Thursday, 17 August 2017

लाइफ मंत्रा: एक गंभीर बात भी आसान तरीके से समझाई जा सकती है

टॉयलेट एक प्रेम कथा ,आज ये फ़िल्म देखी,मै सिर्फ टाइम पास के हिसाब से ये फ़िल्म देखने गया था, मगर फ़िल्म देखने के बाद मेरा एक ही कहना है कि आप सभी ये फ़िल्म जरूर देखें,इसलिए नही ंकी ये एक कमर्शियल मजेदार फ़िल्म है, इसलिए क्योकि ये फ़िल्म नही अपने आप मे एक स्कूल है,जिससे आपको जिंदगी को आसान बनाने के कई पाठ सीखने को मिलेंगे,

इस फ़िल्म की खासियत या इसका मुख्य हीरो अक्षय कुमार या अनुपम खेर नही,इस कि ख़ासियत है इसकी पटकथा,कहानी,कांसेप्ट,इस फ़िल्म में इतने गंभीर विषय को जिस आसानी और सहजता से पेश किया गया है वो अपने आप मे काबिले तारीफ है,ये फ़िल्म हमे सिखाती हैं कि समस्या कितनी भीं गंभीर हो उसे आसान भाषा मे भी लोगो को समझाया जा सकता है और उसके  समाधान के लिए प्रेरित किया जा सकता है फ़िल्म में नायिका की तकलीफ आपको महसूस होती है,ये खास बात है,फ़िल्म आपको आपके साथ जोड़ती है, भले ही मल्टीप्लेक्स में बैठी पब्लिक जो शुरू से टॉयलेट उपयोग करती है उनको ये कहानी काल्पनिक या सिर्फ मजकिया लगे मगर ये फ़िल्म भारत के गावो की रूढ़िवादी सोच को उजागर करतो है, 

ये बात हमेशा बहुत मायने रखती है कि आप जो कह रहे है या कहना चाहते है वो लोगो तक उसी रूप में पहुचता है जिस रूप में  कहना चाहते है, फिल्मकार अपनी बात पूरी तरह से लोगो तक बहुत ही सहज तरीके से पहचाने में शत प्रतिशत सफल रहे है,उनको शत शत बधाई,

मुझे पता है ये फ़िल्म अच्छी  कमाई भी  करेगी,मगर कमर्शियल हिट के मामले में कोई बहुत बड़ा कीर्तिमान नही बनायेगी,लेकिन एक गंभीर समस्या को एक सरल रूप से लोगो के सामने पेश करने को लेकर ये फ़िल्म हमेशा याद रखी जायेगी,देश के प्रधानमंत्री जब स्वच्छ भारत की बात करते है तब तक ये स्वछता या शौचालय इतनी बड़ी समस्या नही लगती थी मगर इस फ़िल्म में जिस बारीकी से इस समस्या की गंभीरता को समझता और दिखाया गया है उससे एक आदमी भी इस समस्या को महसूस करता है,जब हम किसी समस्या को अपनी समस्या महसूस करते है तोउसके समाधन के बारे भी गंभीरता सें सोचते है और जब बात दिल को छूती है आदमी उसके बारे में सोचता है,काम करता है, सुधरता है,

फ़िल्म के कुछ संवाद दिल को छूते है,एक संवाद की औरत ही औरत को आगे बढ़ने नही देती,अपने आप मे काफी गूढ़ अर्थ लिए हुए है,चाहे वो,भ्रूण हत्या हो, रेप हो,दहेज प्रतारणा हो या आनर किलिंग या औरतो से जुड़ी हर समाजिक समस्या में कंही न कंही औरत का दखल  बहुत ज्यादा है,

फ़िल्म ये भी सिखाती है कि सहन करना या अडजस्ट करना बहुत अच्छी बात है मगर जो गलत लगे उसका विरोध जरूरी है,फ़िल्म सिखाती है कि"जिद करो दुनिया बदलो" ,जब आप किसी अच्छे काम के लिए निकलते है तो आपकी राहो में बहुत मुश्किले आती है मगर उनसे घबराना नही उनका सामना करना हल है,

