Sunday, 25 September 2022

ऑफलाइन जिंदगी

लाइफ मंत्रा: ऑफलाइन जिंदगी,

विकाश खेमका
काँटाबाजी (ओडिशा)

टेक्नोलॉजी की पहुच से दूर एक अपना ठिकाना था,
अपनो के पास रहते थे  वो भी क्या जमाना था,

मोबाइल के अलार्म नही मां की दुलार से उठता था,
इन भर का मोटिवेसन पिताजी की एक डांट से मिलता था,

ऑनलाइन क्लास नही सरकारी स्कूल हुआ करते थे
दोस्तो के साथ कितने कितनी मस्ती किया करते थे,

वेदर फोररकास्ट नही था बारिश में भीगने का मजा था,
बिना व्हाट्सअप के भी दोस्तो का दरबार सजा था,

न आज तक,न जी न्यूज , न कोई समाचार था,
अपना फेवोराइट कार्यक्रम  तो चित्रहार था,

न पुब्जी,न प्रीफ़ायर,ना कैंडी क्रश, न यू ट्यूब था
अपना लिए मजा तो गिल्ली डंडा और खेल खुद था,

कुछ भी बोल देना मुश्किलों का घर नही था,
कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीन शॉट का डर नही था,

घर मे फ्रिज नही था,कूलर नही था, टी वी नही थी
इमेज बहुत बढ़िया थी अपनी भले ही सेल्फी नाही थी,

सुविधा कम थी साधन काम थे लेकिन सुकून था,
अपने लिए तो सुप्रीम कोर्ट पिताजी का हुकम था,

आपसी चुगली-चट्ठा था, ताका झांकी थी,
अपने लिए गूगल पड़ोस की काकी थी,

बेशक मैगी,पिज़्ज़ा,बर्गर का स्वाद नही था
मगर मां में हाथ के खाने का कोई जवाब नही था

न फेसबुक,न ट्विटर न इंस्टाग्राम न जी मेल था,
मगर फिर भी बहुत पक्का आपसी मेलजोल था,

संबंध मजबूरी से नही मजबूती से निभाये जाते थे
शादीयो तंक में टेंट भी खुद ही लगाए जाते थे,

त्योहारो में हर्ष था,आंनद था ,उमंगे थी उल्लास था,
आज त्यौहार भी फिके है पहले हर दिन खास था,

पहले खुशियां थी आज कल सिर्फ खुशियों का वहम है,
पहले जिंदगी में खुशियों के पल थे अब हरपल में जिंदगी कम है,

सहज थी, सीधी थी, सरल थी,सच्ची थी,
जिंदगी जब *ऑफलाइन* थी, काफी अच्छी थी,

Wednesday, 29 June 2022

लाइफ मंत्रा: जिंदगी भाग्य(chance) से ज्यादा चुनाव(choice) है

लाइफ मंत्रा: जिंदगी भाग्य(chance) से ज्यादा चुनाव(choice) है

विकाश खेमका
कांटाबांजी(ओडिशा)

जीवन मे सफलता के ताले को खोलने के लिए कर्म और भाग्य की दो चाबियां लगतीहै, इसमें से एक चाबी हमारे पास रहती है,एक ईश्वर के पास,ईश्वर अपनी चाबी कभी न कभी अवश्य लगता है,और शायद वो समय हम अपनी चाबी को खोजने में लगा देते है,हमारी जिंदगी कैसी होगी ये अक्सर भाग्य नही हमारी चॉइस निर्धारित करती है,

हम रोज ये तय करते है कि आज का दिन कैसा होगा,हमारा भविष्य कैसा होगा,ये बात सही है कि जिंदगी अनिश्चित है,कभी भी कुछ भी हो सकता है,लेकिन हम उन अनिश्चितताओं की तैयारी तो कर ही सकते है,सिर्फ बारिश के पानी के भरोसे खेती करना,और आवश्यकता के समय पानी न मिलने के कारण फसल का सही न होना,इसे सिर्फ भाग्य का दोष तो नही कहा जा सकता,अगर हम समय पर उस पानी को संचय कर वैकल्पिक साधन जैसे  बोरवेल या अन्य किसी माध्यम से  पानी की आपातकालीन व्यवस्था रखे तो हम अच्छी फसल पा सकते थे, एक अच्छी प्लानिंग से हम किसी अनहोनी को टाल तो नही सकते लेकिन इसके दुष्प्रभाव को कम तो कर ही सकते है,ये प्लानिंग ही हमारी वो चॉइस होती है जो  अकसर हमारा परिणाम तय करती है,

अगर हम सुबह लेट उठते है,तो अपने लिए एक व्यस्त शेड्यूल खुद तय करते है,

अगर हम थोड़ा योग या व्य्यायम नही करते है तो अपने लिये मोटापा खुद तय करते है,

अगर हम अपने खानपान को सही नही रखते है तो अपने लिए एसिडिटी,शुगर,बीपी जैसे बीमारियां खुद तय करते है,

अगर हम रफ़ गाड़ी चलाते है अपने लिए एक्सीडेंट खुद तय करते है,

अगर हम कमाई से अधिक खर्च करते है तो अपने लिए कर्ज खुद तय करते है,

अगर हम आवश्यकता से अधिक बात करते है तो अपने लिए असम्मान स्वयं तय करते है,

अगर हम किसी का साथ नही देते तो अपने लिए अकेलापन स्वयं तय करते है,

अगर हम अपने बच्चों को समय नही देते तो अपना खराब बुढापा स्वयंतय करते है,

अगर आप अपने जरूरी कार्यो को टालते है तो अपने लिए मुसीबते स्वयं तय करते है,

अगर हम कोई व्यसन पालते है तो अपने लिए अपना खराब स्वास्थ्य खुद तय करते है,

अगर हम अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास नही करते तो अपने जीवन को कमतर बनाना खुद तय करते है,

भाग्य एक बहुत बड़ी चीज है लेकिन सब कुछ नही है,भगवान की आपसे कोई पर्सनल दुश्मनी नही है कि आपको  हमेशा दुर्भाग्य से पीड़ित रखेगा, ईश्वर सबको अपने कर्मो के हिसाब से ही भाग्य बाटता है,माझी - the माउंटेन मेंन  फिल्म का एक संवाद याद आता है की हमेशा भगवान के भरोसे न बैठिए क्या पता भगवान खुद हमारे भरोसे बैठा हो, कर्मवादी नजरिया बनाइये, भाग्य आपके साथ होगा,

"हाथों की लकीरों को तकदीर न संमझ मेरे दोस्त,
तकदीर तो उनकी भी होती है,जिनके हाथ नही होते

Tuesday, 21 June 2022

लाइफ मंत्रा: किसी को पूर्ण रुप से गलत साबित करने से पहले उसका नजरिया भी जान लीजिए

लाइफ मंत्रा: किसी को पूर्ण रूप से गलत साबित करने से पहले उसका नजरिया जान लेना चाहिए,

कक्षा दूसरी में पढन वाले अतुल से कक्षा शिक्षिका ने गणित का एक सवाल पूछा "" अतुल, यदि में तुमको एक सेव, एवं एक सेव एवं एक सेव दूं , तो तुम्हारे पास कितने सेव हो जावेगें ?

