Tuesday, 26 September 2017

लाइफ मंत्रा : सफलता का कोई फॉर्मूला नही होता,सफलता डिग्रियो की मोहताज नही

लाइफ मंत्रा : सफलता का कोई फार्मूला नही होता,सफलता सिर्फ एजुकेशन की मोहताज नही,

आज एक खबर सुर्खियों में छाई रही कि पतञ्जलि के सी ई ओ आचार्य श्री बालकृष्ण ने भारत के 10 शीर्ष धनी व्यक्तियों में अपनी जगह बनाई,कहने को ये सिर्फ एक व्यापारिक खबर है लेकिन इस खबर ने सुर्खिया बटोरी क्योकि ये बहुत ही सुखद आश्चर्य है,पतंजलि मतलब बाबा रामदेव,और एक भगवाधारी बाबा की व्यापारिक सफलता सही मायने में काबिलेतारीफ है, बड़ी मुशकील से मैट्रिक तक पढ़े एक व्यक्ति की सफलता के सामने पढ़ाई की ढेरों मैनेजमेंट की डिग्रियां लिए हुए प्रोफेसनल आज सोच में पड़ गए है,सिर्फ 10 साल पुरानी एक कंपनी ने बिना किसी नामी गिरामी ब्रांड अम्बेसडर के न जाने ये कैसा बिज़नेस मॉडल डेवेलोप किया की उसके सामने 100 से अधिक वर्षो से पुरानी मल्टीनेशनल कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रेटर्जी भी फेल हो गयी,उनके व्यापार का एक बड़ा हिस्सा पतंजलि ने छीन लिया,आज कॉलगेट जिसे टूथपेस्ट का पर्याय माना जाता था वो ब्रांड भी पतंजलि के दंतकान्ति के सामने छोटा पड़ गया, बड़ी ही हास्यापद स्थिति उत्पन्न होती है जब ग्राहक किसी दुकान में जाकर "पतंजलि कोलगेट" मांगता है,

बाबा रामदेव भले ही एक अध्यात्मिक योग गुरु के रूप में परिचित है मगर उनके सामने कई बड़े बड़े मेनेजमेंट गुरु फीके पड़ गए है,पतञ्जलि को सफलता दिलाने में जिस एक चीज का उन्होंने सबसे ज्यादा उपयोग किया वो है स्वदेशी सोच,उन्होंने जनमानस के दिमाग मे नही दिल को निशाना बनाया,