फ़िल्म में एक गभीर विषय को हल्के फुल्के,ढंग से कई मजाकिया सीन के साथ पेश किया गया है,इससे ये सीखा जा सकता है कि आपकी समस्या को बोझ बनाकर नही मनोरंजक बनाकर पेश कीजिये उसे बहुत तवज्जो मिलेगी,आपके कहने का ढंग आपकी समस्या की गंभीरता का पैमाना है,

कुल मिला कर एक सुखद अनुभव ,मेरी व्यक्तिगत राय की इस फ़िल्म को भारत के प्रत्येक गांव में निशुल्क प्रदर्शन किया जाए इससे स्वच्छ भारत अभियान को बल मिलेगा,भारत मे शौच संबधी समस्याओं के लिये शौच व्यवस्था नही लोगो की सोचने की व्यवस्ता में परिवर्तन ज्यादा जरूरी है,इस। फ़िल्म को देखने के बाद एक  बधाई में भारत सरकार के उस अधिकारी को भी देना चाहूंगा जिसने शौचालय कार्यक्रम के लिए ये टैगलाइन बांयी कि "जहा सौच वहां शौचालय".ये फ़िल्म इस टैगलाइन को पूरा सार्थक करती है, भारत मे ऐसी और फिल्मों की जरूरत है, क्योकि भारत के एक बडे हिस्से  की आम जान जीवन शैली बड़े पर्दे से प्रेरित है,

Monday, 14 August 2017

लाइफ मंत्रा: अपनी जिंदगी नही समस्या खत्म कीजिये

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में बिहार के बक्सर के डीएम मुकेश पांडेय की आत्महत्या का मामला सुर्खियों में है,उन्होंने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बना कर इसके बताया कि अपनी पत्नी और माता पिता के बीच निरंतर हो रही पारिवारिक कलह से परेशान होकर उन्होने आत्महत्या ट्रेन के आगे कूदकर आत्महयता कर ली,2012 बैच के आई ए एस मुकेश ने न जाने कितनी मिश्किलो से लड़कर प्रतिष्ठित परीक्षा पास की मगर अपना अपने आप से हार गए,आत्महत्या से पहले मुकेश ने एक वीडियो बनाया और उस आत्महत्या का कारण अपनी पत्नी और मातापिता के निरंतर कलह को बताया,और इस निरंतर कलह के चलते उनका पारिवारिक जीवन  नरक बन गया था,और इस कारण वो भारी चिंता के कारण अवसाद में थे,और ये अवसाद को खत्म करने का सबसेेआसान तरीका उन्हें आत्महत्या लगा और उन्होंने अपना जीवन खत्म कर लिया,जब 2012 में मुकेश आईए एस बने होंगे तो वो भारत के युवाओ के लिए प्रेरणा के स्रोत बने होंगे,उनका आत्मविश्वास जगा होगा मगर उनकी आत्महत्या ने करोडों लोगो के लिए एक गलत उदाहरण का मार्ग प्रसस्त किया कि आत्महत्या सभी समस्याओं का अंत है,

इस बात ने मुझे बहुत दुखी किया कि आम इंसान ही नही बल्कि अपने आप को सफल साबित कर चुके इंसान भी इस तरह का कदम उठाते है,ये बात शास्वत सत्य है कि हर व्यक्ति के मन मे कभी न कभी एक बार ये खयाल या ऐसा समय अवश्य आता है जब उसे लगता है कि उसके साथ जो मुश्किल है उससे उसकी जिंदगी खराब हो गयी है,वो अपनी मुश्किलो से बाहर नही निकल सकता और इस लिए वो मुश्किलो को खत्म करने का एक आसान रास्ता सोचता है और वो सोचता है कि खुद को खत्म कर के समस्या को खत्म कर लिया जाए,

कितनी गलत सोच है ये, सच ये है कि हम जिंदगी से नही अपनी संमस्याओ से परेशान है,तो इसलिए हमें अपनी जिंदगी नही समस्याएं खत्म करनी चहिये,"आत्महत्या एक क्षणिक समस्या का स्थायी हल है" ये बात हमेशा याद रखने की जरूररत है कि जिंदगी में कभी भी कुछ स्थायी नही,जैसे सुख स्थायी नही वैसे दुख भी नही,जैसे हमारे खुशनुमा दिन बीत जाते है वैसे ही मुसीबत वाले दिन भी बीत जाएंगे,जो मुसीबत से घबरा जाए वो इंसान कैसा??

