख कार्यकर्ता है,

आरएसएस की कई खासियत है लेकिन यह जिस खासियत की कि चर्चा मैं करना चाहता हु वो है सादगी,जो लोग आरएसएस से जुड़े है वो जानते है कि शाखा का मूल सादा जीवन उच्च विचार है,एक सादगी भरी जीवन शैली के कारण ही आम से लेकर खास लोग निरंतर शाखा से जुड़े है,अनुशाशन, समय प्रबंधन,नियम,संम्मान,समानभाव जैसे कई बातें जिसे आज की युवा पीढ़ी महत्व नही देती शाखा का आधार यही सभी छोटी छोटी चीजे है जो असल मे छोटी नही है,यही बाते हमारे जीवन का भी आधार है,

आज कल भौतिकतावाद के युग मे हमने अपनी इच्छाओं को इतना बढ़ा लिया है किहम दुखी हो गए है,सादगी से रहना हमे शर्मनाक लगता है, सादगी हमे साधारण लगती है लेकिन ये एक असाधारण चीज है,हम हमेशा कुछ तड़क भड़क वाली चीजें चाहते है लेकिन ये सिर्फ क्षण भंगुर है, असल मे हम वापस सादगी की और लौट आते है,पानी का गुण धर्म शीतल रहना है ,पानी को आप कितना भी उबाल लीजिये लेकिन जब आप उसको उबालना छोड़ देते है तो धीरे धीरे व्व वापस अपने साधारण तापमान में आजता है ठंडा हो जाता है, ऐसे है हम जितने भी आडम्बर कर ले हम फिर सादगी की और वापस आते है,

पहनने के लिए जितने भी महंगे परिधान हो हम अपने हल्की टीशर्ट और बरमूडा में ही आराम पाते है,महंगे से महँगे जुतेहो हमारे पास मगर उनमे स्लीपर जैसा आराम नही, हमारी पसंदीदा डिस चाहे पनीर हो या छोले,सादे दाल चावल रोटी ही हमारा दैनिक खाद्य है,चाहे हमारे पास मर्सडीज हो या फरारी पैदल चहलकदमी करने जैसा मजा किसी मे नही है,बड़े से बड़े होटल और फन पार्क में आप जितने भी पल बिता ले आपको जो संतुष्टि अकेले आप से बाते कर के मिलेगी वो कंही नही मिलेगी,

असल मे हमे बहुत कुछ नही चाहिये,हमने सिर्फ अपनी बढ़ी हुई इच्छाओं के चलते अपने समस्यायों को बढ़ा लिया है,उन चीजों की खातिर जो हमे नही चाहिये उनका मजा भी नही ले पाते जो हमारे पास है,सादगी हमारे कई समस्यायों का हल है,सादगी से रहिये,मस्त रहिये,क्योकि सादगी है सदा के लिए,मन तो बीच समुंदर में खड़े जहाज के पंछी की तरह है जो रोज इच्छाओं के अनंत आकाश मे उड़ता है और दूर दूर तक समुंदर देख कर वापस जहाज में आ जाता है, आचार, विचार,व्यवहार,में सादगी लाइये देखिए खुद महसूस कीजिये कि  कई समस्याएं खुद ब खुद खत्म हो जाएगी क्योकि वो कभी थी ही नही बल्कि हमारी भौतिकता के कारण हमने खुद ही बनाई थी,तो कोशिश कीजिये कि सादगी पसनद बने क्योकि जरूरते तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है,

Thursday, 5 October 2017

लाइफ मंत्रा: कितनां पैसा चाहिए आखिर जीने के लिए

लाइफ मंत्रा: कितना पैसा चहिये आखिर जीने के लिए ??

पैसा ही जिंदगी में सब कुछ नही है,और सिर्फ मोह माया है ये बात हर प्रबचन में हम सुनते है और इसको बताने वाले बाबा भी लाखो में अपनी फीस(आम भाषा मे दान- दक्षिणा) लेते है,आम आदमी की सोच  और जिंदगी सिर्फ पैसे से शुरू होती है और इसी पर खत्म, हमारे किसी भी सुख,सुविधा,खुशी,दुख,यहां तक कि बीमारी का मापद्दण्ड भी पैसा है,बहुत बड़ी बीमारी है इलाज में 10 लाख रुपये लगेंगे,ऐसा आपने अक्सर सुना होगा,कुल मिला कर हमारी अभी खाव्हिश,हमारी सभी कोशिश हमारी सभी चाहत पैसा है मगर आखिर हमें कितनां पैसा चाहिए??