रामदेव बाबा की सफलता ने एक बार फिर से सिद्ध किया कि सफलता का कोई निश्चित फ़ॉर्मूला नही होता,ये कोई गणित नही जिसमे 2 में 2 जोड़ कर आप हर बार 4 बना ले और वो सही हो, सफलता के लिए नए आईडिया चाहिए, रामदेव बाबा ने भारत वासीओ को पहले योग द्वारा अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाया,अपने शुध्द देशी अंदाज में लोगो के मन मे ये भरोसा दिलाया कि भारत का देशीपन किसी भी पश्चिमी सभ्यता से कंही आगे है यही भारतीयता पर गर्व उनके पतंजलि ब्रांड की नींव है,लोग पतंजलि खरीदकर ये महसूस करते है कि वो अपने आस पास की चीजें,देशी अंदाज वाली चीजें खरीद रहे है,ये खास बात है,नूडल्स जैसे चीजे जो भारतीय संस्कृति का हिस्सा नही थी उन्हें भी लोगो की पसंद के हिसाब से भारतीयकरण कर के लोगो को परोसना मास्टरस्ट्रोक कहा जा सकता है,दवाई से अपना धंधा चालू कर के आम।लोगो के बेडरूम बाथरूम और किचन तक पहुचने का पतञ्जलि का ये सफर वाकई पढ़ने और पढानेलायक है,अपने एक स्टेटमेंट से जो सॉफ्टड्रिंक कंपनियों की बैंड बजा सकता है वो मामूली इंसान नही है,अपने आप मे एक विश्वविद्यालय है,रामदेव बाबा को देखकर ये सीखा जा सकता है कि सफल होने के लिए काबिलियत,नई सोच,आपका मार्केटिंग फन्डॉ, लोगो सेजुड़ना ज्यादा मायने रखता है आपकी डिग्रियां नही,भारतीयों की आम मानसिकता है कि बाबा शब्द को वैराग्य का प्रतीक माना जाता है यहां भी एक बहुत बड़ी कालाकारी बाबाजी ने की है कि उन्होंने पतंजलि के फ्रंट में हमेशा आचार्य बालकृष्ण को ही रखा है,आज जब भारत के शीर्ष धनकुबेरों की गिनती में सूटबूट और टाई लागये हुए चमकधमक और चमचमाते चेहरो के बीच एक आम सफेद खादी के वस्त्र पहने एक आम से दिखने वाले आचार्य को देखता हूं तो ऐसा लगता है कि शायद मैनेजमेंट की किताबो में कुछ सुधार करने की जरूरत है,और सफलता के फॉरमुले के फिर से व्याख्या करने की आवश्यकता है,जब एक भगवा चोला पहना अर्धनग्न बाबा बड़ी बड़ी मल्टीनैसनल कंपनियों को अपने बाल नोचने पर मजबूर कर सकता है तो ये बात रोमांचित करती है,अपनी किसी भी सोच को छोटा मत सोचिये, आप देशी सोच के है तो ये आपके लिए शर्म नही गर्व है,

लाइफ मंत्रा : कुछ भी स्थायी नही होता,सफलता भी असफलता भी


जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात है कि ये अनिश्चचित है,कल क्या होगा ये कोई नही जानता,और यही बात जिंदगी को आकर्षक बनाती है,आपकी पूर्व सफलता इस बात की गारंटी कभी नही देती की आप फिर से सफल हो जायेगे, असल मे किसी भी काम के लिये सफलता का दायित्व इस बात पर निर्भर है कि आपने किसी काम के लिए कितनां समर्पण दिया, उस काम के प्रति आपकी निष्ठा कितनी थी,कितनी लगन से आपने काम किया,अपनी मनचाही सफलता हासिल करने में भाग्य का कुछ प्रतिशत अवश्य होता है लेकिन सिर्फ भाग्य ही ये निर्धारित नही करता कि आप सफल हो जायेगे,आपकी सफलता आपके द्वारा की गई तैयारियों पर निर्भर करती है,भाग्यवादी नजरिया होने के बाद भी आपको जरूरी मेहनत करनी ही पड़ती है,अगर आप सोचते है कि रातोतात आपकी कोई लाटरी निकलेगी और आप अरबपति हो जाएंगे तो भी इसके लिए आपको एक मेहनत का कार्य करना पड़ेगा ही,इनाम जितने केलिए कम से कम आपको लाटरी तो खरीदनी पड़ेगी, और इक बार आपकी लाटरी निकल गई तो ये इस बात की गारंटी नही की आपकी दूसरी बार भी लाटरी निकलेगी ही,

इसकी विपरीत बाते भी इतनी ही सही है,जैसे एक बार की सफलता हर बार की सफलता की गौरंटी नही वैसे ही थोड़ी सी असफलता का मतलब ये नही की आप एक असफल इंसान है और कभी सफल नही हो सकते,असफलता केवल यही सिध्द करती है कि सफलता के लिए जो कुछ जरूरी थ उसमे कुछ कमी रह गयी,उसमे सुधार करने की जरूरत है,सही सफलता पाना बहुत कुछ एक स्वादिस्ट सब्जी बनाने के जैसा है,जैसे एक अच्छी सब्जी बनाने के लिए ये आवश्यक है कि सभी मसाले सही अनुपात में हो,अगर एक बार आपकी सब्जी अच्छी नही भी बनी तो अगले बार सब्जी बनाते समय ये धयान दे कि सब्जी में क्या गलत था,उसे सुधारे,मगर हम अक्सर उसमे सुधार करने की जगह मीनू ही बदल देते है,

