Monday, 20 June 2022

ऑफलाइन जिंदगी

लाइफ मंत्रा: ऑफलाइन जिंदगी,

विकाश खेमका
काँटाबाजी (ओडिशा)

टेक्नोलॉजी की पहुच से दूर एक अपना ठिकाना था,
अपनो के पास रहते थे  वो भी क्या जमाना था,

मोबाइल के अलार्म नही मां की दुलार से उठता था,
इन भर का मोटिवेसन पिताजी की एक डांट से मिलता था,

ऑनलाइन क्लास नही सरकारी स्कूल हुआ करते थे
दोस्तो के साथ कितने कितनी मस्ती किया करते थे,

वेदर फोररकास्ट नही था बारिश में भीगने का मजा था,
बिना व्हाट्सअप के भी दोस्तो का दरबार सजा था,

न आज तक,न जी न्यूज , न कोई समाचार था,
अपना फेवोराइट कार्यक्रम  तो चित्रहार था,

न पुब्जी,न प्रीफ़ायर,ना कैंडी क्रश, न यू ट्यूब था
अपना लिए मजा तो गिल्ली डंडा और खेल खुद था,

कुछ भी बोल देना मुश्किलों का घर नही था,
कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीन शॉट का डर नही था,

घर मे फ्रिज नही था,कूलर नही था, टी वी नही थी
इमेज बहुत बढ़िया थी अपनी भले ही सेल्फी नाही थी,

सुविधा कम थी साधन काम थे लेकिन सुकून था,
अपने लिए तो सुप्रीम कोर्ट पिताजी का हुकम था,

आपसी चुगली-चट्ठा था, ताका झांकी थी,
अपने लिए गूगल पड़ोस की काकी थी,

बेशक मैगी,पिज़्ज़ा,बर्गर का स्वाद नही था
मगर मां में हाथ के खाने का कोई जवाब नही था

न फेसबुक,न ट्विटर न इंस्टाग्राम न जी मेल था,
मगर फिर भी बहुत पक्का आपसी मेलजोल था,

संबंध मजबूरी से नही मजबूती से निभाये जाते थे
शादीयो तंक में टेंट भी खुद ही लगाए जाते थे,

त्योहारो में हर्ष था,आंनद था ,उमंगे थी उल्लास था,
आज त्यौहार भी फिके है पहले हर दिन खास था,

पहले खुशियां थी आज कल सिर्फ खुशियों का वहम है,
पहले जिंदगी में खुशियों के पल थे अब हरपल में जिंदगी कम है,

सहज थी, सीधी थी, सरल थी,सच्ची थी,
जिंदगी जब *ऑफलाइन* थी, काफी अच्छी थी,

अपरिग्रह: सांसारिक जीवन मे सन्यासी होने का भाव

लाइफ मंत्रा: अपरिग्रह -सांसारिक जीवन में सन्यासी होने का मूलमंत्र

विकाश खेमका
कांटाबांजी(ओडिशा)

जैन धर्म के दो मूल मंत्र हूं,अहिंसा एवं अपरिग्रह, गांधी जी शुरू से है हमारे पाठ्य क्रम में शामिल है और ये उनकी जीवनी को निरंतर पढाए जाने का कारण है हमारे लिए अहिंसा कोई नया शब्द नही है, लेकिन अपरिग्रह शब्द शायद ही जैन धर्म से न जुड़े हुए व्यक्ति ने सुना भी होगा, 