अतुल "" मेडम जी... चार सेव ""

मेडम को लगा कि अतुल ने सवाल को ठीक से समझा नहीं है..उसने फिर से सवाल को दोहराया "" अतुल , घ्यान से सुनो..यदि में तुमको एक सेव दूं ..फिर एक सेव दूं...फिर एक सेव दूं ..तो तुम्हारे पास कितने सेव हो जायेगे.

छोटे अतुल ने अपनी उंगलियों पर केलकुलेट किया... उत्तर दिया "" चार सेव ""

मेडम झुझंला गई..उन्होने अपनी झुझलाहट को कंट्रोल किया एवं सोचा कि शायद छोटे अतुल को सेव पंसद नहीं है इसलिये वह सवाल पर घ्यान ही नहीं दे रहा है..उन्हे याद आया कि अतुल आम बहुत पंसद करता है... उन्होने फिर अपना सवाल दोहराया ...
बेटा अतुल..घ्यान से सुनो...यदि में तुमको एक आम फिर एक आम एवं फिर एक आम दूं तो ..तुम्हारे पास कितने आम हो जावेगें ?

छोटे अतुल ने कांउट किया "" मेडम जी तीन आम ""

मेडम का चेहरा..खुशी से दमक उठा...चेहरे पर मुस्काराहट आ गई..उन्हे अपने प्रयास पर गर्व महसूस हुआ...कि चलो छात्र की समझ में गणित आ या तो.

उन्होने फिर से अतुल से पूछा अच्छा अब बोलो ""यदि में तुमको एक सेव दूं ..फिर एक सेव दूं...फिर एक सेव दूं ..तो तुम्हारे पास कितने सेव हो जायेगे""

अतुल ने सहम कर उत्तर दिया "" मेडम जी चार ""

मेडम झल्ला गई....उन्होने ने झल्लाकर कहा "" कैसे अतुल..कैसे ""

मासूम अतुल सहम गया...उसने अपना हाथ सहमते हुये अपने स्कूल बेग में डाला..उसके हाथ में एक सेव था ..उसने मेडम को दिखाते हुये कहा सहम कर कहा "" एक सेव मेरे पास पहले से है ""

कहानी का  सार यह है कि यदि कोई व्यक्ति आपके सवाल के जबाब में आपका अपेक्षित उत्तर नहीं देता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह गलत है..उसे पूर्ण् रूप से गलत घोषित करने से पूर्व उसका नजरिया जान लेना जरूरी है,हम अक्सर लोग से उनकी राय नही सहमति चाहते है,ये जीवन की खूबसूरती है कि किसी विषय पर आपसे विपरीत विचार धारा रख करभी दोनों सही हो सकते है,

Monday, 20 June 2022

लाइफ मंत्रा: बिज़नेस मंत्रा(cash is king)

बिज़नेस में अगर आप पैसे सही समय पर देते है तो आपको cash डिस्काउंट के साथसाथ कई और चीजे भी मिलती है जो कि बहुत ही कीमती है

आपको मिलती है dignity(इज्जत) जो कि आपके व्यापार में आपको आगे बढ़ने में मदद करती है,

आपको मिलती है priority(प्राथमिकता) जो कि व्यापार में आपका बहुत फायदा करवाती है,

आपको मिलती है certinity(निश्चतता), की आपने आर्डर दिया है तो आपका माल जरूर आएगा,

आपको मिलती है avilability(उपलब्धता) आपके ऑडर को व्यपारीं सीरियस लेता है और हर संभव कोशिश करता है, आपके आर्डर को पूरा करने की,

आपको मिलती है acceptibility(स्वीकार्यता),हर कोई आपको पसंद करता है और आपसे जुडना चाहता है,

आपको मिलती है credibility(विश्वसनीयता) हर कोई आप पर भरोसा करता है,

आपको मिलती flexibility(लचीलापन),किसी की गुड़ बुक में आने के बाद आप उसे आने हिसाब से मोड़ सकते है,

आपको दिया गया उधार सिर्फ एक सुविधा है,इसका दुरुपयोग न करे,सही समय पर पेमेंट करे,अपने ब्यापार को बढ़ाना आपके हाथ मे है,

विकाश खेमका
खेमका ऑटो,
कांटाबांजी(ओडिशा)

लाइफ मंत्रा: जिंदगी आज कल(40+)

लाइफ मंत्रा: जिंदगी आज कल

सूरज कभी नही डूबता ये सिर्फ हमारा भ्रम होता है असल मे ये पृथ्वी ही होती है जो सूरज की और से मुह मोड़ लेती है जिसे हम रात कहते है,ऐसे ही जिंदगी कभी नही बदलती बस ये हम ही है जो जिंदगी के लिए बदल गए है क्योंकि हमारी सोच,हमारा नजरिया जिंदगी केप्रति बदल गया है,

अब त्यौहार में उल्लास इसलिए नही है की हमारे मन मे त्यौहारों के लिए उत्साह ही नही है,रीमझिम की बरसाती बूंदे जो कभी मन मे रूमानी तरंगे उत्पन्न करती थी वो आज कल काम मे असुविधा उत्पन्न करने वाली चिड़चिड़ाहट का कारण बनती है,रिश्तेदारों से शादियों एवं पार्टियों में मुलाकात बस औपचारिकता में लिए है,दोस्त यार से बेवजह मिले जमाना सा गुजर गया, जिनसे मिले बिना दिन अधुरा सा लगता था आज कल उनसे महीनों मुलाकात नही होती,शौक ने जिम्मेदारियों के आगे हार ली है, शौक पूरे करना बोझ लगने लगा है,शरीर चार कदम चलने पर वक्त बेवक्त अहसास दिला देता है कि अब चालीस पूरे हो गए है,खाना क्या और कितना खाना है ये जायका नही एसिडिटी तय करती है,ख्वाहिशें और पेट पर कंट्रोल ही नही रहा,मुस्कुराने और हसने के लिए वजह ढूंढनी पड़ती है,अपना जन्मदिन आज कल कोई खास दिन नही रहा, आज कल ये नही गिनते की कितने सालके हो गए अब तो ये हिसाब लगाते है कि कितने बचे है? जो मेरे साथ हो रहा है ये सिर्फ मेरे साथ ही नही हो रहा है,ये लगभग मेरी उम्र के हर व्यक्ति केसाथ हो रहा है,बस खुद पर बितती है तो पता चलता है,अब खुशी खुश रहने में नही खुश रखने में है,सारी तकलीफे बच्चों की तुतलाती बाते सुनकर दूर हो जाती है,

कुल मिलाकर जीवन इसलिए बदल गया है क्योंकि अब हम अपने लिए नही अपने परिवारके लिए जीते है,कुल मिलाकर ये परिपक्व होने का अहसास एक संतुष्टि तो देता है लेकिन कही न कही बचपन का बिछड़ जाना का अहसास कुछ तकलीफ देह तो है ही...