अगर कोई हमे पूछ लें की आपको कितना पैसा चाहिए की आप सुखी रह सके,तो आप के पास कोई जवाब नही होगा, हमने पैसे को हर चीज का मापदंड बना रखा है,लेकिन पैसा कितनां चाहिए इसका कोई मापदंड नही बनाया है, इसके कुछ प्रसिद्ध गोलमोल जवाब ये है,बस इतना कि गुजारा ढंग से चल जाये, बस इतना कि बच्चों को तकलीफ न हो, बस इतना कि कोई सुविधा असुविधा में किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े, बस इतना कि खुद का घर गाड़ी हो,और बस इतना कि गुजारा चलता रहे,और इस जैसे कितने गोलमोल जवाब हम न जाने अपने आप को रोज देते है,और साथ मे एक टैग लाइन जोड़ देते है कि " बस इतना सा ख्वाब है",हम को खुद को नही मालूम कि हमको कितनां पैसा चाहिए,??

बढ़ने की इच्छा होना एक बहुत बढ़िया बात है मगर संतुष्टि भी कोई चीज होती है,इतना भी कमाने में क्या डूबे रहना की खर्च के लिए वक्त न बने, अपने आप को अत्यधिक व्यस्त कर के,अपनेपरिवार ,दोस्त यार को समय न देकर,अपने समाज के लिए कुछ न कर अगर आपने कुछ पैसे कमा भी लिए तो इसका सार क्या है??अधिकतर लोगों का जवाब होता है की हम जो कुछ कर रहेहै अपने परिवार के लिए तो कर रहे है,बहुत अच्छी बात है आप की सोच अच्छी है लेकिन सोच कर देखिए कि आप जो परिवार के लिए कर कहे है क्या उसे पा और आपके परिवार वाले भी एन्जॉय कर रहे है??जब आप घर से जाते है तो आपका बच्चा सोया रहता है जब आते है तब तक सो जाता है तो आप अपना कमाया हुआ एन्जॉय कब और किसके साथ करेंगे,

इकोनोमिक्स का पहला सूत्र है आदमी की इच्छाये अनंत है और कभी पूरी नही हो सकती लेकिन ये याद रखने की जरूरत है कि जिंदगी सीमित है,और साथ ही अनिश्चित भी,आपके कमाये लाखो करोडो रुपये आपके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की गारंटी नही है,आज सोए तो कल उठेंगे या नही ये पता नही,

आज के दौर में एक मध्यमवर्गीय इंसान की सोच है कि छह अंको में उसकी मासिक कमाई उसके सपनो वाले जीवन को जीने में उसकी मदद करेगी,इस सोच और लक्ष्य से अपना करियर चालू करके न जाने कब अपने सपनो और लक्ष्यों को वो इतना बढाते जाता है उसका पता ही नही चलता,इतना बढ़ा लेता ही कि पता ही नही चलता कि कब वो एक इंसान से सिर्फ एक धन मसीन बन गया है,जिसमे भावनाएं नही बची है,कभी सोचा है कि हम पैसा क्यो चाहते है??पैसे को हम खा नही सकते,पी नही सकते, पहन नही सकते अगर फिर भी इसके प्रति हमारे मन मे इतनी दिवानगी है तो सिर्फ इसलिए क्योकि हम अपनी उन इच्छाओं से प्यार करते है जो हमे लगता है कि हम पैसे से पूरी कर सकते है, असल मे हम पैसे के पीछे नही अपनी इच्छाओं के पीछे भाग रहे है,"हरि अन्त हरि कथा अनंता " की तरह इच्छाये भी अनन्त है,अभी कुछ साल पहले तक 30 से 40 हजार रुपये को एक अच्छी मासिक इनकम माना जाता था,क्या सिर्फ 5-10 सालों में महंगाई इतनी बढ़ गयी को हम को 1 लाख भी कम लगने लगा,नही महगाई नही हमारी इच्छाये बढ़ गयी है,उन चीजों की इच्छाये जो हमे सिर्फ इसलिए कहिये क्योकि वो हमारे आस पास सबके पास है,और उनके न होने से हमारे सोसिअल स्टेटस में कमि आ जाती है हमारे अहम को ठेस लग जाती है,