अपरिग्रह का शाब्दिक अर्थ है किसी वस्तु को ग्रहण न करना,या आवश्यकता से अधिक न लेना, उदाहरण के लिए जितना आवश्यक हो खाने के लिए उतना ही लेना अपरिग्रह है, यह छोटा सा शब्द अपने आप मे कई वर्तमान की कई समास्याओं के मूल हल समाहित किये हुए है,अकसर हम अपने धर्म को सिर्फ एक आध्यत्मिक दृष्टिकोण  से देखते है जबकि धर्म सुख- शांति से  जीवन व्यतीत करने के लिए एक आदर्श जीवन शैली की सीख है,हम सांसारिक लोग है हम सन्यासी नही हो सकते,अपरिग्रह संसार मे रहकर सन्यास की भावना बनाये रखने का मंत्र है,एक सन्यासी की मूलभावना होती है "सर्वे भवन्तः सुखिनः,सर्वे भवन्तु निरामय:" और अपरिग्रह इसी भाव को सांसारिक जीवन मे प्राप्त करने का मंत्र है, 

जैसा कि इसका शाब्दिक अर्थ हैं "आवश्यकता से अधिक वस्तु का संचय न करना " लेकिन इसका सांसारिक जीवन के संदर्भ में ये सही अर्थ नही हो सकता। इसका सही अर्थ ये हैं कि किसी भी वस्तु या व्यक्ति या कोई भी सांसारिक वस्तुओं से टूटना हैं। यदि आपको किसी वस्तु से प्रेम हैंं, लगाव हैं उसके खो जाने से दुःख होता हैं तो इसका मतलब हैंं आपको इससे परिग्रह हैं ओर यही परिग्रह दुःख का कारण हैं। 

यदि इसका अर्थ ये मान लिया जाए कि आवश्यकता से अधिक वस्तु का संचय न करना तो इसका मतलब हुआ जो आपके पास आवश्यक वस्तु है उसी से आपको परिग्रह हो जाएगा और उसमें से किसी एक वस्तु के जाने से भी आपको दुख होगा तो फिर ये अपरिग्रह का सही अर्थ कभी नही ही सकता। 

आपके पास कितना भी धन या सम्पति हैं, ऐश्वर्य हैं लेकिन आपको इसके जाने का कोई गम या दुःख नही हैं तो फिर कोई चिंता की बात नही लेकिन यहां प्रश्न उठता हैं कि यदि आपको परिग्रह नही हैं तो धन का संचय क्यों किया। धन का संचय आपने अपने सुख के लिए, ऐश्वर्य के लिए ओर आराम की जिंदगी जीने के लिए किया हैं। आप जानते हैं पैसा कमाना ओर खर्च करना और दान देना लेकिन यदि आप इससे परीग्रह रखते हैं, उसके जाने से दर्द होता हैं, दान देने से घबराते हैं तो फिर आप अपरिग्रह का कभी पालन नही कर सकते। 

जब हम आवश्यकता से अधिक संचय करते है तो फिर आप सन्सार के बंधन में बांध लेते है,फिर हम वस्तुओं को व्यक्तियो से अधिक महत्व देने लगते है,जो की आगे चलकर पतन एवं तनाव का कारण बनता है,वर्तमान जीवन मे मानसिक अशांति,तनाव,दुखः का एक बहुत बड़ा कारण है भौतिकतावाद, मतलब भौतिक चीजो को बहुत ज्यादा महत्व देना,हम गाड़ी,बंगला,एवं विलासपूर्ण जीवन शैली के लिए दिन रात कमाने में लगे रहते है,क्योकि हमे लगता है कि सुख इसी में है,लेकिन अपरिग्रह का भाव हमे सिखाता है कि सुख पाने में नही त्यागने में है, खूब कमाइये मगर उसके प्रति मन मे अशक्ति न लाना अपरिग्रह है, मन में अपरिग्रह की भावना हो तो जीवन आसान हो जाता है,"

आम जीवन मे हमने जीवन मे धर्म को सिर्फ आध्यात्म और आडंबर से जोड़ लिया है जबकि धर्म मनुष्य को एक आदर्श जीवन शैली के लिए प्रेरित करने वाला एक भाव है,एक अच्छा और बेहतर मनुष्य बनाने के लिए धर्म से जुड़िये इसकी मूलभावना को समझिये,

धन्यवाद,

Saturday, 16 October 2021

मैं पैसा हूँ

" मैं पैसा हूँ"