खैर जीवन जैसा भी है..बेहतरीन है
अभी इसी नियम पर जीना है की

यू न अपने आप को कभी शर्मिंदा रखिये
उम्र को हराना है तो कोई शौक जिंदा रखिये!!!

एंजोयिंग 40+ लाइफ

लाइफ मंत्रा: आपके ब्रेक आपकी गति का निर्णय करते है

लाइफ मंत्रा: आपके ब्रेक आपकी स्पीड का निर्णय करते है

अगर मैं कहूँ की कोई बताएगा कि हम जो अपनी गाड़ी में ब्रेक लगाते हैं उसका काम क्या है?? सब लोगों का अलग अलग जवाब होगा,कोई कहेगा,-गाड़ी को कंट्रोल करने के लिए,कोई कहेगा गाड़ी की स्पीड कम करने के लिए ,स्पीड पर नियंत्रण के लिए , गाड़ी को रोकने के लिए,

अगर मैं कहूं कि हम गाड़ी में ब्रेक गाड़ी की स्पीड बढ़ाने के लगाते हैं तो??अगर मैं कहु की ब्रेक से गाड़ी की स्पीड बढ़ सकती है तो?? सबको बहुत आश्चर्य होगा, कैसी बातें कर रहा है, ब्रेक का काम तो गाड़ी को रोक के रखना है,

कुछ कंफ्यूसन है,!!!!

तो सोचिए की आप कोई गाड़ी चला रहे हैं जिसमे आप को पता है कि ब्रेक नही है, तो क्या आप स्पीड चला पाएंगे,आपको हमेशा ये डर रहेगा कि मेरा एक्सीडेंट हो जाएगा ,मैं गिर जाऊंगा, इसलिए आप संभल कर गाड़ी चलाते है,कम स्पीड से चलाते है, अभी सोचिए कि आपके पास एक अच्छे ब्रेक वाली गाड़ी हो तो आप कितनी स्पीड से चला सकते है,क्योकि आपको पता है कि आपके पास कंट्रोल है,आप जब चाहे गाड़ी रोक सकते है,सब कुछ आपके कंट्रोल में है ये सोच आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है और आप को तेज गति से चलने के लिए हौसला देती है,आप अच्छे ब्रेक के साथ गाड़ी की अधिकतम सीमा तक तेज चल सकते हैं,

बस यही बात जिंदगी में भी लागू होती है,जिंदगी में माँ बाप की डांट,बड़ो की रोक टोक,अनुशाशन,नियम कानून ये सभी ब्रेक है,जो कि हमे ऐसा लगता है कि हमे तेज चलने से,आगे बढ़ने से रोक रहे है,लेकिन असल मे ये हमारी जीवन की गति को बढ़ाने का काम करते है, इस ब्रेक के बिना हम अपने जीवन मे बहुत आगे नही बढ़ सकते,बहुत तेजी से नही बढ़ सकते, हमारा एक्सीडेंट होना तय है,जो पतंग अपनी डोरियों से जुड़ कर नही रहती,जो पतंग से सोच लेती है कि डोर मुझे ऊपर जाने से रोक रही है,वो पतंग जल्द ही जमीन पर होती है, ये ब्रेक जीवन मे गति बनाये रखने का काम करते है,ये बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है चाहे वो सामाजिक हो, पारिवारिक हो, आर्थिक हो ,अगर हमें आगे बढ़ना है तो हमेशा अपने ब्रेक पर ध्यान देना होगा,क्योकि यही ब्रेक हमे जीवन के सफ़र मे आत्मविश्वास और हौसला देता है और आपकी  भविष्य की दशा और दिशा तय करता है,

धन्यवाद
विकाश खेमका

लाइफ मंत्रा: शिकायत नही, नियामत गिनिये

लाइफ मंत्रा: शिकायत नही नियामत गिनिए

एक पुरानी कहावत है कि *जरूरते तो फकीरों की भी पूरी हो जाते है और ख्वाहिशें तो राजाओ की भी अधूरी हो रह जाती है*,इंसान के जीवन मे अगर जरूरते आरिथमेटिक प्रोग्रेसन (1,2,3,4...)के अनुपात में बढ़ रही है तो ख्वाइशें जॉमेट्रिकप्रोग्रेसिन(1,2,4,8,16...) के अनुपात में,और यही बढ़ता हुआ गैप जीवन मे सुख शांति पाने के बीचमे बाधक है,यही बढ़ती हुई इच्छाएं रोज जीवन को क्रिटिकल बना रही है,हमारे पास जो नही है उसे पाने की चाहत में जो हमारे पास है हम उसकी भी कीमत नही समझते जो हमारे पास है उसे भी एन्जॉय नही करते, इंसान का स्वभाव है कि वो उन चीजों को ज्यादा महत्व देता है जो उसके पास नही होती, उन चीजों को एन्जॉय करता है जो उसके अलावा किसी के पास नही होती,इंसान की मौलिक सोच है खुद को औरो से बेहतर एवं अच्छा दिखाने की,ये औरो से बड़ा होने का अहसास सारी समस्याओं का मूल कारण है,

हम सदैव और से बेहतर दिखने में इतने व्यस्त हो जाते है कि बेहतर बनना भूल जाते है, स्वयं को अपग्रेड करना भूल जाते है,हमे ऐसा लगता है कि हमारे पास स्वयं को बेहतर बनाने के लिए कोई साधन ही नही बचा, जबकि ऐसा कुछ भी नही है, हर व्यक्ति के पास अगर कुछ कमी है तो कुछ विशेष भी अवश्य है,

एक दुर्घटना में एक घर का एक मात्र जवान बेटा चल बसा,उसके घरवालों को उसके इन्सुरेंस के 1 करोड़ रुपये मिले, क्या आप उन घरवालों को खुशकिस्मत कहेंगे की उन्हें बिना कुछ भी किये 1 करोड़ रुपये की राशि मिल गयी,आज भारत के अधिकतर मध्यम वर्गीय परिवार एक सुविधापूर्ण जीवन यापन कर रहे है लेकिन दुखी है,क्योकि उनके पास जितना है उससे कुछ ज्यादा उनके पड़ोसी के पास है, वो खुद से नही अपने पड़ोसियों से बेहतर बनना चाहते है, उन्हें काणा होना मंजूर है बशर्ते पडोशी अंधा हो जाये,प्रगति खुद को बेहतर बनाने में है, अगर आप आज पहलेसे बेहतर मानसिक, शारीरिक,आर्थिक एवं समजिकस्थिति में है तो ये आपकी प्रगति है,अपनी खुशियों का मापदंड तय करने के अपने पैरामीटर बदलिए,खुशी और संतुष्टि एक आंतरिक भावना है इसे अहं की संतुष्टि से नही पा जा सकता, आत्म संतुष्टि एवं अहं संतुष्टि दो अलग अलग चीजे है,आत्म संतुष्टि मतलब खुदको ऊपर उठाने का भाव,अहम संतसुष्टि मतलब किसी की नीचे गिराकर खुद को ऊपर समझना,

