Friday, 18 August 2017

लाइफ मंत्रा: आप अपनी ब्रांडिंग खुद करते है

आज का लेख थोड़ा लंबा लग सकता हैंगर बेहद महत्वपूर्ण है अगर आप एक सक्रिय सोशल मीडिया यूजर है तो,थोड़ा समय निकालकर अवश्य पढ़ें,

कल मेरे एक कजिन Vineet Agrawal के साथ बहुत दिन बाद मुलाकात हुई,विनीत एक कंप्यूटर इन्जिनियर  है,और उसकी एक रेपुटेड आई टी कंपनी में प्लेसमेंट हो चुकी है, मगर अभी कॉल नही आया है,अभी अपने खाली वक्त में वो वेबसाइट डेवलोपमेन्ट और डिजिटल मार्केटिंग का काम कर रहा है,उसकी बातें,उसके साथ गुजारे हुए 3 घण्टे और उसके वर्किंग स्टाइल को देखकर ये बात मैं शर्तिया कह सकता हु की वो एक भविष्य का बिलेनियर और एक सक्सेस युथ आइकॉन है,उसका ज्यादा फोकस डिजिटल मार्केटिंग में है,और उसके साथ डिजिटल मार्केटिंग को लेकर कई बातें हुईं,जिसमे उसने बताया कि वो उसे पिछले कुछ महीनों से एक ब्रांड मैनेजर के साथ काम करने का अवसर मिला जो कि किसी भी चीज के ब्रांडिंग में स्पेशलिस्ट है,उससे काफी कुछ सीखने को मिला कि कैसे कोई चीज ब्रांड बनती है या बनाई जाती है,किसी चीज को एक ब्रांड बनाने के लिए उसके छोटे छोटे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है,ब्रांड के लोगो से लेकर टैगलाइन तक सभी चीजों के लिए डीप रिसर्च की जाती है, उस ब्रांड के प्रोस्पेक्टिव यूजर के बारे में डेटा कलेक्ट किया जाता है, उनके मनोविज्ञान और मानसिकता को समझा जाता है उस पर स्टडी की जाती है,और ये सभी चीजें निर्धारित करने के बाद लगातार उस का विज्ञापन किया जाता है,उस ब्रांड से रेलेटेड हर चीज एक ही लोगो, कलर कॉम्बिनाशन,डिज़ाइन टैगलाइन,बारम्बार अपने प्रोस्पेक्टिव ग्राहक के सामने रिपीट किये जाते है,जिससे धीरे धीरे ग्राहक के दिमाग मे उस की छवि अंकित होने लगती है, और धीरे धीरे ग्राहक को उस ब्रांड को इग्नोर करना मुश्किल हो जाता है,और वो उसका निरन्तर ग्राहक बन जाता है, साथ ही ये निरंतरता इतना इफ़ेक्ट करती है कि उससे मिलती जुलती लोगो या कलर कॉम्बिनाशन में भी उसे वो ही ब्रांड नजर आने लगता है,उदाहरण के तौर पर लाल रंग की हिंदी में लिखा हुआ कोई भी लोगो देखने पर हमें" आज तक" याद आता है,कही लाल सफेद पट्टी दिख जाए और उस पर कुछ लिखा हो तो एयरटेल याद आ जाता है,ये मेमोरी धीरे धीरे इतनी स्ट्रांग होती जाती है कि हम धीरे धीरे बिना नाम के भी सिर्फ लोगो से उस ब्रांड को पहचानने लगते है,इसे बिज़नेस की भाषा मे ब्रांडिंग कहा जाता है,

जैसे ब्रांड मैनेजर किसी चीज का ब्रांड बनाते है वैसे ही हम खुद भी अपना ब्रांड बनाते है,आजकल सोशल मीडिया में हम इतने एक्टिव है कि वो हमारे जिंदगी का हिस्सा बन गया है,और जाने अनजाने हम इसको उपयोग कर के अपनी सही या गलत ब्रांड बनाते है, यहां ब्राण्ड मतलब आपकी इमेज अपनी छवि,वो पूर्वाग्रह जो लोग आपके बारे में आपसे मिलने से पहले सोचते है,आपके प्रति लोगों की सोच है,हमारे बारे में लोगो की राय क्या है वो क्या सोचते है इसका निर्धारण हम खुद ही करते है,और आज कल इसबात के निर्धारण में हम जिस तरह से  सोशल मीडिया जैसे फेसबुक और व्हाट्सएप्प को उपयोग करते है,वो बहुत महत्वपूर्ण हो गया है,हम अपनी दिन प्रतिदिन दिन की एक्टिविटी सोच,प्रोग्राम सोशल मीडिया में पोस्ट करते है जो कि लोगो के मन मे हमारी वैसे ही छवि बनाता है,