मैं आपके सोशल स्टेटस का सिम्बल हूँ
मुझे पाकर आप क्रिटिकल हो जाते है,मैं तो बिल्कुल सिंपल हूँ

मैं आपके रिश्तों के लिए जहर हूँ,
दिमाग मे पहुच जाए तो मैं कहर हूँ,

मैं बोलता नही मगर बोलती बंद कर सकता हूँ,
मैं आपका रुतबा बहुत बुलंद कर सकता हूँ,

 मैं नमक की तरह हूँ ,जिंदगी का स्वाद बढ़ाता हूँ,
ज्यादा हो जाऊ लेकिन तो जीवन मे कड़वाहट लाता हूँ,

मेरे बिना कोई यज्ञ, कोई आयोजन कोई अनुष्ठान नही होते,
पैसों में न बदल पाए तो आपके कोई  गुण महान नही होते

मैं जब भी चाहूं कोई भी नियम तोड़ सकता हु
कार्यपालिका,न्यायपालिका,संसद,मिडिया सबका मुह मोड़ सकता हूँ

फिर भी मेरी कुछ सीमाएं है जिन्है मैं लांध नही सकता
आपके जीवन से मैं खुशियों को बांध नही सकता

मुझसे बात करो तो मैं बात नही करता
मेरी तरफ देखो तो मैं जवाब नही देता,
मुझे पाने के लिए आपने कितनो को खोया
मैं आपको इस बात का हिसाब नही देता,

मैं सिर्फ एक कागज हूँ, जिससे संसार मे हलचल है
मेरे लिए ही सारे फसाद है, मेरे लिए  सारी कलकल है

मेरी उपस्थिति सारी सृष्टि के कण कण में व्याप्त है
मेरी चाहत आपके जीवन को बरबाद करने को पर्याप्त है

मुझसे इतना दिल मत लगाओ मैं हर जगह काम नही आऊँगा
साथ जाएंगे आपके अच्छे कर्म मैं आपके साथ नही जाऊँगा

विकाश खेमका
काटाबांजी

Saturday, 14 December 2019

गुफ्तगू

Just Beautiful .......
With thanks a ton to original writer...
Its relex me a lot....

🌹   *गुफ़्तगू*    🌹

उसने कहा- बेवजह ही खुश हो क्यों?
मैंने कहा- हर वक्त दुखी भी क्यों रहूँ !

उसने कहा- जीवन में  बहुत गम हैं,
मैंने कहा -गौर से देख,खुशियां भी कहाँ कम हैं।

उसने तंज़ किया - ज्यादा हँस मत, नज़र लग  जाएगी,
मेरा ठहाका बोला- चिकना हूँ,  फिसल जाएगी।

उसने कहा- नहीं होता,क्या तनाव कभी ?
जवाब दिया- मैंने ऐसा तो कहा नहीं!

उसकी हैरानी बोली- फिर भी यह हँसी?
मैंने कहा-डाल ली आदत,हर घड़ी मुसकुराने की!

फिर तंज़ किया-अच्छा!!बनावटी हँसी, इसीलिए
परेशानी दिखती नहीं।
मैंने कहा- अटूट विश्वास है, प्रभु मेरे साथ है,
फिर चिंता-परेशानी की,क्या औकात है।

कोई मुझसे "मैं दुखी हूँ" सुनने को बेताब था,
इसलिए प्रशनों का सिलसिला भी बेहिसाब था

पूछा - कभी तो छलकते होंगे आँसू ?

मैंने कहा-अपनी मुसकुराहटों से बाँध बना लेता हूँ,
अपनी हँसी कम पड़े तो कुछ और लोगों को
हँसा देता हूँ ,
कुछ बिखरी ज़िंदगियों में उम्मीदें जगा देताहूँ...