व्यवहारिक दुनिया आपके प्रयासो को नही बल्कि आपके नतीजो को तरजीह देती है,लेकिन इसका मतलब ये कभी भी नही की आपके द्वारा किये गए प्रयास बेमानी है,जिंदगी के किसी भी क्षेत्र में कई गयी आपकी कोशिशें आप को सिखाती है,और  जब तक आप सीखने की इच्छा रखते है आप मे सुधार की गुंजाइश है,एक बार की असफलता से अपने आप को निराश न करे,

इस बात से बहुत ज्यादा फर्क नही पड़ता कि लोग आपके बारे में क्या सोचते है,है लेकिन इस बात से बहुत फर्क पड़ता है आप अपने बारे में क्या सोचते है??,आप एक बार सफल नही हो पाये तो कोई बात नही इसमे कोई बुराई नही,लेकिन अगर आप दूसरी बार कोशिश भी नहीं करते तो ये गलत है,लोगों का ध्यान शिकायतों पर केंदित रहता है सुधार और समाधानो पर नही,

कई बार हम अपनी उम्र  लेकर ये सोचते है कि शायद कोई नया का करने के लिए ये सही उम्र नही मगर याद रखिये उम्र सिर्फ एक संख्या है ,और कुछ नही,एक सही काम करने के लिए कोई उमर या कोई समय बुरा नही,इस दुनिया मे स्थाई कुछ भी नही,जिंदगी की खूबसूरती इसकी अनिश्चचितता है इसका मजा लीजिये,उन  बातों पर ध्यान दीजिए जो आपके हाथ मे है,उन बातो में सुधार कीजिये,

हम सभी  बड़े ही धार्मिक प्रवृत्ति के लोग है,आपमे धर्मग्रथ को पूजते है, कभी उनका अर्थ भी समझ ने की कोशिश किजिये,विश्व के सबसे बड़े और पुरातन ग्रन्थों में  एक श्री भागवत गीता जिसे निसंदेह आज तक का सर्वश्रेठ सक्सेस लिटरेचर कहा जा सकता है उसे एक बार फिर पढ़िए इस बार सिर्फ धार्मिक नजर से नही बल्कि प्रेरणादायक साहित्य की नजर से,

खास कर इस पंक्ति को " कर्मने वाधिकारस्ते मा फल सुकदाचना,"आर्थात कर्म करो फल की इच्छा करो,आपके  प्रयासआपका फल खुद निर्धारित कर देंगे,कोशिश जारी रखिये,स्थायी कुछ भी नही,दुनिया मे एक ही बात है जो स्थायी हैवो हैं परिवर्तन,कोशिश कोजिये की आप हमेंशा सकारात्मक परिवर्तन कि तरफ हो,एक बीज पेड़ भी बनता है और सड़ कर मिट्टी भी,ये आप पर निर्भर है कि आपको क्या बनना है,

Monday, 28 August 2017

लाइफ मंन्त्रा: एक ही बात के कई मतलब निकाले जा सकते है

एक दार्शनिक ने शराब की बुराइयों को बताने के लिए लोगो के सामने एक डेमो रखा,उसने दो जार लिए, एक मे पानी भरा और एक मे शराब डाल दी,पहले उसने पानी मे एक कीड़ा डाला,जो कि आराम से पानी मे तैरता और खेलता रहा,फिर उसने शराब के जार में एक कीड़ा डाला जो कि छटपटाता और मर गया,इस डेमो के बाद उसने लोगो से पूछा कि मेरे इस डेमो से आप लोगो ने क्या सीखा,जहां अधिकतर लोगों  ने कहा कि इसका मतलब ये है कि शराब मारने का काम करती है,सेहत के लिए हानिकारक है,वही एक इंसान का मत थोड़ा हास्यापद मगर बिल्कुल अलग और निराला था, उसने कहा आप के इस प्रयोग से हमे ये शिक्षा मिलती है कि शराब पीने से पेट के कीड़े मर जाते है,