एक बिल्ली जब दूध पीती है तो वो अपनी आंखे बंद कर लेती है और ये सोचती है कि उसे कोई नही देख रहा,वैसे ही आत्महत्या करने वाला सोचता हैकि उसकी आंखे बंद होने के बाद सारी समस्या का हल खुद ब खुद हो जाएगा,ऐसा नही है,अपनी संयस्या से भागकर उसका हल नही हो सकता,

मुकेश एक युथ आइकॉन थे,उन्है पारिवारिक समस्या थी तो इसके और भी हल हो सकते थे,मगर उन्होंने अपनी आशा छोड़ दी,जो उनके जीवन के अंत का कारण बनी,आज कल के युवा हर परेशानी का हल अपने जीवन ख़त्म करना सोचते है,चाहे वो प्रेम संबधो में मिली नाकामी हो, पढ़ाई में मील असफलता हो,या कोई और बात,वो सोचते है समस्या का खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है जीवन को खत्म कर लेना, लेकिन हर काम एक बेहतर ढंग से किया जा सकता है और आपकी समस्या भी बेहतर तरीके से हल की जा सकती है,कोई भी समस्या आपके जीवन से बड़ी नही,हमेशा उसके हल होने की उम्मीद है,

एक उम्मीद का दिया ही है जिसके टिमटिमाती रोशनी के साये में बड़े से बडी अंधेरी रात गुजर जाती है,उसे कभी मत छोड़िये,ये निराशा इस लिए भी होती है क्योंकि हम ये सोच लेते है कि हमारी समस्या दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है जबकि सच ये है कि आज हम जिस परिस्थिति में जी रहे है और अपने आप को कोस रहे है वैसी जिंदगी जीने के लिए लाखों लोग भगवान से दिन रात प्रार्थना करते है,समस्याएं सबके साथ है,परेशान सब है,मुश्किल सबके साथ है,अगर आप के साथ कुछ गलत हो रहा है,कोई समस्या है तो उस समस्या को खत्म कीजिये,अपने आप को नही,

जब भी आपके मन मे आत्महत्या या ऐसा कोई गलत विचार आये एक बार अपने माँ बाप के बारे में जरूर सोचिये जिन्होंने आपको बड़ा और लायक बनाने के लिए क्या कुछ नही किया,एक बार अपने बच्चों के बारे में जरूर सोचिये की आपके बाद उनका क्या होगा,उन लोगो के बारे में सोचिये जो आप पर निर्भर है,आप का जीवन सिर्फ आपका नही आप के आस पास आपसे जुड़े  लोगो का भी उस पर अधिकार है, आपको कोई हक नही उनका ये अधिकार छीनने का,

एक गिलास पानी भरने के लिए टेंकर लाना कोई समझदारी नही,वैसे ही अपनी अस्थायी समस्याएं को हल करने के लिए आत्महत्या की सोचना भी मूर्खता है,अगर आप परेशान है तो परेशनी खत्म करे जीवन नही,कभी ऐसा विचार आये तो किशोर कुमार के गाने के ये बोल याद कीजिये

"सारे जहां की अमानत है ये ,ये जीवन तुम्हारा तुम्हारा नही,
जीवन मिटाना है दीवानगी,कोई प्यार जीवन से प्यार नही,
जीने के लाखों सहारे यहां,बस एक ही तो सहारा नही,
जीवन मिटाना है दीवानगी कोइ प्यार जीवन से प्यारा नही,

Saturday, 12 August 2017

लाइफ मंत्रा: कोई भी काम छोटा नही होता

लाइफ मंत्रा: कोई भी काम छोटा नही होता

अगर आप कभी काटाबांजी आये और किसी से इसकी स्पेशलिटी  के बारे में पूछे तो 95% लोग नगर की जो 5 स्पेशलिटी के बारे में बताएंगे उसमे आलीशान होटल,ओमकार मल भवन ,मुस्कान मॉल,के अलावा गोवेर्धन पान मंदिर की बात जरूर होगी,जहां आलीशान और ओमकरमल भवन,मुस्कान मॉल  करोडो की लागत से बने भव्य भवन है,वही एक 1000-2000 रुपये की लागत से शुरू हुई ये दुकान आज प्रसिद्धि में उनशे कम नही बैठती,नगर में ही नही आस पास लोगो के अंचल मे भी इसकी दीवानगी है, इसे लोग 5 स्टार पान दुकान भी कहते है,