यह मेरी मुसकुराहटें दुआऐं हैं उन सबकी
जिन्हें मैंने तब बाँटा, जब मेरे पास भी कमी थी।
🌹

Thursday, 28 November 2019

लाइफ़ मंत्रा: कोई भी काम छोटा नही होता,बस एक बड़े काम की शुरुवात होती है

लाइफ मंत्रा: कोई काम छोटा नही होता ये सिर्फ एक बड़े काम की शुरुवात होती है

आज के भौतिक युग मे हम इतनी स्ट्रेस के साथ जी रहे है कि कुछ समय के लिए हम सभी मे डिप्रेसन आ जाता है,खासकर अपने व्यापार/नौकरी या प्रोफेसन के प्रति मन में एक नकारात्मक भाव उत्त्पन्न होता है कि जो हम कर रहे है,वो बहुत छोटा है,हम उसके लायक नही है,हम इससे कुछ बहुत ज्यादा अच्छा और बड़ा डिज़र्व करते थे,लेकिन पेट की भूख ने हमे एक छोटे काम करने के लिए मजबूर किया और हम ये काम कर रहे है,

जबकि सच बिल्कुल इसके उलट है, हम सबके साथ एक समस्या है कि हम अपने आप को मोटीवेट करने के लिए अक्सर किताबे पढ़ते है,इंटरनेट में सक्सेस लिटरेचर सर्च करते है,बड़े बड़े मोटिवेशनल सेमिनार अटेंड करते है, लेकिन इस मोटिटिवेसन के उन लाइव सोर्सेस को भूल जाते है जो हमारे आस पास ही है,जिन्हें हम रोज देखते है,मिलते है,उनके बारे में बाते करते है, लेकिन उनसे सींखते नही, ऐसे ही अपना काम को छोटा न समझ कर उसमें बड़ा नाम बनाने वाले दो लाइव उदारहण आपके सामने रख रहा हूं,इस बात को समझने के लिए आपको कंही दूर जाने की आवश्यक्ता नही है, मैं काटाबाजी में ही आपको ऐसे उदाहरण पेश कर रहा हु जिन्होंने की इस तथाकथित छोटे काम मे अपना बड़ा नाम,अपना बढ़िया कैरियर,और एक अच्छी इज्जत कमाई है,

पहला उदाहरण मेरे मित्र आनंद पंजवानी का है,एक छोटी सी पान दुकान से लेकर "गोवर्धन पान" के ब्रांड तक के उसके सफर को मैंने  बहुत करीब से एक एक स्टेप चढ़ते देखा है,आम मानसिकता है कि पान दुकान एक छोटा सा व्यवसाय है लेकिन जब आप एक काम को अपने दिल से करते हो,उसमे खुशी महसूस करते हो,तो आप को आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता, ऐसा ही एक और उदाहरण एस कुमार हेयर सलून है,अधिकतर लोगों की मानसिकता ये है कि सलून एक बहुत ही छोटा काम है,लेकिन इस मिथक को भी इनकी मेहनत और लगन ने तोड़ा है,आज एस कुमार सलून भी एक ब्रांड है और लोग दूर दूर से इसके लिए एडवांस में बुकिंग करते है,एक छोटी से सलून को एक बड़ा हेयर स्टाइलिस्ट ब्राड बनते हुए देखना वाकई सुखद अनुभव है,

इनकी सफलता की वजह है कि इन्होंने अपने काम को कभी छोटा नही समझा,अपने काम को एन्जॉय किया,अपने काम करने में कोई झिझक नही दिखाई, उस पर नए नय प्रयोग किये,हमेशा अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश की, हर सफलता को एक समय लगता है, इनकी सफलता को भी लगा लेकिन इन्होंने धैर्य बनाये रखा और तब तक बनाये रखा जब तक कि उनका काम एक ब्रांड नही बन गया,आज अपने इस तथाकथित छोटे काम की बदौलत इनके पास एक अच्छी आय का साधन,सोशल स्टेटस,और वो सब कुछ है जो कि एक आदमी अपने प्रोफेशन/व्यापार/नौकरी से चाहता है,