ये बात दर्शाती है कि कई बार आप जो बात कहना चाहते है वो हमेशा उस रूप में लोगो तक नही पहुचती जिस रूप में आप कहना चाहते है,किसी भी बात का अर्थ एक से दूसरे दिल/दिमाग तक पहुचते पहुचते अलग रूप में भी पहुचती है,क्योकि एक बात से बहुत भावार्थ निकलते है,और ये हर किसी के बौद्धिक स्तर और मानसिकता पर निर्भर करता है कि कौन,कब,किस बात को किस परिपेक्ष में ले,आप जो बात कहना चाहते है ये बात उसी रूप में सामने वाले के पास पहुँचे इसके लिए शब्दो का सही चयन होने के बाद भी कई बार आपके कहने का तरीका आपके कहने का भावर्थ बदल देता है,

देश के 2009 के तत्कालीन ग्रामीण विकाश मंत्री जयराम रमेश में स्वछता को लेकर एक बयान दिया था की " घरों में देवालय से पहले सौचालय बनाने चाहिए" तो इस बात पर बहुत विवाद हुआ था,और इसे हिन्दू धर्म और आस्था से जोड़ कर देखा गया था जबकि जयराम रमेश कंही न कही एक अच्छी बात कहने की कोशिश कर रहे थे कि घरों में शौचालय जरूरी है,लगभग यही बात प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने भी कही और उनकी बातों को लोगो ने हाथों हाथ लिया, एक ही बात शब्दो के हेरफेर और कहने के तरीके के कारण किसी को जीरो तो किसी को हीरो बनाती है,

कमोबेश हमारी जिंदगी में हर रोज यही होता है कभी कभी कुछ सही शब्दो के अभाव में,कुछ गलत रिप्रजेंटेशन के अभाव में,कुछ गलत तुलना के अभाव में हम जो बात कहना चाहते है उससे अर्थ का अनर्थ हो जाता है फिर हमारे सकारात्मक रुख को कोई नही देखता,कुदरत का अजीब खेल है एक ही चीज को एक ही समय मे एक ही जगह में कई व्यक्ति देखते है उसके बारे में अपनी अलग अलग राय रखते है और मजे की बात सब सही रहते है,हर किसी की मानसिकता अलग है,सोच अलग है,सोचने का ढंग अलग है,

अपनी बात सही ढंग से ,सही रूप में,सही जगह तक लोगो तक पहुचना एक बहुत ही दुर्लभ कला है,जो हर किसी के बस की बात नही,बस लेकिन अपने लिए ये नियम बना के चले कि कोशिश करे कि हर बात में छुपी सकारात्मकता को ग्रहण किया गया और नकारात्मकता को इग्नोर कियाया जाए, क्योकि एक ही बात आपको बहुत कुछ सिखाती है,गन्ने के कई उपयोग है इसका शर्बत भी बनता है और विशेष परिस्थितियों में इसे लठ्ठ के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है,हर बात/कार्य के कई रूप होते है,जब कोई सोने की खुदाई के लिए जाता है तो 1 किलो  सोना पाने के लिए आपको के ट्रक मिट्टी हटानी पड़ती है,लेकिन आप का मकसद मिट्टी नही सोना पाना होता होता है,इसके लिए आप मिट्टी को इग्नोर करते है,कीमती वो  चीज है जो हम खोजना चाहते है,किसी भी बात/कार्य से सकारात्मक अर्थ ग्रहण करे,