इस पान दुकान का मालिक आनंद पंजवानी मेरा सहपाठी और मित्र है,मैं उसे तब से जानता हूं जब से वो एक छोटी सी दुकान में रोज मुश्किल से 100/- 200/- की बिक्री करता था,लेकिन उसे अपने काम पर भरोसा था, एक साधारण पान दुकान जिसे लोग बेहद कम इज्जत वाला व्यवसाय मानते है,और उस समय भी मानते थे,उस व्यवसाय को उसने कभी उसने छोटा नही समझा,उसे दिल से किया और उसका नतीजा आज सामने है,की आज वो आसे पास के लोगो के लिए एक आदर्श है,आज गोवेर्धन पान मंदिर एक ब्रांड है,एक ऐसा ब्रांड जहां लोगो को लगता है कि आज एक पान के 10 से लेकर 100 रुपये देने के बाद भी लोगो को लगता है कि वो अपने पैसे को जस्टिफाई कर रहे है,

ऐसा ही एक उदाहरण आपको देश के हर कोने में मिल जाएगा जहां कई लोगो ने छोटे छोटे काम करके बड़ा बड़ा नाम और पैसा कमाया है,चाहे वो दिल्ली में पराठे वाली गली का पराठे वाला,बर्गर बेचने वाली kfc हो, रायपुर में राठौर चौक में पोहा बेचने वाला,आज देश विदेश में अरबो का टर्नओवर करने वाली हल्दीराम कंपनी,

इन सभी मे खासियत ये थी कि एक छोटी सी सुरुवात कर आज अपने आप मे ये शिखर में है,कारण सिर्फ एक कि इन्होंने जो भी किया दिल से किया,अगर इनका धंधा समाजिक शाख में कुछ कम भी तो भी उसमे अपना इंटरेस्ट इन्होंने कम नही किया,इन्होंने बड़े नाम से अपने धंधे को बड़ा नही किया बल्कि अपने काम और अपने निरन्तरता से अपने छोटे से काम को एक ब्रांड बनाया,और नतीजा आज ये अपने कथित छोटे से काम से बड़े सफलता हासिल की है,

हम अपन मन मे हर काम के प्रति एक छवि बना के चलते है,की ये काम छोटा है ये काम बड़ा है,ये इज्जतदार काम है,इसे करने से इज्जत कम हो जाएगी,लेकिन ऐसा कुछ नही है,कोई भी काम छोटा नही होता अगर दिल से किया जाए तो,किसी भी काम को करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है "जॉब सैटिस्फैक्शन" अगर आपको आपका काम करने में मजा आता है,आप अपने काम को एन्जॉय करते है,आप ये सोचते है कि आप इस काम को बेहतर ढंग से कर सकते है,और इसकी बेहतरी के लिए हमेशा प्रयास करते है,तो आप को वही काम करते रहना चाहिये,उसी में आप को एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी,बस धैर्य रखने की आवश्यकता है,

किसी काम के सफल होने की संभावना 200% हो जाती है जब हम उस काम को दिल से करते है,क्योकी जो काम हम दिल से करते है उसमें समझौता करना छोड़ देते है,और इससे सफलता सुनिश्चित हो जाती है,आप चाहे एक छोटा सा व्यवसाय कर रहे हों,कोई सर्विस का काम कर रहे हो,या जॉब कर रहे हो अपना योगदान शत प्रतिशत देने की कोशिश करे,बस अपने काम को बोझ नही समझे उसका आनंद ले,और फिर आप देखेंगे की आप का छोटा सा काम भी आपका बड़ा सा नाम बना देगा,

आपकी असफलता को जस्टिफाई करने केलिए आपके पास लाखों बहाने हो सकते है,की आप के पास पैसा नही था,सप्पोर्ट नही था,संसाधन नही थे,भाग्य नही था,मगर सफलता बहानो की मोहताज नही,अपने इन सब बहानो से ऊपर उठिए,अपने आप को इन सब बहानो से छुटकारा दिलाइये,अपने आप से झूठ बोलना छोड़िये,कुछ भी कीजिये दिल से कीजिये,छोटा या बड़ा समझ कर नही,लोगो की परवाह मत कीजिये,दिल से काम कीजिये,