अधिकतर असफल लोगों को उनके काम को लेकर शिकायत होती है कि उन्हें एक छोटा काम मिला है और वे इसे एक हीनभावना से ग्रस्त होकर बुझे हुए दिल से सिर्फ रोजीरोटी कमाने के लिए करते है,वो मजबूरी में काम करते है,और मजबूरी में किये गए काम आप पर बोझ बनते है,जो अपने काम से प्यार नही करते उनका काम भी उनसे प्यार नही करता,आज जो लोग इनकी सफलता को सिर्फ इनकी किस्मत कहते है तो उनको अपना सही आकलन करने की आवश्यकता है,जब तक आप अपना काम शर्म और झिझक के बंधन में बंध के करेंगे तो आप उसमे कभी आगे नही बढेंगे,उत्साह से किया गया काम अच्छा रिजल्ट लाता है और इसका उल्टा भी इतना ही सही है,

आज भी लोग पोस्ट ग्रेजुएट कर के 10000 रूपये महीने की नौकरी कर रहे है क्योंकि ये उन्हें व्हाइट कालर जॉब या सोसिअल स्टेटस वाला काम लगता है,जबकि एक छोटा सा नास्ता ठेले वाला आराम से रोज 1000 रुपये कमा कर सोता है,मोदी जी जब कहते है कि पकोड़े तलना भी एक व्यवसाय है तो लोग इस बात का मजाक उड़ाते है कि क्या एक पढ़ा लिखा आदमी पकोड़ा कैसे तल सकता है?? हर काम को छोटा या बड़ा सोसल स्टेटस देने की ये मानसिकता असफल लोगो के अपनी असफलता झुपाने के बहाने है,सच तो ये है कि जो काम दिल से किया जाए कभी छोटा नही होता,

कोई आदमी सीधे बड़ा होंकर पैदा नही होता,आदमी पहले शिशु के रूप में पैदा होता है फिर धीरे धीरे बाद होता है,हजारो किलोमीटर की यात्रा भी एक छोटे से कदम से ही प्रारंभ होती है,और कंही भी पहुचने के लिए पहले घर से निकलना पड़ता है, एक कदम बढ़ाना पड़ता है, स्टार्ट अप लेना पड़ता है,आप जो भी काम करे दिल से करे,चाहे आप नौकरी करते हो, कोई प्रोफेसनल हो,या छोटे सी दुकान के मालिक,अपने काम को समर्पित ढंग से करे,छोटी चीजे ही आगे चल कर बड़ी होती है,बस अपने काम मे लगे रहिए,

कोई काम छोटा नही होता ये बस एक बड़े काम की शुरुवात होता है,

घने कोहरे ने एक बात बहुत अच्छी सिखाई है
चलते रहो, रास्ता खुद ब खुद दिखता जाएगा

Sunday, 24 November 2019

लाइफ मंत्रा: आपकी जिंदगी आपका फैसला

लाइफ मंत्रा: जिंदगी आपकी फैसला आपका

इस आर्टिकल के साथ एक लिंक पोस्ट कर रहा हु जिसमे एक वीडियो है कि कैसे एक कुत्ते को मिल्ट्री में सेवा देने एवं अहम भूमिका निभाते के लिये पूरे मिलिट्री के कायदे कानून और सम्मान के साथ रिटायरमेंट दिया गया,इस लिंक पर आप ये वीडियो देख सकते है

https://www.facebook.com/theindianfeed/videos/2553873151370897/

छोटा सा वीडियो है लेकिन संदेश बड़ा है,साथ मे कैप्शन भी है कि "born as a dog retire as आ militryman" काफी कुछ सिखाता है ये वीडियो,और सकारत्मक सोचेंगे तो बहुत प्रेरित करता है कि  कई चीजें आपके कंट्रोल में नही है जिसे भाग्य कहा जाता है जैसे कि ये बात बहुत आप क्या थे,कहा पैदा हुए थे,क्या करते थे लेकिन ये बात आप पर निर्भर है कि आप क्या बनना चाहते है ,आपकी आगे की लाइफ कैसे होगी, आप गरीब पैदा हुए ये आपका भाग्य है आप गरीब मरे तो आपकी नाकामयाबी,