ये प्रकृति का जीवन चक्र है कि गाँव वाला कस्बे में बसना चाहता है,कस्बे वाला शहर में, शहर वाला महानगर में और महानगर वाला शांति की तलाश में गाँव मे फर्म हाउस बना रहा है,ट्रावेल्स के चाहे जितने साधन आ जाए पैदल चलने का जो मजा है वो किसी मे नही, वस्तुओं का ,भौतिकता वादी चीजो का स्वाद तभी है जब तक हम उनको भोगने की स्थिति में रहते है वरना वो हमारे लिए सम्पति नही विपत्ति का कार्य करती है,इस बात से निराश हो न ही आपके पास अच्छे जूते नही है, इस बात का शुक्र मनाए की कम से कम आपके पास पांव तो है,इंसान का मनोविज्ञान है कि वो मुफ्त मिली चीजो की कदर नही करता क्योकि वो सहज ही हासिल है,जबकि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण वो ही चीजे है,एक अच्छा परिवार, घनिष्ठ मित्र, अच्छा परिवेश,स्वस्थ शरीर ये सब हमे मुफ्त में मिले है तो इसकी कदर करिए,क्योकि ये वो चीजे है जिसके लिए करोड़ो लोग रोज उठाकर मंदिर/ मस्जिदों में पूजा अर्चना करते है,

हमारी विडम्बना है कि हम किसी भी चीज या व्यक्ति के मूल्य का पता हमे उसे खोने के बाद ही चलता है,जब वो हमारे पास होती है तो उसे एन्जॉय नही करते जब नही होती तो सिर्फ पछतावा होता है,हम में से अधिकतर व्यक्तियों के पास 1- 2या इससे अधिक लाइफ इन्सुरेंस की पालिसी है, हमने बहुत अच्छी प्लानिंग की है अपने मरने की बस जीने की प्लानिंग करना भूल गए है,जीवन इन बातों से नही बनता की आपको जीवन से क्या मिला थाइस बात से बनता है कि जो भी मिला उसका उपयोग आपने कैसे किया,

दो पंक्तियो में सार ये है कि जो मिला उसके लिये भगवान का शुक्र कीजिये,उसका उपयोग उस चीज को पाने के लिए किजिये जो आप चाहते है,अगर आपको  अभि भी ये सब बातें समझ में नही आती तो एक बार ये नीचे दिए गए गाने को ध्यान से सुनलियेगा,

* दुनिया मे कितना गम है,मेरा गम कितना गम है....

वेल सेटल्ड: कुछ आधुनिक परिभाषाएं

वेल सेटल्ड: कुछ आधुनिक परिभाषाएं,

जब आपका पैसा आपसे ज्यादा कमाने लगे,

जब आप व्यापार से जितना कमाते है,लगभग उतनी ही कमाई का जुगाड़ के लिए कोई प्लान बी भी हो,(आप काम करके जीतना कमाते है ,काम बिना करे भी लगभग उतना ही कमाए)

जब आप अपने पडोशी और अधिकतर रिस्तेदारो से ज्यादा कमाने लगे,

जब गाड़ी और बंगला emi प्रूफ हो,

जब आपका क्रेडीट कार्ड  सिर्फ सोशल स्टेटस के लिए रखे उपयोग के लिए नही,

जब आपको बैंकों से लोन के लिए  फोन आये और आपको कोई आवश्यता न हो,

जब आप अपनी पत्नी की हर *जायज*  मांग पूरी कर सके,

जब आपको ये दिखाने के लिए खर्चा न करना पड़े की आप अमीर है,

जब आप अपने दोस्त यार - रिश्तेदार की उतनी आर्थिक मदद कर सके जिससे डूब जाने पर भी आपको कोई फर्क नही पड़ता,

जब आपकी साल की एक घूमने की ट्रिप सिर्फ पैसे के लिए कैंसल न हो,

जब आपके जेब मे पैसे हो न हो साहूकारी जरूर हो,

जब आपकी सोच "बुरे वक्त के लिए बचाना चाहिए" से " जिंदगी एक ही बार तो मिलती है " हो जाये,

जब आपको इनकम करने से ज्यादा टेंशन *इनकम टैक्स* का होने लगे,

आप भी अपने विचार कमेंट सेंक्शन में जोड़ सकते है

ऑफलाइन जिंदगी

लाइफ मंत्रा: ऑफलाइन जिंदगी,

विकाश खेमका
काँटाबाजी (ओडिशा)

टेक्नोलॉजी की पहुच से दूर एक अपना ठिकाना था,
अपनो के पास रहते थे  वो भी क्या जमाना था,

मोबाइल के अलार्म नही मां की दुलार से उठता था,
इन भर का मोटिवेसन पिताजी की एक डांट से मिलता था,

ऑनलाइन क्लास नही सरकारी स्कूल हुआ करते थे
दोस्तो के साथ कितने कितनी मस्ती किया करते थे,

वेदर फोररकास्ट नही था बारिश में भीगने का मजा था,
बिना व्हाट्सअप के भी दोस्तो का दरबार सजा था,

न आज तक,न जी न्यूज , न कोई समाचार था,
अपना फेवोराइट कार्यक्रम  तो चित्रहार था,

न पुब्जी,न प्रीफ़ायर,ना कैंडी क्रश, न यू ट्यूब था
अपना लिए मजा तो गिल्ली डंडा और खेल खुद था,

कुछ भी बोल देना मुश्किलों का घर नही था,
कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीन शॉट का डर नही था,

घर मे फ्रिज नही था,कूलर नही था, टी वी नही थी
इमेज बहुत बढ़िया थी अपनी भले ही सेल्फी नाही थी,

सुविधा कम थी साधन काम थे लेकिन सुकून था,
अपने लिए तो सुप्रीम कोर्ट पिताजी का हुकम था,

आपसी चुगली-चट्ठा था, ताका झांकी थी,
अपने लिए गूगल पड़ोस की काकी थी,

बेशक मैगी,पिज़्ज़ा,बर्गर का स्वाद नही था
मगर मां में हाथ के खाने का कोई जवाब नही था

न फेसबुक,न ट्विटर न इंस्टाग्राम न जी मेल था,
मगर फिर भी बहुत पक्का आपसी मेलजोल था,