हामरे मन मे ये बात घर कर गयी है कि हमारा फ़ोन अगर समसुंग या एप्पल न हो तो हमे ओछी नजर से देखा जाता है,कार इंडिका या इंडिको हो तो आप को अपने क्लास की कोई परवाह नही है,घर मे ऐशोआराम के सारे संसाधन नही है तो आपकी जिंदगी बेकार है,विदेशों में घूमना फिरने भी हैम सिर्फ इसलिए जाना है कि फेसबुक में फोटो छोड़कर लोगो को अपना स्टेटस दिखाया जाए,जो शादियां पहले 2-5 लाख में।हो जाती थी इतना तो सिर्फ आजकल हम इसके प्रि-वेडिंग शूट में खर्च कर देते है क्योंकि ये फ़ैशन में है,अगर साधारण सब्दो में कहु तो हम हमेशा दुशरो से बेहतर रहने,दिखने की सोच से प्रभावित हो कर अपनी इच्छाओ को इतना फैला लिया है कि उसके लिए चादर हमेशा कम पड़ जाती है,जाने अनजाने हम भी अहम की उस अंधी दौड़ में शामिल हो गए है जो कभी खत्म ही नही होगी,सुविधावादी के साथ साथ हम आजकल सोशल स्टेटस के रिमोट कंट्रोल से संचालित होते है जो कि निर्धारित करता है कि हम कब किस चीज से हम कितनां खुश होंगे,हमे ज्यादा पैसा सिर्फ इस लिए चाहिए क्योकि हमने अपनी इच्छाओं को अपने अहम से जोड़ लिया है,और अहम की संतुष्टि तभी होती है जब हम अपने आप को औरो से कुछ ऊपर रखते है,इस अहम की खातिर हाय हाय मची है,आज कल हमे पैसा अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए नही अपने अहम की पूर्ति के लिए चाहिये,अपनी नाक उची रखने के लिए हम अपने पूरे शरीर को तकलीफ दे रहे है,

शायद आप भुले तो नही होंगे कुछ दिन पहले ही एक करोड़पति अपने फ्लैट में सड़ी गली हालात में पाई गई थी, करोडो के मालिक को उनके बेटे ने दर दर के
की ठोकरे खाने को मजबूर कर दिया,एक पढ़ा लिखा आईएस घर के कलह से तंग आकर सुसाइड कर लेता है,फ़िल्म इंडस्ट्री के चकाचौन्ध वाली दुनिया के सैकड़ो ऐसे उदाहरण है जो मानसिक विक्षिप्त होकर मरे,पैसा इनके पास भी बेशुमार था फिर भी सुखी नही थे और ऐसे हालातो का सामना किया जिसको सोच कर आपकी रूह कांप जाएगी,

इस पैसे के हिरण के पीछे भागना छोड़िये,आपकी खुशिया जो आपके जिंदगी को खूबसूरत बनाती है वो  आपके भीतर ही है, उनकी तलाश में भटकना छोड़िये,अपनी इच्छाओं को सीमित कीजिये,आप बहुत खुशनसीब है कि आपकी जरूररते तो पूरी हो रही है,आपसी कांटेक्ट बढ़ाइए,मिलजुल कर रहिये,अपने परिवार और समाज से मिलकर चलिए,कम से कम इतना इंतेजाम तो कर लीजिए कि मरने के बाद आप के अर्थी के पीछे कुछ भीड़ हो जाये,जरूरते फकीरों की भी पूरी हो जाते है और इच्छाये बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है,अपनी इच्छाये सीमित कर लीजिए आप अपने आप को दुनिया का सबसे अमीर इंसान महसूस करेंगे,