कुछ लोग बिना किसी बात/खबर को कन्फर्म किये उसको पोस्ट करते है जिनमे से ज्यादा अफवाहै होती है,लगातार ऐसी पोस्ट उनकी विश्वसनीयता कम करती है,कुछ लोग दिन रात सोशल मीडिया पर गुड़ मॉर्निंग से लेकर गुड़ नाईट तक अपनी हर एक्टिविटी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते है उनके लिए लोगो के मन मे ये नकारात्मकता आती है कि वो बहुत खाली/और आम जीवन में निष्क्रिय है,जो लोग लगातार अंधविश्वास और "7 लोगो को भेजो मंगल होगा" जैसे पोस्ट लगातार करते है उनके बारे में ये सोच आम हो जाती है कि वो एक डरे हुए,वहमी,और अंधविश्वासी इंसान है,कुछ लोग लगातार " इसे शेयर करे और फ्री टॉकटाइम पाए" जैसे पोस्ट शेयर करते है ऐसे लोग अपने आप को एक लोभी और मनी माइंडेड  के रूप में अपनी इमेज बनाते है,लगातार दुखी शायरी /रोमांटिक पोस्ट छोड़ने वाले अपने आप को आशिक/दुखी आशिक के रूप में प्रोजेक्ट कर लेते है,लगातार अश्लील पोस्ट/चुटकुले/गालिया पोस्ट करने वाले कि मन मे अपने आप एक ठरकी/रसिक छवि बन जाती है,अपने बहूत ज्यादा सेल्फी और स्टॉउस अपडेट करने वाले के बारे में अहंकारी होने की धारना बनती है,जो लोग हर बात पर बहस करते आए और रिप्लाई देते है उनकेे बातो को लोग गंभीरता से लेना बंद कर देते है,वो अपनी कीमत ख़ुद। करते है,किसी भी बात का रिप्लाई न देने से आपकी व्यस्त नही एक अहंकारी इमेज बनती है,

जाने अनजाने हम अपनी सोशल मीडिया एक्टीविटी से अपनी छवि काफी डेमेज कर लेते है

वही कई लोग इसका अच्छी और व्यवस्थित ढंग से उपयोग कर अपनी सकारात्मक छवि भी बनाते है,जैसे कुछ लोग सोशल मीडिया में किसी भी गलत खबर/अफवाह का खंडन कर अपनी एक बुद्धिजीवी छवि बनाते है, किसी गलत बात का सही तरीके से विरोध कर वो अपनी बोल्ड और साहसिक इमेज बनाते है,अपने निरंतर सामाजिक संदेशो से वो एक सामाजिक छवि बनाते है,कई लोग अपनी आर्ट/टेलेंट को इसमे पेश कर अपने अपनी कलाकार की इमेज बनाते है,मेने खुद ये महसूस किया है कि जब से मै निरन्तर जीवनुपयोगी ब्लॉग/सक्सेस लिटरेचर/जानकारी / सोच लिख रहा हु तो मैरे बारे में भी लोगो की सोच काफी बदली है,

कुल मिलाकर मेरे कहने का मतलब ये है कि हम अपनी ब्रांडिंग खुद करते है,हम जो ये सोच कर सोशल मीडिया में कुछ भी पोस्ट कर देते है कि ये तो मुफ्त है इसके कोई पैसे नही लगते,हमे इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, सोशल मीडिया वो आईना है जहां न चाहकर भी आपका असली चेहरा/व्यक्तित्व झलक जाता है,इसलिए अपनी सकारात्मक छवि बनाने के लिए इसका सम्भाल कर उपयोग करे,अपनी ब्रांडिंग खुद कीजिये,अपनी ब्रांड वैल्यू खुद बढाइये,