संबंध मजबूरी से नही मजबूती से निभाये जाते थे
शादीयो तंक में टेंट भी खुद ही लगाए जाते थे,

त्योहारो में हर्ष था,आंनद था ,उमंगे थी उल्लास था,
आज त्यौहार भी फिके है पहले हर दिन खास था,

पहले खुशियां थी आज कल सिर्फ खुशियों का वहम है,
पहले जिंदगी में खुशियों के पल थे अब हरपल में जिंदगी कम है,

सहज थी, सीधी थी, सरल थी,सच्ची थी,
जिंदगी जब *ऑफलाइन* थी, काफी अच्छी थी,

अपरिग्रह: सांसारिक जीवन मे सन्यासी होने का भाव

लाइफ मंत्रा: अपरिग्रह -सांसारिक जीवन में सन्यासी होने का मूलमंत्र

विकाश खेमका
कांटाबांजी(ओडिशा)

जैन धर्म के दो मूल मंत्र हूं,अहिंसा एवं अपरिग्रह, गांधी जी शुरू से है हमारे पाठ्य क्रम में शामिल है और ये उनकी जीवनी को निरंतर पढाए जाने का कारण है हमारे लिए अहिंसा कोई नया शब्द नही है, लेकिन अपरिग्रह शब्द शायद ही जैन धर्म से न जुड़े हुए व्यक्ति ने सुना भी होगा, 

अपरिग्रह का शाब्दिक अर्थ है किसी वस्तु को ग्रहण न करना,या आवश्यकता से अधिक न लेना, उदाहरण के लिए जितना आवश्यक हो खाने के लिए उतना ही लेना अपरिग्रह है, यह छोटा सा शब्द अपने आप मे कई वर्तमान की कई समास्याओं के मूल हल समाहित किये हुए है,अकसर हम अपने धर्म को सिर्फ एक आध्यत्मिक दृष्टिकोण  से देखते है जबकि धर्म सुख- शांति से  जीवन व्यतीत करने के लिए एक आदर्श जीवन शैली की सीख है,हम सांसारिक लोग है हम सन्यासी नही हो सकते,अपरिग्रह संसार मे रहकर सन्यास की भावना बनाये रखने का मंत्र है,एक सन्यासी की मूलभावना होती है "सर्वे भवन्तः सुखिनः,सर्वे भवन्तु निरामय:" और अपरिग्रह इसी भाव को सांसारिक जीवन मे प्राप्त करने का मंत्र है, 

जैसा कि इसका शाब्दिक अर्थ हैं "आवश्यकता से अधिक वस्तु का संचय न करना " लेकिन इसका सांसारिक जीवन के संदर्भ में ये सही अर्थ नही हो सकता। इसका सही अर्थ ये हैं कि किसी भी वस्तु या व्यक्ति या कोई भी सांसारिक वस्तुओं से टूटना हैं। यदि आपको किसी वस्तु से प्रेम हैंं, लगाव हैं उसके खो जाने से दुःख होता हैं तो इसका मतलब हैंं आपको इससे परिग्रह हैं ओर यही परिग्रह दुःख का कारण हैं। 

यदि इसका अर्थ ये मान लिया जाए कि आवश्यकता से अधिक वस्तु का संचय न करना तो इसका मतलब हुआ जो आपके पास आवश्यक वस्तु है उसी से आपको परिग्रह हो जाएगा और उसमें से किसी एक वस्तु के जाने से भी आपको दुख होगा तो फिर ये अपरिग्रह का सही अर्थ कभी नही ही सकता। 

आपके पास कितना भी धन या सम्पति हैं, ऐश्वर्य हैं लेकिन आपको इसके जाने का कोई गम या दुःख नही हैं तो फिर कोई चिंता की बात नही लेकिन यहां प्रश्न उठता हैं कि यदि आपको परिग्रह नही हैं तो धन का संचय क्यों किया। धन का संचय आपने अपने सुख के लिए, ऐश्वर्य के लिए ओर आराम की जिंदगी जीने के लिए किया हैं। आप जानते हैं पैसा कमाना ओर खर्च करना और दान देना लेकिन यदि आप इससे परीग्रह रखते हैं, उसके जाने से दर्द होता हैं, दान देने से घबराते हैं तो फिर आप अपरिग्रह का कभी पालन नही कर सकते। 

जब हम आवश्यकता से अधिक संचय करते है तो फिर आप सन्सार के बंधन में बांध लेते है,फिर हम वस्तुओं को व्यक्तियो से अधिक महत्व देने लगते है,जो की आगे चलकर पतन एवं तनाव का कारण बनता है,वर्तमान जीवन मे मानसिक अशांति,तनाव,दुखः का एक बहुत बड़ा कारण है भौतिकतावाद, मतलब भौतिक चीजो को बहुत ज्यादा महत्व देना,हम गाड़ी,बंगला,एवं विलासपूर्ण जीवन शैली के लिए दिन रात कमाने में लगे रहते है,क्योकि हमे लगता है कि सुख इसी में है,लेकिन अपरिग्रह का भाव हमे सिखाता है कि सुख पाने में नही त्यागने में है, खूब कमाइये मगर उसके प्रति मन मे अशक्ति न लाना अपरिग्रह है, मन में अपरिग्रह की भावना हो तो जीवन आसान हो जाता है,"

आम जीवन मे हमने जीवन मे धर्म को सिर्फ आध्यात्म और आडंबर से जोड़ लिया है जबकि धर्म मनुष्य को एक आदर्श जीवन शैली के लिए प्रेरित करने वाला एक भाव है,एक अच्छा और बेहतर मनुष्य बनाने के लिए धर्म से जुड़िये इसकी मूलभावना को समझिये,

धन्यवाद,

Saturday, 16 October 2021

मैं पैसा हूँ

" मैं पैसा हूँ"

मैं आपके सोशल स्टेटस का सिम्बल हूँ
मुझे पाकर आप क्रिटिकल हो जाते है,मैं तो बिल्कुल सिंपल हूँ

मैं आपके रिश्तों के लिए जहर हूँ,
दिमाग मे पहुच जाए तो मैं कहर हूँ,

मैं बोलता नही मगर बोलती बंद कर सकता हूँ,
मैं आपका रुतबा बहुत बुलंद कर सकता हूँ,

 मैं नमक की तरह हूँ ,जिंदगी का स्वाद बढ़ाता हूँ,
ज्यादा हो जाऊ लेकिन तो जीवन मे कड़वाहट लाता हूँ,

मेरे बिना कोई यज्ञ, कोई आयोजन कोई अनुष्ठान नही होते,
पैसों में न बदल पाए तो आपके कोई  गुण महान नही होते

मैं जब भी चाहूं कोई भी नियम तोड़ सकता हु
कार्यपालिका,न्यायपालिका,संसद,मिडिया सबका मुह मोड़ सकता हूँ