Sunday, 27 August 2017

लाइफ मंत्रा: अकेला चना भी पहाड़ फोड़ सकता है,

लाइफ मंत्रा : अकेला चना भी पहाड़ फोड़ सकता है,

काटाबांजी और आस पास के इलाके के लोग आजाद क्ल्ब से भली भांति परिचित है,आजाद क्लब आस पास के अचल में अपने भव्य गणेश पूजा पंडाल,इसके यूनिक आईडिया,और कर्मठ और समर्पित कार्यकर्ताओ के विख्यात है,अपने भव्य गणेश पंडाल और नए आईडिया इस गणेशोत्सव की पहचान है,लगभग 25 वर्षो से आजाद क्लब गणेशोत्सव धूमधाम से पालित करती हैऔर इसके लिए इसका यूनिक नेस के लिए इसकी अलग पहचान है,आजाद क्लब का हर सद्स्य अपने स्तर पर इसमे लिए अपना सर्वश्रष्ठ देता है, मगर पिछले कुछ वर्षों से  जिस एक व्यक्ति के निर्देशन में ये का दायित्वपूर्ण मार्गदर्शन में हो रहा है वो है,  Yuva Ashish Agrawal (जिसे लोग बद्री के नाम से बेहतर जानते है) ,वर्तमान आजाद गणेश  पंडाल के निर्माण में पिछले कुछ सालों से उसके भूमिका सराहनीय है, उसके बिना आजाद गणेश पंडाल की भव्य कल्पना थोड़ा मुश्किल है,पंडाल के डिजाइन से लेकर,हर छोटी बड़ी चीज का काम वो जिम्मेदारी से करता है,और ये उस की यूनिक सोच,अथक और निरंतर मेहनत का प्रयास रहता है कि आजाद गणेश पंडाल में इतनी भव्यता आती है, आशीष आजाद क्लब के उन महत्वपूर्ण आधार स्तंबो में से एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिस पर आजाद क्लब के गणेश पंडाल की इमारत खड़ी होती है,

आशीष जैसे लोग इस बार का उदाहरण है कि अगर  मन मे ठान लिया जाए तो सिर्फ अपनेइच्छशक्ति से भी काफी कुछ किया जा सकता है, हम अगर मन मे कुछ ठान ले,और उसके लिए पूरे दिल से अपना 100% दे कर काम करे तो कुछ भी असम्भव नही,हर काम पहले बहुत मुश्किल होता है और फिर हर मुश्किल आसान हो जाती है,लेकिन इसके लिय खुद पर भरोशा,निरन्तर कार्यशक्ति एवम समर्पण चाहिए होता है जो हर किसी के बस की बात नही,

हम बचपन से सुनते आए है कि "अकेला चना पहाड़ नही फोड़ सकता" इस कहावत का मतलब ये है कि हमे समाज मे मिलजुल कर चलना चाहिए मगर अपने अधूरे ज्ञान और सीमित सोच के कारण इस का मतलब ये समझ लिया गया कि अकेला इंसान कुछ नही कर सकता,कुछ भी करने के लिए इंसान को साथ चाहिए, एक अकेला आदमी भी दुनिया बदल सकता है लेकिन इसके लिए पहले खुद की बदलना पड़ता है,रोज आपके आंखों के सामने सैकड़ो ऐसे उदाहरण आते है जिसमे किसी ने नगर बदला है किसी मे गाव, किसी ने राज्य ,किसी ने देश,
लेकिन इसके लिए हर घड़ी अपने लक्ष्य को आंखों के सामने रखकर, दिन रात भूलकर उसके लिए प्रयास करना पड़ता है,