आपने काम को अपना 100% दीजिये देखिए ये 100% कैसे आपको करोड़पति बनाता है,अपने काम से प्यार कीजिये इसलिए नही कि वो आपका रोजगार का साधन है बल्कि इसलिए कि वो आपकी पहचान भी है,इस छोटी सोच से बाहर आइये की कोई काम छोटा होता है,

Wednesday, 9 August 2017

लाइफ मंत्रा : अपने शौक को मरने मत दीजिये

लाइफ मंत्रा: अपने शौक को मरने मत दीजिये,

आज एक शायरी पढ़ी,

बारिश में भीगने का शौक तो मुझे अब भी बेहद है लेकिन,
अक्सर घर से जिम्मेदारियों का रेनकोट पहन कर निकलता हूं

और ये बात हमारे जैसे 35 प्लस लोगो के लिए बहुत सच है,अक्सर हम अपने काम,अपनी जिम्मेदारियों अपने अपनो की खुशियों के लिए अपने कुछ शौक को मार देते है,शौक क्या होता है कभी सोचा है, शौक वो  काम है जो हम प्राथमिकता से करना चाहते है,वो काम जिसके लिए हम वक्त निकलना चाहते है,जिसको करते समय हमें अपने समय का ध्यान नही रहता,जिसको कर के हमे खुसी हासिल होती है,किसी को समाज सेवा,किसी को पेंटिंग,किसी को डांस,किसी को कुकिंग,किसी को  गाने का,किसी को आर्ट,का शौक  है,मगर बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ अक्सर ये शौक  जिम्मेदारियों के बोझ तले दब कर मर जाते है,हम अपनो की खुशियों के लिए,अपने भविष्य के लिए या अपने किसी मकसद के लिए इतना खो जाते है कि अपने शौक को भूल जाते है,

लेकिन अपने शौक को कभी मरने मत दीजिये,उन्हें थोड़ी जिंदगी दीजिये क्योकि यही शौक आपकी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए नई ऊर्जा देता है,जब आप अपने शौक को पूरा कर लेते है तो दिमागी रूप से काफी रिलेक्स होते है और रिलेक्स दिमाग से आपके सारे काम अच्छे से होते है,

मैंने कई लोगो से सुना है कि उनके पास अपने शौक पूरे करने के लिए वक्त नही,उनसे में सिर्फ एक ही बात कहना चाहूंगा कि अगर आप हमेशा व्यस्त रहते है तो आप व्यस्त नही अस्तव्यस्त है,हर किसी के लिए दिन 24 घण्टे का ही होता है,लेकिन अगर वो भी आपको पूरे नही पड़ते तो अपको अपनी लाइफ री-शेडूले करने की जरूरत है,जब आप अपने लिए एक बेहतर इंसान बन जाते है, तो लोगो के लिये और भी अच्छे इंसान बन जाते है,अपने आप को खुश कर सकते है तो औरो को भी खुश कर सकते है,

अपनी जिम्मेदारियों के चलते हमे अपना काफी समय कुछ ऐसे कामो को देना पड़ता है जो हमें पसंद नही होते हुए भी करने पड़ते है क्योंकि वो जरूरी है,जिससे हमारे दिमाग मे तनाव और अवसाद(डिप्रेसन) पैदा होता है,जो हमें चिड़चिड़ा बनाता है,हमारी कार्यक्षमता कम करता है, इसके बचने के लिए हमे कुछ समय ऐसे कार्यो को भी देंना चाहिये जो काम हमे दिल से पसंद है,ये हमारे तनाव एवं अवसाद के लिए एंटीडोट का काम करता है,इससे हम वापस रिफ्रेश होते है,

अपने शौक को अपने व्यस्तता के बहानो से मरने मत दीजिये,,उनके लिए वक्त निकालिये,आपकी एक पहचान आपका शौक भी है,अपनी पहचान बनाये रखने के लिए ही सही अपने शौक जिंदा रखिये,

हमेशा याद रखिये आप अपनी जिम्मेदारियों से नही अपनी प्राथमिकताओं  से व्यस्त है,बस कुछ समय के लिए अपने शौक को भी अपने प्राथमिकता बनाइये,
जिंदगी को सिर्फ गुजारिये नही,"जीये"