Thursday, 17 August 2017

लाइफ मंत्रा: एक गंभीर बात भी आसान तरीके से समझाई जा सकती है

टॉयलेट एक प्रेम कथा ,आज ये फ़िल्म देखी,मै सिर्फ टाइम पास के हिसाब से ये फ़िल्म देखने गया था, मगर फ़िल्म देखने के बाद मेरा एक ही कहना है कि आप सभी ये फ़िल्म जरूर देखें,इसलिए नही ंकी ये एक कमर्शियल मजेदार फ़िल्म है, इसलिए क्योकि ये फ़िल्म नही अपने आप मे एक स्कूल है,जिससे आपको जिंदगी को आसान बनाने के कई पाठ सीखने को मिलेंगे,

इस फ़िल्म की खासियत या इसका मुख्य हीरो अक्षय कुमार या अनुपम खेर नही,इस कि ख़ासियत है इसकी पटकथा,कहानी,कांसेप्ट,इस फ़िल्म में इतने गंभीर विषय को जिस आसानी और सहजता से पेश किया गया है वो अपने आप मे काबिले तारीफ है,ये फ़िल्म हमे सिखाती हैं कि समस्या कितनी भीं गंभीर हो उसे आसान भाषा मे भी लोगो को समझाया जा सकता है और उसके  समाधान के लिए प्रेरित किया जा सकता है फ़िल्म में नायिका की तकलीफ आपको महसूस होती है,ये खास बात है,फ़िल्म आपको आपके साथ जोड़ती है, भले ही मल्टीप्लेक्स में बैठी पब्लिक जो शुरू से टॉयलेट उपयोग करती है उनको ये कहानी काल्पनिक या सिर्फ मजकिया लगे मगर ये फ़िल्म भारत के गावो की रूढ़िवादी सोच को उजागर करतो है, 

ये बात हमेशा बहुत मायने रखती है कि आप जो कह रहे है या कहना चाहते है वो लोगो तक उसी रूप में पहुचता है जिस रूप में  कहना चाहते है, फिल्मकार अपनी बात पूरी तरह से लोगो तक बहुत ही सहज तरीके से पहचाने में शत प्रतिशत सफल रहे है,उनको शत शत बधाई,

मुझे पता है ये फ़िल्म अच्छी  कमाई भी  करेगी,मगर कमर्शियल हिट के मामले में कोई बहुत बड़ा कीर्तिमान नही बनायेगी,लेकिन एक गंभीर समस्या को एक सरल रूप से लोगो के सामने पेश करने को लेकर ये फ़िल्म हमेशा याद रखी जायेगी,देश के प्रधानमंत्री जब स्वच्छ भारत की बात करते है तब तक ये स्वछता या शौचालय इतनी बड़ी समस्या नही लगती थी मगर इस फ़िल्म में जिस बारीकी से इस समस्या की गंभीरता को समझता और दिखाया गया है उससे एक आदमी भी इस समस्या को महसूस करता है,जब हम किसी समस्या को अपनी समस्या महसूस करते है तोउसके समाधन के बारे भी गंभीरता सें सोचते है और जब बात दिल को छूती है आदमी उसके बारे में सोचता है,काम करता है, सुधरता है,

फ़िल्म के कुछ संवाद दिल को छूते है,एक संवाद की औरत ही औरत को आगे बढ़ने नही देती,अपने आप मे काफी गूढ़ अर्थ लिए हुए है,चाहे वो,भ्रूण हत्या हो, रेप हो,दहेज प्रतारणा हो या आनर किलिंग या औरतो से जुड़ी हर समाजिक समस्या में कंही न कंही औरत का दखल  बहुत ज्यादा है,

फ़िल्म ये भी सिखाती है कि सहन करना या अडजस्ट करना बहुत अच्छी बात है मगर जो गलत लगे उसका विरोध जरूरी है,फ़िल्म सिखाती है कि"जिद करो दुनिया बदलो" ,जब आप किसी अच्छे काम के लिए निकलते है तो आपकी राहो में बहुत मुश्किले आती है मगर उनसे घबराना नही उनका सामना करना हल है,

फ़िल्म में एक गभीर विषय को हल्के फुल्के,ढंग से कई मजाकिया सीन के साथ पेश किया गया है,इससे ये सीखा जा सकता है कि आपकी समस्या को बोझ बनाकर नही मनोरंजक बनाकर पेश कीजिये उसे बहुत तवज्जो मिलेगी,आपके कहने का ढंग आपकी समस्या की गंभीरता का पैमाना है,