फिर भी मेरी कुछ सीमाएं है जिन्है मैं लांध नही सकता
आपके जीवन से मैं खुशियों को बांध नही सकता

मुझसे बात करो तो मैं बात नही करता
मेरी तरफ देखो तो मैं जवाब नही देता,
मुझे पाने के लिए आपने कितनो को खोया
मैं आपको इस बात का हिसाब नही देता,

मैं सिर्फ एक कागज हूँ, जिससे संसार मे हलचल है
मेरे लिए ही सारे फसाद है, मेरे लिए  सारी कलकल है

मेरी उपस्थिति सारी सृष्टि के कण कण में व्याप्त है
मेरी चाहत आपके जीवन को बरबाद करने को पर्याप्त है

मुझसे इतना दिल मत लगाओ मैं हर जगह काम नही आऊँगा
साथ जाएंगे आपके अच्छे कर्म मैं आपके साथ नही जाऊँगा

विकाश खेमका
काटाबांजी

Saturday, 14 December 2019

गुफ्तगू

Just Beautiful .......
With thanks a ton to original writer...
Its relex me a lot....

🌹   *गुफ़्तगू*    🌹

उसने कहा- बेवजह ही खुश हो क्यों?
मैंने कहा- हर वक्त दुखी भी क्यों रहूँ !

उसने कहा- जीवन में  बहुत गम हैं,
मैंने कहा -गौर से देख,खुशियां भी कहाँ कम हैं।

उसने तंज़ किया - ज्यादा हँस मत, नज़र लग  जाएगी,
मेरा ठहाका बोला- चिकना हूँ,  फिसल जाएगी।

उसने कहा- नहीं होता,क्या तनाव कभी ?
जवाब दिया- मैंने ऐसा तो कहा नहीं!

उसकी हैरानी बोली- फिर भी यह हँसी?
मैंने कहा-डाल ली आदत,हर घड़ी मुसकुराने की!

फिर तंज़ किया-अच्छा!!बनावटी हँसी, इसीलिए
परेशानी दिखती नहीं।
मैंने कहा- अटूट विश्वास है, प्रभु मेरे साथ है,
फिर चिंता-परेशानी की,क्या औकात है।

कोई मुझसे "मैं दुखी हूँ" सुनने को बेताब था,
इसलिए प्रशनों का सिलसिला भी बेहिसाब था

पूछा - कभी तो छलकते होंगे आँसू ?

मैंने कहा-अपनी मुसकुराहटों से बाँध बना लेता हूँ,
अपनी हँसी कम पड़े तो कुछ और लोगों को
हँसा देता हूँ ,
कुछ बिखरी ज़िंदगियों में उम्मीदें जगा देताहूँ...

यह मेरी मुसकुराहटें दुआऐं हैं उन सबकी
जिन्हें मैंने तब बाँटा, जब मेरे पास भी कमी थी।
🌹

Thursday, 28 November 2019

लाइफ़ मंत्रा: कोई भी काम छोटा नही होता,बस एक बड़े काम की शुरुवात होती है

लाइफ मंत्रा: कोई काम छोटा नही होता ये सिर्फ एक बड़े काम की शुरुवात होती है

आज के भौतिक युग मे हम इतनी स्ट्रेस के साथ जी रहे है कि कुछ समय के लिए हम सभी मे डिप्रेसन आ जाता है,खासकर अपने व्यापार/नौकरी या प्रोफेसन के प्रति मन में एक नकारात्मक भाव उत्त्पन्न होता है कि जो हम कर रहे है,वो बहुत छोटा है,हम उसके लायक नही है,हम इससे कुछ बहुत ज्यादा अच्छा और बड़ा डिज़र्व करते थे,लेकिन पेट की भूख ने हमे एक छोटे काम करने के लिए मजबूर किया और हम ये काम कर रहे है,

जबकि सच बिल्कुल इसके उलट है, हम सबके साथ एक समस्या है कि हम अपने आप को मोटीवेट करने के लिए अक्सर किताबे पढ़ते है,इंटरनेट में सक्सेस लिटरेचर सर्च करते है,बड़े बड़े मोटिवेशनल सेमिनार अटेंड करते है, लेकिन इस मोटिटिवेसन के उन लाइव सोर्सेस को भूल जाते है जो हमारे आस पास ही है,जिन्हें हम रोज देखते है,मिलते है,उनके बारे में बाते करते है, लेकिन उनसे सींखते नही, ऐसे ही अपना काम को छोटा न समझ कर उसमें बड़ा नाम बनाने वाले दो लाइव उदारहण आपके सामने रख रहा हूं,इस बात को समझने के लिए आपको कंही दूर जाने की आवश्यक्ता नही है, मैं काटाबाजी में ही आपको ऐसे उदाहरण पेश कर रहा हु जिन्होंने की इस तथाकथित छोटे काम मे अपना बड़ा नाम,अपना बढ़िया कैरियर,और एक अच्छी इज्जत कमाई है,

पहला उदाहरण मेरे मित्र आनंद पंजवानी का है,एक छोटी सी पान दुकान से लेकर "गोवर्धन पान" के ब्रांड तक के उसके सफर को मैंने  बहुत करीब से एक एक स्टेप चढ़ते देखा है,आम मानसिकता है कि पान दुकान एक छोटा सा व्यवसाय है लेकिन जब आप एक काम को अपने दिल से करते हो,उसमे खुशी महसूस करते हो,तो आप को आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता, ऐसा ही एक और उदाहरण एस कुमार हेयर सलून है,अधिकतर लोगों की मानसिकता ये है कि सलून एक बहुत ही छोटा काम है,लेकिन इस मिथक को भी इनकी मेहनत और लगन ने तोड़ा है,आज एस कुमार सलून भी एक ब्रांड है और लोग दूर दूर से इसके लिए एडवांस में बुकिंग करते है,एक छोटी से सलून को एक बड़ा हेयर स्टाइलिस्ट ब्राड बनते हुए देखना वाकई सुखद अनुभव है,

इनकी सफलता की वजह है कि इन्होंने अपने काम को कभी छोटा नही समझा,अपने काम को एन्जॉय किया,अपने काम करने में कोई झिझक नही दिखाई, उस पर नए नय प्रयोग किये,हमेशा अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश की, हर सफलता को एक समय लगता है, इनकी सफलता को भी लगा लेकिन इन्होंने धैर्य बनाये रखा और तब तक बनाये रखा जब तक कि उनका काम एक ब्रांड नही बन गया,आज अपने इस तथाकथित छोटे काम की बदौलत इनके पास एक अच्छी आय का साधन,सोशल स्टेटस,और वो सब कुछ है जो कि एक आदमी अपने प्रोफेशन/व्यापार/नौकरी से चाहता है,