"लिखना" मेरा शौक है और मेने अपने आप से वादा किया है कि मैं अपनी लाख व्यस्तताओं के बाद भी अपने इस शौक को मरने नही दूंगा,आप अपने आप से ऐसा वादा कब कर रहे है ??
कही ऐसा न हो

"जिस्म ख्वाहिशो में ही अटका रहे
और जिंदगी हमे जी कर चली जाए"

Saturday, 22 July 2017

जिंदगी ब्रांडेड ब्रांडेड हो गयी है

आज के भागती दौड़ाती जिंदगी का एक सच लिखने की कोशिश की है,

"जिंदगी ब्रांडेड-ब्रांडेड हो गई है"

सारी खुशियां कुछ नामो के पीछे खो गई है,
जिंदगी आजकल *ब्रांडेड ब्रांडेड* हो गई है,

टूथपेस्ट *कोलगेट* न हो तो दांत साफ नही होते,
शेम्पू *लोरियल* न हो तो बालो में झाग नही होते,

बिना *जिलेट* ब्लेड के दाढ़ी नही बन पाती,
बिना *hindware*कमोड के हमको पोट्टी नही आती,

लक्स तो कॉमन हो गया है,अब *dove* चाहिए
आज कल बाथरूम में शॉवर भी *जेकुआर*चाहिए,

चड्डी बनियान भी आजकल हमको *जॉकी* का ही चाहिए,
परफ्यूम तो बस *fogg*चल रहा है वही लगाइये,

*Spiky* की शर्ट और *किलर* की जीन्स ही पसंद आती है,
पैरो में भी चप्पल सिर्फ *एडिडास/नाईक* की सुहाती है,

टीवी नही *सोनी* का होम थियेटर चाहिए,
बाइक नही हमे *एक्टिवा* स्कूटर चाहिए,

मोबाइल नही हमको *आई फ़ोन* चाहिए,
कार नही *इनोवा* और *ऑडी* चाहिए,

अब उसके घर ने जाना भला किसका होता है,
जिसके घर मे आजकल *गोदरेज* का ऐसी नही होता है

कैसी ये अंधी दौड़ है जो बदस्तूर जारी है,
आपसी संबंधों पर महंगे ब्रांड भारी है,

खुद को ब्रांडेड जंजीरो से जकड़ लिया है
सीधी सादी जिंदगी को कितना क्रिटिकल कर लिया है,

जिंदगी में खुशियां ब्रांडेड चीजो से नही आती,
जब तक खुद न मुस्कुराओ जिंदगी नही मुस्कुराती,

कभी अपने बच्चों के साथ खेलिए,पत्नी के साथ कभी गुनगुनाइए,
आपकी सस्ती सी घड़ी भी *"राडो*की लगेगी,कभी अपनो के साथ समय बिताइए

जरूरी नही की *नेरोलेक पेंट्स* की दिवारी ही घर को सजा देगी,
साथ अपनो का हो तो चुने वाली दिवारे भी मजा देगी

क्यो आपको अपनी हैसियत पे इतना घमंड है,
आपकी सादगी ही आपका सबसे बड़ा ब्रेंड है,

संभल जाओ,इस भागमभाग का कभी कोई एन्ड नही होगा,
*मेरे दोस्त!! चिता की लकड़ी का कोई ब्रांड नही होगा,*

*मेरे दोस्त!! चिता की लकड़ी का कोई ब्रांड नही होगा,*

Monday, 15 May 2017

लाइफ मंत्रा: असलियत का होना दिखावे से ज्यादा जरूरी है,

एक गाँव में एक अर्थविद रहता था, उसकी ख्याति दूर दूर तक फैली थी। एक बार वहाँ के राजा ने उसे चर्चा पर बुलाया। काफी देर चर्चा के बाद उसने कहा "महाशय, आप बहुत बडे अर्थ ज्ञानी है, पर आपका लडका इतना मूर्ख क्यों है? उसे भी कुछ सिखायें। उसे तो सोने चांदी में मूल्यवान क्या है यह भी नही पता॥"
यह कहकर वह जोर से हंस पडा।

अर्थविद को बुरा लगा, वह घर गया व लडके से पूछा "सोना व चांदी में अधिक मूल्यवान क्या है?""सोना", बिना एकपल भी गंवाए उसके लडके ने कहा।"तुम्हारा उत्तर तो ठीक है, फिर राजा ने ऐसा क्यूं  कहा? सभी के बीच मेरी खिल्ली भी उठाई।"