कुल मिला कर एक सुखद अनुभव ,मेरी व्यक्तिगत राय की इस फ़िल्म को भारत के प्रत्येक गांव में निशुल्क प्रदर्शन किया जाए इससे स्वच्छ भारत अभियान को बल मिलेगा,भारत मे शौच संबधी समस्याओं के लिये शौच व्यवस्था नही लोगो की सोचने की व्यवस्ता में परिवर्तन ज्यादा जरूरी है,इस। फ़िल्म को देखने के बाद एक  बधाई में भारत सरकार के उस अधिकारी को भी देना चाहूंगा जिसने शौचालय कार्यक्रम के लिए ये टैगलाइन बांयी कि "जहा सौच वहां शौचालय".ये फ़िल्म इस टैगलाइन को पूरा सार्थक करती है, भारत मे ऐसी और फिल्मों की जरूरत है, क्योकि भारत के एक बडे हिस्से  की आम जान जीवन शैली बड़े पर्दे से प्रेरित है,

Monday, 14 August 2017

लाइफ मंत्रा: अपनी जिंदगी नही समस्या खत्म कीजिये

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में बिहार के बक्सर के डीएम मुकेश पांडेय की आत्महत्या का मामला सुर्खियों में है,उन्होंने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बना कर इसके बताया कि अपनी पत्नी और माता पिता के बीच निरंतर हो रही पारिवारिक कलह से परेशान होकर उन्होने आत्महत्या ट्रेन के आगे कूदकर आत्महयता कर ली,2012 बैच के आई ए एस मुकेश ने न जाने कितनी मिश्किलो से लड़कर प्रतिष्ठित परीक्षा पास की मगर अपना अपने आप से हार गए,आत्महत्या से पहले मुकेश ने एक वीडियो बनाया और उस आत्महत्या का कारण अपनी पत्नी और मातापिता के निरंतर कलह को बताया,और इस निरंतर कलह के चलते उनका पारिवारिक जीवन  नरक बन गया था,और इस कारण वो भारी चिंता के कारण अवसाद में थे,और ये अवसाद को खत्म करने का सबसेेआसान तरीका उन्हें आत्महत्या लगा और उन्होंने अपना जीवन खत्म कर लिया,जब 2012 में मुकेश आईए एस बने होंगे तो वो भारत के युवाओ के लिए प्रेरणा के स्रोत बने होंगे,उनका आत्मविश्वास जगा होगा मगर उनकी आत्महत्या ने करोडों लोगो के लिए एक गलत उदाहरण का मार्ग प्रसस्त किया कि आत्महत्या सभी समस्याओं का अंत है,

इस बात ने मुझे बहुत दुखी किया कि आम इंसान ही नही बल्कि अपने आप को सफल साबित कर चुके इंसान भी इस तरह का कदम उठाते है,ये बात शास्वत सत्य है कि हर व्यक्ति के मन मे कभी न कभी एक बार ये खयाल या ऐसा समय अवश्य आता है जब उसे लगता है कि उसके साथ जो मुश्किल है उससे उसकी जिंदगी खराब हो गयी है,वो अपनी मुश्किलो से बाहर नही निकल सकता और इस लिए वो मुश्किलो को खत्म करने का एक आसान रास्ता सोचता है और वो सोचता है कि खुद को खत्म कर के समस्या को खत्म कर लिया जाए,

कितनी गलत सोच है ये, सच ये है कि हम जिंदगी से नही अपनी संमस्याओ से परेशान है,तो इसलिए हमें अपनी जिंदगी नही समस्याएं खत्म करनी चहिये,"आत्महत्या एक क्षणिक समस्या का स्थायी हल है" ये बात हमेशा याद रखने की जरूररत है कि जिंदगी में कभी भी कुछ स्थायी नही,जैसे सुख स्थायी नही वैसे दुख भी नही,जैसे हमारे खुशनुमा दिन बीत जाते है वैसे ही मुसीबत वाले दिन भी बीत जाएंगे,जो मुसीबत से घबरा जाए वो इंसान कैसा??