हर किसी की जिंदगी में कुछ न कुछ कमी है और कमी है इस लिए तो जिंदगी है हकीकत है पूरे होते तो ख्वाब न होते, अधिकतर लोग इन कमियों के बहाने की आड़ में अपनी असफलता छुपाने की कोशिश करते है,हर कोई जितनी मेहनत अपनी असफलता की किताब पर बहाने का कवर लगाने में जितनी मेहनत करता है उतनी ही हिम्मत अगर उसको स्वीकार कर उसको बदलने में लगा दे तो यकीन मानिए इस किताब की स्क्रिप्ट बदल सकती है,लेकिन बहाने बना लेना बहुत आसान है और आज काल मुश्किल काम भला कौन करता है,

आप क्या थे,ये आपका अतीत है इसे आप नही बदल सकते, लेकिन आप क्या होंगे जो कि आपका भविष्य है ये जरूर  निर्णय कर सकते है,बस जो नही मिला उसकी शिकायत छोड़ कर जो है उसका सदुपयोग करना सीखिए,

अगर किस्मत ने आपको "राहुल " दिया है तो उसे गांधी बनाकर अपना मजाक मत उडाईये,बल्कि द्रविड़ बनाकर डटे रहिए,किसमत से पत्थर मीले तो उससे अपना सर मत फ़ोडिये बल्कि उससे  रास्ते की सीढी बनाइये,

एक कचरे का ढेर भी कुछ देर में अपनी जगह बदल लेता है आप तो इंसान है एक मौका आपकी औकात,हालात,पहचान सब कुछ बदल सकता है सिर्फ उसे पहचानिए उसे सार्थक किये उसे व्यवहार कीजिये,

जब एक जानवर कुत्ते के रूप में पैदा होकर एक सैनिक सम्मान पा सकता है तो आप तो उससे कंही बेहतर है,बस कोशिश करते रहिए,अब भी आप अपनी असफलता को  सिर्फ किस्मत का दोष कहते है तो याद रखिये भगवान को आपसे कोई पर्सनली दुश्मनी तो है नही जो आप के साथ हमेशा खेलता रहेगा बस आप अपनी कोशिश जारी रखिये धैर्य राखिये क्योकि कभी कभी गुच्छे की आखरी चाबी भी ताला खोल देते है और सफलता के लाकर में मेहनत और किस्मत नाम की दो चाबियां लगती है जिसमे से एक आपके हाथ है और एक भगवान के आप,अपनी चाबी तो लगाते रहिए,

मेरे दोस्त,every dog has a day, क्या पता आपका दिन कब आ जाये

Keep trying,
आप  कल क्या होंगे???ये आप का आज decide करता है !!

Wednesday, 20 November 2019

लोग है!!

तू अपनी खूबियां ढूंढ,
कमियां निकालने के लिए
                                    *लोग हैं|*

अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए
                                    *लोग हैं|*

सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
निचा दिखाने के लिए
                                    *लोग हैं|*

अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए
                                    *लोग हैं|*

अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए
                                   *लोग हैं|*

प्यार करना है तो खुद से कर,
दुश्मनी करने के लिए
                                    *लोग है|*

रहना है तो बच्चा बनकर रह,
समझदार बनाने के लिए
                                    *लोग है|*

भरोसा रखना है तो खुद पर रख,
शक करने के लिए
                                    *लोग हैं|*

तू बस सवार ले खुद को,
आईना दिखाने के लिए
                                    *लोग हैं|*

खुद की अलग पहचान बना,
भीड़ में चलने के लिए
                                    *लोग है|*

तू कुछ करके दिखा दुनिया को,
तालियां बजाने के लिए
                                    *लोग है