अधिकतर असफल लोगों को उनके काम को लेकर शिकायत होती है कि उन्हें एक छोटा काम मिला है और वे इसे एक हीनभावना से ग्रस्त होकर बुझे हुए दिल से सिर्फ रोजीरोटी कमाने के लिए करते है,वो मजबूरी में काम करते है,और मजबूरी में किये गए काम आप पर बोझ बनते है,जो अपने काम से प्यार नही करते उनका काम भी उनसे प्यार नही करता,आज जो लोग इनकी सफलता को सिर्फ इनकी किस्मत कहते है तो उनको अपना सही आकलन करने की आवश्यकता है,जब तक आप अपना काम शर्म और झिझक के बंधन में बंध के करेंगे तो आप उसमे कभी आगे नही बढेंगे,उत्साह से किया गया काम अच्छा रिजल्ट लाता है और इसका उल्टा भी इतना ही सही है,

आज भी लोग पोस्ट ग्रेजुएट कर के 10000 रूपये महीने की नौकरी कर रहे है क्योंकि ये उन्हें व्हाइट कालर जॉब या सोसिअल स्टेटस वाला काम लगता है,जबकि एक छोटा सा नास्ता ठेले वाला आराम से रोज 1000 रुपये कमा कर सोता है,मोदी जी जब कहते है कि पकोड़े तलना भी एक व्यवसाय है तो लोग इस बात का मजाक उड़ाते है कि क्या एक पढ़ा लिखा आदमी पकोड़ा कैसे तल सकता है?? हर काम को छोटा या बड़ा सोसल स्टेटस देने की ये मानसिकता असफल लोगो के अपनी असफलता झुपाने के बहाने है,सच तो ये है कि जो काम दिल से किया जाए कभी छोटा नही होता,

कोई आदमी सीधे बड़ा होंकर पैदा नही होता,आदमी पहले शिशु के रूप में पैदा होता है फिर धीरे धीरे बाद होता है,हजारो किलोमीटर की यात्रा भी एक छोटे से कदम से ही प्रारंभ होती है,और कंही भी पहुचने के लिए पहले घर से निकलना पड़ता है, एक कदम बढ़ाना पड़ता है, स्टार्ट अप लेना पड़ता है,आप जो भी काम करे दिल से करे,चाहे आप नौकरी करते हो, कोई प्रोफेसनल हो,या छोटे सी दुकान के मालिक,अपने काम को समर्पित ढंग से करे,छोटी चीजे ही आगे चल कर बड़ी होती है,बस अपने काम मे लगे रहिए,

कोई काम छोटा नही होता ये बस एक बड़े काम की शुरुवात होता है,

घने कोहरे ने एक बात बहुत अच्छी सिखाई है
चलते रहो, रास्ता खुद ब खुद दिखता जाएगा

Sunday, 24 November 2019

लाइफ मंत्रा: आपकी जिंदगी आपका फैसला

लाइफ मंत्रा: जिंदगी आपकी फैसला आपका

इस आर्टिकल के साथ एक लिंक पोस्ट कर रहा हु जिसमे एक वीडियो है कि कैसे एक कुत्ते को मिल्ट्री में सेवा देने एवं अहम भूमिका निभाते के लिये पूरे मिलिट्री के कायदे कानून और सम्मान के साथ रिटायरमेंट दिया गया,इस लिंक पर आप ये वीडियो देख सकते है

https://www.facebook.com/theindianfeed/videos/2553873151370897/

छोटा सा वीडियो है लेकिन संदेश बड़ा है,साथ मे कैप्शन भी है कि "born as a dog retire as आ militryman" काफी कुछ सिखाता है ये वीडियो,और सकारत्मक सोचेंगे तो बहुत प्रेरित करता है कि  कई चीजें आपके कंट्रोल में नही है जिसे भाग्य कहा जाता है जैसे कि ये बात बहुत आप क्या थे,कहा पैदा हुए थे,क्या करते थे लेकिन ये बात आप पर निर्भर है कि आप क्या बनना चाहते है ,आपकी आगे की लाइफ कैसे होगी, आप गरीब पैदा हुए ये आपका भाग्य है आप गरीब मरे तो आपकी नाकामयाबी,

हर किसी की जिंदगी में कुछ न कुछ कमी है और कमी है इस लिए तो जिंदगी है हकीकत है पूरे होते तो ख्वाब न होते, अधिकतर लोग इन कमियों के बहाने की आड़ में अपनी असफलता छुपाने की कोशिश करते है,हर कोई जितनी मेहनत अपनी असफलता की किताब पर बहाने का कवर लगाने में जितनी मेहनत करता है उतनी ही हिम्मत अगर उसको स्वीकार कर उसको बदलने में लगा दे तो यकीन मानिए इस किताब की स्क्रिप्ट बदल सकती है,लेकिन बहाने बना लेना बहुत आसान है और आज काल मुश्किल काम भला कौन करता है,

आप क्या थे,ये आपका अतीत है इसे आप नही बदल सकते, लेकिन आप क्या होंगे जो कि आपका भविष्य है ये जरूर  निर्णय कर सकते है,बस जो नही मिला उसकी शिकायत छोड़ कर जो है उसका सदुपयोग करना सीखिए,

अगर किस्मत ने आपको "राहुल " दिया है तो उसे गांधी बनाकर अपना मजाक मत उडाईये,बल्कि द्रविड़ बनाकर डटे रहिए,किसमत से पत्थर मीले तो उससे अपना सर मत फ़ोडिये बल्कि उससे  रास्ते की सीढी बनाइये,

एक कचरे का ढेर भी कुछ देर में अपनी जगह बदल लेता है आप तो इंसान है एक मौका आपकी औकात,हालात,पहचान सब कुछ बदल सकता है सिर्फ उसे पहचानिए उसे सार्थक किये उसे व्यवहार कीजिये,

जब एक जानवर कुत्ते के रूप में पैदा होकर एक सैनिक सम्मान पा सकता है तो आप तो उससे कंही बेहतर है,बस कोशिश करते रहिए,अब भी आप अपनी असफलता को  सिर्फ किस्मत का दोष कहते है तो याद रखिये भगवान को आपसे कोई पर्सनली दुश्मनी तो है नही जो आप के साथ हमेशा खेलता रहेगा बस आप अपनी कोशिश जारी रखिये धैर्य राखिये क्योकि कभी कभी गुच्छे की आखरी चाबी भी ताला खोल देते है और सफलता के लाकर में मेहनत और किस्मत नाम की दो चाबियां लगती है जिसमे से एक आपके हाथ है और एक भगवान के आप,अपनी चाबी तो लगाते रहिए,

मेरे दोस्त,every dog has a day, क्या पता आपका दिन कब आ जाये

Keep trying,
आप  कल क्या होंगे???ये आप का आज decide करता है !!

Wednesday, 20 November 2019

लोग है!!