लडके समझ मे आ गया, वह बोला "राजा गाँव के पास एक खुला दरबार लगाते हैं, जिसमें सभी प्रतिष्ठित व्यक्ति भी शामिल होते हैं। यह दरबार मेरे स्कूल जाने के मार्ग मे हि पडता है।  मुझे देखते हि बुलवा लेते हैं, अपने एक हाथ मे सोने का व दूसरे मे चांदी का सिक्का रखकर, जो अधिक मूल्यवान है वह ले लेने को कहते हैं ऒर मैं चांदी का सिक्का ले लेता हूं।सभी ठहाका लगाकर हंसते हैं व मजा लेते हैं।ऐसा तकरीबन हर दूसरे दिन होता है।"

"फिर तुम सोने का सिक्का क्यों नही उठाते, चार लोगों के बीच अपनी फजिहत कराते हो व साथ मे मेरी भी।"लडका हंसा व हाथ पकडकर अर्थविद को अंदर ले गया ऒर कपाट से एक पेटी निकालकर दिखाई जो चांदी के सिक्कों से भरी हुई थी।

यह देख अर्थविद हतप्रभ रह गया।
लडका बोला "जिस दिन मैंने सोने का सिक्का उठा लिया उस दिन से यह खेल बंद हो जाएगा। वो मुझे मूर्ख समझकर मजा लेते हैं तो लेने दें, यदि मैं बुद्धिमानी दिखाउंगा तो कुछ नही मिलेगा।"

मोरल- मूर्ख होना अलग बात है व समझा जाना अलग। स्वर्णिम मॊके का फायदा उठाने से बेहतर है हर मॊके को स्वर्ण मे तब्दील करना। लोगो का आकलन करने से पहले उनके बारे में जान ले, सिर्फ किताब का कवर देखकर उसके बारे में अंदाजा न लगाएं,जैसे समुद्र सबके लिए समान होता है, कुछ लोग पानी के अंदर टहलकर आ जाते हैं, कुछ मछलियाँ ढूंढ पकड लाते हैं व कुछ मोती चुन कर आते हैं।हर परिस्थिति में होशियारी आअपके लिए लाभदायक नही होती,कभी कभी लोगो के नजर में मूर्ख बनकर भी आप फायदा उठा सकते है,होशियार दिखना नही होशियार होना ज्यादा जरूरी है,असलियत का होना दिखावे से ज्यादा जरूरी है,

Thursday, 11 May 2017

लाइफ मंत्रा: कंप्लीट योर थॉट्स,लेकिन सकारात्मक तरीको से

लाइफ मंत्रा: कंप्लीट योर थॉट्स,भगर सकारात्मक तरीको से,

तुम बिन फ़िल्म का एक संवाद है "ये इमोशन भी कितने स्टुपिड होते है न,कोई लॉजिक ही नही समझते, और ये सच भी है, लेकिन यही स्टुपिड सी चीज हमे आदमी से इंसान बनाती है, दुनिया मे हम खुश रहने के लिए चाहे दुनिया की सारी चीजें मिल जाये मगर जब तक एक छोटी सी  इच्छा या चाहत बाकी रह जाती है आप खुश नही रहते, ये हमारी भावनाये है, चाहे किसी से प्यार हो या गुस्सा, घृणा हो, ईर्ष्या हो, आकर्षण हो ,लगाव हो, सहानभूति हो, चिंता हो, तनाव हो,कुछ भी ये सब हमारी भावनाएं है जिनकी इच्छा पूर्ति के लिए हम काम करते है और जब उसकी इच्छा पूर्ति के लिए काम करते है और वो पूरी हो जाती है तो उस समय जितनी खुशी मिलती है वो खुसी किसी भौतिक सुख में नही है,

जब आप किसी का साथ चाहते है और वो मिल जाता है, आप अपने बच्चे से एक किस चाहते है और वो दे देता है,आप अपनी पत्नी को गले लगाना चाहते है और वो गले लगाती है, आप अपने दोस्त से अपनी प्रसंसा चाहते है और वो आपकी तारीफ करता है,आप किसी से गुस्सा होते है और उसे डांट देते है, आप किसी से झगड़ा चाहते है और उसे पीट देते है तो जो खुशी या शांति आपको मिकलती है उसका कोई जवाब नही है तब आप अपने आप को रिलैक्स महसुस करते है, कहने का मतलब यही है कि हम अपनी भावनाओं को जब पूरा कर लेते है  तो हम रिलेक्स हो जाते है,