एक बिल्ली जब दूध पीती है तो वो अपनी आंखे बंद कर लेती है और ये सोचती है कि उसे कोई नही देख रहा,वैसे ही आत्महत्या करने वाला सोचता हैकि उसकी आंखे बंद होने के बाद सारी समस्या का हल खुद ब खुद हो जाएगा,ऐसा नही है,अपनी संयस्या से भागकर उसका हल नही हो सकता,

मुकेश एक युथ आइकॉन थे,उन्है पारिवारिक समस्या थी तो इसके और भी हल हो सकते थे,मगर उन्होंने अपनी आशा छोड़ दी,जो उनके जीवन के अंत का कारण बनी,आज कल के युवा हर परेशानी का हल अपने जीवन ख़त्म करना सोचते है,चाहे वो प्रेम संबधो में मिली नाकामी हो, पढ़ाई में मील असफलता हो,या कोई और बात,वो सोचते है समस्या का खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है जीवन को खत्म कर लेना, लेकिन हर काम एक बेहतर ढंग से किया जा सकता है और आपकी समस्या भी बेहतर तरीके से हल की जा सकती है,कोई भी समस्या आपके जीवन से बड़ी नही,हमेशा उसके हल होने की उम्मीद है,

एक उम्मीद का दिया ही है जिसके टिमटिमाती रोशनी के साये में बड़े से बडी अंधेरी रात गुजर जाती है,उसे कभी मत छोड़िये,ये निराशा इस लिए भी होती है क्योंकि हम ये सोच लेते है कि हमारी समस्या दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है जबकि सच ये है कि आज हम जिस परिस्थिति में जी रहे है और अपने आप को कोस रहे है वैसी जिंदगी जीने के लिए लाखों लोग भगवान से दिन रात प्रार्थना करते है,समस्याएं सबके साथ है,परेशान सब है,मुश्किल सबके साथ है,अगर आप के साथ कुछ गलत हो रहा है,कोई समस्या है तो उस समस्या को खत्म कीजिये,अपने आप को नही,

जब भी आपके मन मे आत्महत्या या ऐसा कोई गलत विचार आये एक बार अपने माँ बाप के बारे में जरूर सोचिये जिन्होंने आपको बड़ा और लायक बनाने के लिए क्या कुछ नही किया,एक बार अपने बच्चों के बारे में जरूर सोचिये की आपके बाद उनका क्या होगा,उन लोगो के बारे में सोचिये जो आप पर निर्भर है,आप का जीवन सिर्फ आपका नही आप के आस पास आपसे जुड़े  लोगो का भी उस पर अधिकार है, आपको कोई हक नही उनका ये अधिकार छीनने का,

एक गिलास पानी भरने के लिए टेंकर लाना कोई समझदारी नही,वैसे ही अपनी अस्थायी समस्याएं को हल करने के लिए आत्महत्या की सोचना भी मूर्खता है,अगर आप परेशान है तो परेशनी खत्म करे जीवन नही,कभी ऐसा विचार आये तो किशोर कुमार के गाने के ये बोल याद कीजिये

"सारे जहां की अमानत है ये ,ये जीवन तुम्हारा तुम्हारा नही,
जीवन मिटाना है दीवानगी,कोई प्यार जीवन से प्यार नही,
जीने के लाखों सहारे यहां,बस एक ही तो सहारा नही,
जीवन मिटाना है दीवानगी कोइ प्यार जीवन से प्यारा नही,

Saturday, 12 August 2017

लाइफ मंत्रा: कोई भी काम छोटा नही होता

लाइफ मंत्रा: कोई भी काम छोटा नही होता

अगर आप कभी काटाबांजी आये और किसी से इसकी स्पेशलिटी  के बारे में पूछे तो 95% लोग नगर की जो 5 स्पेशलिटी के बारे में बताएंगे उसमे आलीशान होटल,ओमकार मल भवन ,मुस्कान मॉल,के अलावा गोवेर्धन पान मंदिर की बात जरूर होगी,जहां आलीशान और ओमकरमल भवन,मुस्कान मॉल  करोडो की लागत से बने भव्य भवन है,वही एक 1000-2000 रुपये की लागत से शुरू हुई ये दुकान आज प्रसिद्धि में उनशे कम नही बैठती,नगर में ही नही आस पास लोगो के अंचल मे भी इसकी दीवानगी है, इसे लोग 5 स्टार पान दुकान भी कहते है,