एक अकेला दशरथ मांझी  छैनी और हथौड़ी से पहाड़ तोड़ कर रास्ता बना सकता है,एक अकेला मार्क जुकरबर्ग सारी दुनिया को फेसबुक से एक प्लेटफार्म पर ला सकता है,एक अकेला मोदी एक राजनीतिक पार्टी को फर्श से अर्श पर पहुचा सकता है,एक अकेला साधारण सा पेट्रोल पंप अटेंडर देश की सबसे बड़ी कंपनी खड़ी कर सकता है,उद्दाहरण ऐसे करोडो है मगर जो बात इन सब में कॉमन है और इन्हें भीड़ से अलग करती है वो है इनका अपने उपर विश्वास,इनके काम करने की शैली,इनका हार न मानने का जज़्बा, निरंतर लगे रहने का जुनून,ऐसी बात नही की इन जैसे व्यक्तियों को सफलता/नाम/शोहरत इसलिए मिलती है की क्योकि इनकी किस्मत अच्छी होती है बल्कि इसलिए मिलती है क्योंकि इनकी मेहनत अच्छी और निरंतर  होती है,ये असफल तो होते है मगर असफलता इन्हें निरुत्साहित नही करती बल्कि सिखाती है,ये रिस्क लेने से नही डरते,जिम्मेदार होते है, लोगो की आलोचनाओं से इनको कुछ फर्क नहीं पडता,हार के बावजूद ये अपना काम करना बंद नही करते,रुकते नही,अपने काम मे लगे रहते है,ये नतीजो की परवाह किये किये बिना अपना सर्बश्रेष्ठ देने की कोशिश करते है बस यही बात ऐसे लोगो को खास बनाती है,

ऐसे लोग इस कहावत को झूठ लाते है कि "अकेला चना पहाड़ नही फोड़ सकता"ऐसे लोग आपको सिखाते है कि अकेला चना भी पहाड़ फोड़ सकता है,बस उसमें निरतंरता होनी चाहिए,अकेला आदमी भी दुनिया बदल सकता है मगर इनके लिए पहले खुद को बदलना होता है,
कोई भी बड़ा काम और उसकों करने के लिए संघर्ष अकेले ही करना होता है भीड़ तो आपके पिछे तब आती है जब आप सफल हो जाते है,सफलता के लिए भीड़ नही खुद का भरोशा चाहिए, इस विषय में  शहीदे-आजम भगतसिंह की कही एक बात कहना चाहूंगा कि" जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती है,औरो के कंधे पर तो जनाजे जाते है"

आप क्या है या क्या नहीं है ये आप खुद तय करतेे है,आप अकेले है या कोई आपके साथ है ये कोई बहुत जयादा मायने नही ंरखता है मायने ये रखता है कि आप अपने काम के प्रति कितने कमिटेड है,जैसे एक सूरज पूरी दुनिया को रोशनी देता है,जैसे एक चांद पूरी रात रोशन कर देता है,एक अकेला आदमी भी दुनिया बदल सकता है,अकेला चना भी पहाड़ फोड़ सकता है|जिसे खुद पर भरोसा है उसके लिए कोई काम मुश्किल नही

Monday, 21 August 2017

लाइफ मंत्रा: आपकी मर्जी के बिना कोई आपको छोटा महसूस नही करा सकता

घर से नहा धोकर मंदिर गया,मंदिर से बाहर निकला तो पता चला की मैं भूल से मैं दो अलग अलग चप्प्पल पहन आया था,उस दो अलग अलग चप्पल को पहन में वापस घर जाने में मन को बहुत शर्मिंदगी का अहसास हुआ ,वापस आते समय ऐसे लग रहा था की जैसे सारी दुनिया मुझे ही देख रही है,और मुझे चिढ़ा रही है,राम राम करते मैं किसी तरह घर पहुचा,मुझे किसी ने नहीं टोका,मगर घर से मंदिर को वो छोटा सा रास्ता पहाड़ की तरह गुजरा,जाते वक्त जो रास्ता पांचमिनट का था आते समय वो रास्ता बहुत लंबा प्रतीत हुआ,हर वक्त यही डर की कंही कोई देख न ले और शर्मिंदा न कर दे,लेकिन मैं बिना किसी के टोके घर पहुच गया जबकि रास्ते मे कई परिचितो से मिला भी,