लेकिन हर समय हम अपनी इच्छाये पूरी नही कर
सकते,हम को जब अच्छा लगता है तो हम अपने बच्चे को प्यार तो कर सकते है लेकिन जब गुस्सा आये उसे पिट नही सकते क्योकी उसे पीटने के बाद हमे खुद को खराब लेगेगा,वंही बच्चा भी आप से दूर होगा, आप को आफिस में तनाव है आपके बॉस से आप परेशान है मन मे रोज ऐसे खयाल आता है कि उसके कान के नीचे 2 लगाये मगर ऐसा करते है तो आपकी नौकरी को खतरा है, आप पत्नी की चिड़चिड़ा से परेशान है ऐसा लगता है उसकी बातों के बदले  उसको दुगुना जलीकटी सुना दे मगर ये करते है तो आपके वैवाहिक जीवन मे रोज तकरार बढ़ जाएगी ,तो रोज के ऐसी छोटी बड़ी भावनाएं जो पूरी नही हो पाती वो हमे परेशान करती है और लगातार ये पूरी न होने वाली भावनाएं हमे तनाव और डिप्रेसन कि और ले जाती है,और ये सच है कि लगातार तनाव और दबाव में हमारी कार्यक्षमता कम्  होने लगती है,जब तक हम अपना एमोसन पूरा न कर ले तब  तक हमें चैन नही आता,

अब इसका क्या इलाज है, की हम अपनी नेगेटिव भावना पूरी करना चाहता है मगर कर नही सकते, नही करते है तो ये खत्म नही होती ,बढ़ती जाती है, करते है तो रिश्तों के खोने का डर है, नुकसान की आशंका है,तो इसका भी इलाज है,की आप अपनी नकारात्मक भावनाएं निर्जीव चीजो के साथ पूरी कीजिये, और यकीन मानिए आप को बहुत रिलेक्स लेगेगा,जब किसी को गाली देने का मन करे तो दीजिये मगर अकेले में दीवारों को, जब गुस्से में किसी को पीटने का मन करे तो तकिए और गद्दे् को जी भर के मारिये,उसको याद करके जिसको आप पीटना चाहते है,जब अपने बॉस से या किसी कम्पिटिटेर से परेशान हो तो उसकी चेहरे को याद करके अपना गुस्सा उसकी तस्वीर को पिट कर निकालिए, इसके अलावा आज कल के इंटरनेट गेम है जिनमे आप वर्चुअल तोड़फोड़ करके अपना गुस्सा निकाल सकते है, अकसर गुस्से में हम को ऐसा लगता है कि गुस्से में आस पास की  चीजे तोड़ फोड़ दे, और कुछ ऐसा करने के बहुत रिलेक्स भी लगता है,क्योकि गुस्सा वो चीज है जबतक वो आपके भीतर रंहे आपको परेशान करता है, उझसे छुटकारा पाने का तरीका है की उसको पूरा किया जाए,टब जा कर हम अपना ध्यान पूरी तरह दूसरी और लगा सकते है,
ऐसा ही एक कांसेप्ट आप फेसबुक में देखा कि इंदौर में एक कैफे में ये कोन्सेप्ट आया है कि जहा आप तोड़ फोड़ कर सकते है,

कहने का मतलब ये है कि अपनी भावनाओं को पूरा कीजिये, आपको कोई बात परेशान करती है उसे आप किसी से शेयर नही कर सकते तो उसे लिखिए भले ही बाद में वो कागज फाड़ दीजिये,देखिये कितना रिलेक्स लगता है,किसी भी नेगेटिव बात को खत्म करने का तरीका यही है कि उसे पूरा किया जाए,और जहा नकरात्मकरा खत्म होती है वंही सकारात्मकता सुरु होती है,बस मन में जो भी भावना है पूरी कीजिये, सकारात्मक भावनाएं पूरी होने पर खुशी देती है, नकारात्मक भावनाएं पूरी होने पर सुकून देते है, बस अपनी स्मार्ट तरीके से पूरी कीजिये,

इंदौर के कैफे की वीडियो भी शेयर किया है,साथ में,