इस पान दुकान का मालिक आनंद पंजवानी मेरा सहपाठी और मित्र है,मैं उसे तब से जानता हूं जब से वो एक छोटी सी दुकान में रोज मुश्किल से 100/- 200/- की बिक्री करता था,लेकिन उसे अपने काम पर भरोसा था, एक साधारण पान दुकान जिसे लोग बेहद कम इज्जत वाला व्यवसाय मानते है,और उस समय भी मानते थे,उस व्यवसाय को उसने कभी उसने छोटा नही समझा,उसे दिल से किया और उसका नतीजा आज सामने है,की आज वो आसे पास के लोगो के लिए एक आदर्श है,आज गोवेर्धन पान मंदिर एक ब्रांड है,एक ऐसा ब्रांड जहां लोगो को लगता है कि आज एक पान के 10 से लेकर 100 रुपये देने के बाद भी लोगो को लगता है कि वो अपने पैसे को जस्टिफाई कर रहे है,

ऐसा ही एक उदाहरण आपको देश के हर कोने में मिल जाएगा जहां कई लोगो ने छोटे छोटे काम करके बड़ा बड़ा नाम और पैसा कमाया है,चाहे वो दिल्ली में पराठे वाली गली का पराठे वाला,बर्गर बेचने वाली kfc हो, रायपुर में राठौर चौक में पोहा बेचने वाला,आज देश विदेश में अरबो का टर्नओवर करने वाली हल्दीराम कंपनी,

इन सभी मे खासियत ये थी कि एक छोटी सी सुरुवात कर आज अपने आप मे ये शिखर में है,कारण सिर्फ एक कि इन्होंने जो भी किया दिल से किया,अगर इनका धंधा समाजिक शाख में कुछ कम भी तो भी उसमे अपना इंटरेस्ट इन्होंने कम नही किया,इन्होंने बड़े नाम से अपने धंधे को बड़ा नही किया बल्कि अपने काम और अपने निरन्तरता से अपने छोटे से काम को एक ब्रांड बनाया,और नतीजा आज ये अपने कथित छोटे से काम से बड़े सफलता हासिल की है,

हम अपन मन मे हर काम के प्रति एक छवि बना के चलते है,की ये काम छोटा है ये काम बड़ा है,ये इज्जतदार काम है,इसे करने से इज्जत कम हो जाएगी,लेकिन ऐसा कुछ नही है,कोई भी काम छोटा नही होता अगर दिल से किया जाए तो,किसी भी काम को करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है "जॉब सैटिस्फैक्शन" अगर आपको आपका काम करने में मजा आता है,आप अपने काम को एन्जॉय करते है,आप ये सोचते है कि आप इस काम को बेहतर ढंग से कर सकते है,और इसकी बेहतरी के लिए हमेशा प्रयास करते है,तो आप को वही काम करते रहना चाहिये,उसी में आप को एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी,बस धैर्य रखने की आवश्यकता है,

किसी काम के सफल होने की संभावना 200% हो जाती है जब हम उस काम को दिल से करते है,क्योकी जो काम हम दिल से करते है उसमें समझौता करना छोड़ देते है,और इससे सफलता सुनिश्चित हो जाती है,आप चाहे एक छोटा सा व्यवसाय कर रहे हों,कोई सर्विस का काम कर रहे हो,या जॉब कर रहे हो अपना योगदान शत प्रतिशत देने की कोशिश करे,बस अपने काम को बोझ नही समझे उसका आनंद ले,और फिर आप देखेंगे की आप का छोटा सा काम भी आपका बड़ा सा नाम बना देगा,

आपकी असफलता को जस्टिफाई करने केलिए आपके पास लाखों बहाने हो सकते है,की आप के पास पैसा नही था,सप्पोर्ट नही था,संसाधन नही थे,भाग्य नही था,मगर सफलता बहानो की मोहताज नही,अपने इन सब बहानो से ऊपर उठिए,अपने आप को इन सब बहानो से छुटकारा दिलाइये,अपने आप से झूठ बोलना छोड़िये,कुछ भी कीजिये दिल से कीजिये,छोटा या बड़ा समझ कर नही,लोगो की परवाह मत कीजिये,दिल से काम कीजिये,

आपने काम को अपना 100% दीजिये देखिए ये 100% कैसे आपको करोड़पति बनाता है,अपने काम से प्यार कीजिये इसलिए नही कि वो आपका रोजगार का साधन है बल्कि इसलिए कि वो आपकी पहचान भी है,इस छोटी सोच से बाहर आइये की कोई काम छोटा होता है,