इस छोटी सी घटना ने इंसानी के मनोविज्ञान की एक बहुत बड़ी बात का अहसास हुआ की हम अगर आप को गलत मान लेते है तो खुद को बहुत शर्मिन्दा कर लेते है,ये सिर्फ हमारी सोच है की कुछ गलत कर हम दुनिया के लिए दोषी हो गए या हास्यापद हो गए है,

कहने का अर्थ ये है की हम अपने आप को उसी रूप में देखते है जो की हम अपने बारे में सोचते है...दुनिया हमारे बारे में क्या सोचती है इसका निर्धारण हम खुद की करते है,किसी को भी अपने बारे में।सोचने का अधिकार हम खुदु देते है, उनको हमारा मजाक बनाने का अधिकार हैम खुद देते है,

इसलिए कभी कभी अपनी गलतियों के लिए
अंधे बन जाइए ,अपनी बुराइया सुनने के लिए बहरे हो जाइये,एक पुरानी कहावत है कि "गर्मी ,ठंडी और बेज्जती उतनी ही महसूस होती है जितनी कि महसूस किं जाये" कोई बात  आपको कितनी परेशान करती है ये बात आप खुद ही निर्धारित करते है, कोई आपको गुस्सा दिलाता है है तो गुस्सा व्व नही दिलाता आप होते है,कोई बात आपको चिड़चिडा करती है तो वो बात नही बल्कि आपका स्वभाव करता है,आपकी भावनाओं को कंट्रोल करने का आधिकार लोगो को मत दीजिये ,अपना रिमोट  अपने हाथ मे रखिये |

आपको  रास्तें में आने वाले कंकडों से परेशानी होती है तो पूरी दुनिया मे कार्पेट बिछाने से कंही ज्यादा आसान हौ की पांवो में जूते पहन लिया जाए, आपकी मर्जी के बिना आपको कोई छोटा महसुस नहीं करा सकता,मन के हारे हार है,मन के माने जीत...

Saturday, 19 August 2017

लाइफ मंत्रा: आपने अपने आप को आखरी बार कब फॉर्मेट किया था

मैं एक सोशल मीडिया में एक्टिव व्यक्ति हु और अपने मोबाइल का बहुत ज्यादा उपयोग करता हूं,इसके अलावा व्यापार कार्य के लिए भी इंटरनेट,ईमेल,और फ़ोन के लिए मोबाइल का लगातार उपयोग करता हु,पिछले कुछ दिनों से में ये महसूस कर रहा था कि मेरा मोबाइल बहुत स्लो हो गया है,और मैं इसे ठीक से उपयोग नही कर पर रहा हु जिससे मुझे काफी असुविधा हो रही थी,मैंने मेकेनिक को दिखाया तो उसने कहा कि आपके मोबाइल में जंक फ़ाइल,और कई मेमोरीज बहुत बढ़ गयी है,कई अनचाही फ़ाइलो ने बहुत जगह ले ली है इसलिए आपका मोबाइल स्लो हो गया है,क्योकि इंटरनेट के चलते कई फ़ाइल अपने आप मोबाइल में डाउनलोड हो जाती है,कई फ़ाइल आहि डाउनलोड होनेके राह जाती है,जो कि टेमपिरारी फ़ाइल के रूप में मोबाइल का स्पेस खाती है,मैने इसका इलाज पूछा तो बताया कि आप  अपने मोबाइल को फॉर्मेट करवा लीजिये तो इससे ठीक हो जाएगा,और उसके बाद वापस आपके मोबाइल की गति पहले जैसे हो जाएगी,

मैंने मेकेनिक से पूछा कि ये ये फॉर्मेट क्या होता है तो उसने बताया कि फॉर्मेट में हम जो जरूरी चीजे है उसका बैकअप ले कर बाकी सब डिलीट कर देते है और फिर कंपनी सेटिंग को रीस्टोर करके आपके बैकअप से जो जरूरी चीजें वापस फ़ोन में डाल देते है जिससे फ़ोन से अनवांटेड डेटा,जंक फ़ाइल, टेम्पररी फ़ाइल, वायरस और सब परेशानियां दूर हो जाती है, फ़ोन की मेमोरी फ्री हो जाती है,और हमारे मोबाइल की कार्यक्षमता बढ़ जाती है,और इसकी गति भी बढ़ जाती है,