Wednesday, 9 August 2017

लाइफ मंत्रा : अपने शौक को मरने मत दीजिये

लाइफ मंत्रा: अपने शौक को मरने मत दीजिये,

आज एक शायरी पढ़ी,

बारिश में भीगने का शौक तो मुझे अब भी बेहद है लेकिन,
अक्सर घर से जिम्मेदारियों का रेनकोट पहन कर निकलता हूं

और ये बात हमारे जैसे 35 प्लस लोगो के लिए बहुत सच है,अक्सर हम अपने काम,अपनी जिम्मेदारियों अपने अपनो की खुशियों के लिए अपने कुछ शौक को मार देते है,शौक क्या होता है कभी सोचा है, शौक वो  काम है जो हम प्राथमिकता से करना चाहते है,वो काम जिसके लिए हम वक्त निकलना चाहते है,जिसको करते समय हमें अपने समय का ध्यान नही रहता,जिसको कर के हमे खुसी हासिल होती है,किसी को समाज सेवा,किसी को पेंटिंग,किसी को डांस,किसी को कुकिंग,किसी को  गाने का,किसी को आर्ट,का शौक  है,मगर बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ अक्सर ये शौक  जिम्मेदारियों के बोझ तले दब कर मर जाते है,हम अपनो की खुशियों के लिए,अपने भविष्य के लिए या अपने किसी मकसद के लिए इतना खो जाते है कि अपने शौक को भूल जाते है,

लेकिन अपने शौक को कभी मरने मत दीजिये,उन्हें थोड़ी जिंदगी दीजिये क्योकि यही शौक आपकी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए नई ऊर्जा देता है,जब आप अपने शौक को पूरा कर लेते है तो दिमागी रूप से काफी रिलेक्स होते है और रिलेक्स दिमाग से आपके सारे काम अच्छे से होते है,

मैंने कई लोगो से सुना है कि उनके पास अपने शौक पूरे करने के लिए वक्त नही,उनसे में सिर्फ एक ही बात कहना चाहूंगा कि अगर आप हमेशा व्यस्त रहते है तो आप व्यस्त नही अस्तव्यस्त है,हर किसी के लिए दिन 24 घण्टे का ही होता है,लेकिन अगर वो भी आपको पूरे नही पड़ते तो अपको अपनी लाइफ री-शेडूले करने की जरूरत है,जब आप अपने लिए एक बेहतर इंसान बन जाते है, तो लोगो के लिये और भी अच्छे इंसान बन जाते है,अपने आप को खुश कर सकते है तो औरो को भी खुश कर सकते है,

अपनी जिम्मेदारियों के चलते हमे अपना काफी समय कुछ ऐसे कामो को देना पड़ता है जो हमें पसंद नही होते हुए भी करने पड़ते है क्योंकि वो जरूरी है,जिससे हमारे दिमाग मे तनाव और अवसाद(डिप्रेसन) पैदा होता है,जो हमें चिड़चिड़ा बनाता है,हमारी कार्यक्षमता कम करता है, इसके बचने के लिए हमे कुछ समय ऐसे कार्यो को भी देंना चाहिये जो काम हमे दिल से पसंद है,ये हमारे तनाव एवं अवसाद के लिए एंटीडोट का काम करता है,इससे हम वापस रिफ्रेश होते है,

अपने शौक को अपने व्यस्तता के बहानो से मरने मत दीजिये,,उनके लिए वक्त निकालिये,आपकी एक पहचान आपका शौक भी है,अपनी पहचान बनाये रखने के लिए ही सही अपने शौक जिंदा रखिये,

हमेशा याद रखिये आप अपनी जिम्मेदारियों से नही अपनी प्राथमिकताओं  से व्यस्त है,बस कुछ समय के लिए अपने शौक को भी अपने प्राथमिकता बनाइये,
जिंदगी को सिर्फ गुजारिये नही,"जीये"

"लिखना" मेरा शौक है और मेने अपने आप से वादा किया है कि मैं अपनी लाख व्यस्तताओं के बाद भी अपने इस शौक को मरने नही दूंगा,आप अपने आप से ऐसा वादा कब कर रहे है ??
कही ऐसा न हो

"जिस्म ख्वाहिशो में ही अटका रहे
और जिंदगी हमे जी कर चली जाए"