काफी कुछ ऐसा ही हमारी जिंदगी में हमारे साथ भी है,हम अक्सर एक नियमित अंतराल में ये महसूस करते है कि हमारी कार्यक्षमता कम हो गयी है, हमारा उत्साह कम हो जाता है,हम अपने आप को डिप्रेस्ड महसूस करते है वो इसलिए होता है क्योंकि हम समय समय पर अपने आप को फॉर्मेट नही करते, हमे समय समय पर अपने आप को फॉर्मेट करते रहने की आवश्यकता है,

जैसे मोबाइल का इंटरनेट से जुड़े होना उसकी कार्यक्षमता बढ़ता है,और फ़ोन ढंग सेकाम करे इसके लिए जरूरी है वैसे ही हमारा भी सामाज से जुड़े रहना जरुरी है,जहां ये हमारी कार्यक्षमता बढ़ता है वंही के बार हमारे न चाहते हुए भी कई ऐसे लोगो के कमेंट या व्यवहार हमारे मन मे घर  कर लेते है जो कि अनवांटेड होते है,और हम उन्हें अपने दिल में कोई काम न होते हुए भी स्टोर कर लेते है
जो कि सीधे हमारी कार्यक्षमता को कम करता है,कई बार गल्फहमियो के वॉयरस अपने किसी खास औए प्यारे इंसान के साथ हमें रहने से रोक देते है,कई बार हैम इसलिए वायरस के शिकार हो जाते है कि क्योकि हमने खुद को अपडेट नही किया होता,

इन सब मुश्किलो से बचने का एक ही तरीका है कि समय समय पर अपने आप को आत्मचिंतन कर के फॉर्मेट करते रहे,गलत फहमियों के वायरस को डिलीट कर,अपने आस पास केलोगों द्वारा दिये गए अनवांटेड कमेंट को इग्नोर करे,खुद को समय समय पर लोगो से मिल जुल कर उपडेटेड रखे,लेकिन इसमें भी एक बात हमेशा याद रखने की जरूरत है की मोबाइल में कुछ प्रोग्राम ऐसे होते है जो मोबीइल के लिए डिफ़ॉल्ट होते है ये भले ही बहुत स्पेस लेते है मगर जिनके बिना मोबाइल चल नही सकता कभी उनको डिलीट करने की मत सोहिये,हमेशा उनका बैकअप रखिये और उन्हें रिस्टोर करिये,

अपने मातापिता  अपने दोस्त यार एंटीवायरस की तरह होते है जैसे एंटीवायरस किसी भी एप्प या प्रिग्राम को मोबाइल में में लोड होने से पहले उसे जांचते है कि कंही उनमे कोई वायरस तो नही,कंही व्व मोबाइल के लये हानिकारक तो नही,इससे आप को चिड़चिड़ापन तो होता है क्योकिनये कुछ अतिरिक्त समय लेता है मगर आपके मोबाइल  को आगे केलिए सिक्योर भी करता है,वैसे ही मातापिता ,सही दोस्त यार,वैलविशेर कि बाते भी एंटीवायरस है जो क्षणिक तौर पर हमें चिड़चिड़ा  बनाती है मगर हमारी आने वाली जिंदगी को सेक्योर करती है,

आपके जिंदगी में आपका ऑपरेटिंग सिस्टम हमेशा सही ढंग से काम करे और स्मूथली काम करे,एक अच्छी स्पीड से काम करे इसके लिए अपने आप को नितमित अंतराल आत्मचिंतन से फॉर्मेट करते रहे,आपकी कार्यक्षमता बनींरहेगी,