तू अपनी खूबियां ढूंढ,
कमियां निकालने के लिए
                                    *लोग हैं|*

अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए
                                    *लोग हैं|*

सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
निचा दिखाने के लिए
                                    *लोग हैं|*

अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए
                                    *लोग हैं|*

अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए
                                   *लोग हैं|*

प्यार करना है तो खुद से कर,
दुश्मनी करने के लिए
                                    *लोग है|*

रहना है तो बच्चा बनकर रह,
समझदार बनाने के लिए
                                    *लोग है|*

भरोसा रखना है तो खुद पर रख,
शक करने के लिए
                                    *लोग हैं|*

तू बस सवार ले खुद को,
आईना दिखाने के लिए
                                    *लोग हैं|*

खुद की अलग पहचान बना,
भीड़ में चलने के लिए
                                    *लोग है|*

तू कुछ करके दिखा दुनिया को,
तालियां बजाने के लिए
                                    *लोग है

Monday, 21 October 2019

कुछ सच

वही सीमेंट, वही रेत, उसी पानी से तैयार हो गई,
जिससे पुल बना करते थे उसी से आज खड़ी दिवार  हो गई,

बीमार माँ को घर पर छोड़ आया वो अकेला,
माताँ रानी के मंदिर के सामने कतार हो गयी,

भूख से तड़पता वो बच्चा कब का मर गया,
उसकी तस्वीर आज कल रौनक-ए-अख़बार हो गई,

उसके सिगरेट के धुएं ने न जाने कितनों को मारा होगा,
उसके मालिक ने केन्सर हॉस्पिटल बनाया तो जय जयकार हो गई,

बड़े शौक से उसने पंडित जिमाये श्राद्ध में बहुत
उसके माँ बाप की जिंदगी वृद्धाश्रम में खाकसार हो गई,

आज उनके बच्चो को कान्वेंट स्कूल में देखता हूं
जिनके जिहाद के कारण जन्नत आज उजड़ा बाजार हो गई,

खबर सुनी की एक कन्या भ्रूण को फिर से कुत्ता चबा गया,
दोष कुत्ते का नहीं ये तो इंसानियत शर्मशार हो गयी,

कभी जात पात कभी नोंट, कभी अपनी सुविधा को देख कर वोट दिया जिन्होंने,
आज वही कहते की राजनीति आजकल बेकार हो गई,

कोई बात नहीं एक और सुकून ए जिंदगी मांगेंगे खुदा से
ये जिंदगी तो आपसी झगड़ो में ही बलिहार हो गई,

Sunday, 20 October 2019

कैमरा कंही देखो तो मुस्करा दिया करो

सभी कुर्सीप्रेमी/बुकेप्रेमी/शालप्रेमी/पदप्रेमी/सम्मानप्रेमी  स्वजनों को खेद सहित समर्पित

कैमरा अगर देखो तो मुस्करा दिया करो,
बार बार अपने अहसान गिना दिया करो,

बहूत छोटी है याददाश्त लोगो की यहाँ,
खुद को लगातार अखबारों में छपा लिया करो,

आखिर तुमने खर्चे है पैसे इन कुर्सियों के लिए,
अपना हक भी इन पर जता दिया करो,

चर्चा में रहना बहुत जरूरी है आजकल,
चाहे इसके लिए खुद का घर जला लिया करो,

क्या करोगए इतने दोस्त और रहनुमा बनाकर,
बुराई हर किसी की उसके मुंह पर बता दिया करो,

कदर बढ़ती है इसलिए कुछ नाराजगी पालो करो,
हर छोटी मोटी बात पर चेहरे बना लिया करो,

ये परवाह मत करो की कबीले का क्या होगा,
कोई नाराज हो चाहे अपना कद कबिले में तुम बढा लिया करो,

खुद का अहम पूरा हो ये बहुत जरूरी है
चाहे इसके लिए संगठन को झुका लिया करो,

लोग तुम्हे नजर उठा कर देखे ये बरकरार रहे,
चाहे इसके लिए खुद को अपनी नजरो से गिरा लिया करो,

कैमरा  कभी देखो तो मुस्करा लिया करो
कैमरा कभी देखो तो मुस्कुरा लिया करो

धन्यवाद

Monday, 24 June 2019

लाइफ मंत्रा: धर्म सिर्फ आध्यत्म ही नही प्रेरणा की भी विषयवस्तु है,

लाइफ मंत्रा: धर्म सिर्फ आध्यत्म की ही नही प्रेरणा की भी विषयवस्तु है

आज कल सोशल मीडिया में मोटिवशनल स्पीकेरो की भीड़ है,हर दूसरी या चौथी पोस्ट एक मोटिवेसनल वीडियो,या कोई प्ररेणादायक कविता,या कोई फ़ोटो है,ये सब फ़ोटो वीडियो और कोटेसन बहुत पसंद भी किये जाते है क्योंकि आज कल हर कोई एक निराशा के दौर से गुजर रहा है,बढ़ते भौतिकतावाद के दबाव के कारण हमने अपने आप को और अपने जीवन शैली को बहुत जटिल कर लिया है,और इसलिए हर दूसरा आदमी डिप्रेसन से ग्रस्त है और ये सभी मोटिवेसन इस डिप्रेसन से बाहर आने के लिए वक्ती तौर पर काफी सहायता करते है,हम ये सब वीडियो देखकर खुद को हौसला देते है और काफी रिलेक्स फील करते है,लेकिन क्या कभी सोचा है कि दुनिया का सबसे पहला मोटिवेशनल लेक्चर कौन सा था??,दुनिया का सबसे पहला सक्सेस लिटरेचर कौन सा था,??इस सवाल का जवाब आपको गर्व महसूस कराणे के साथ साथ आप  का मोटिवेसन के प्रति नजरिया भी बदल देगा,

आपका सोचना सही है ,विश्व का सबसे पहला। सक्सेस लिटरेचर *श्रीमद भगवत गीता* है,लेकीन  कभी हमारा इस और ध्यान ही नही गया,असल मे आज कल हम पश्चिमी शिक्षा पद्धति"मैकाल सिस्टम" का अनुसरण कर रहे है जिसमें भारतीय संस्कृति एवं धार्मिंक मान्यताओं की जगह नगण्य  है,यहा सनातन धार्मिक ग्रंथो को सिर्फ आध्यत्म का विषय बनाया गया है,जबकि असल मे ये धार्मिक ग्रन्थ एक आदर्श जीवन शैली के लिए प्रेरित करते है,हमारा सनातन साहित्य ऐसा है कि हर समस्या का समाधान इसमे है,हर प्रकार की विधाओं के भविष्य के लिए कल्पना शक्ति है,हर तरह के विज्ञान के सूत्र है,लेकिन ये विडंबना है हमारी गलत शिक्षा प्रणाली के कारण हमारे ग्रन्थ एवं उपनिषद हमे सिर्फ कोरी कल्पना मात्र लगते है जबकि विश्व के लगभग सभी प्रसिद्ध आविष्कार किं कल्पना हमारे ग्रन्थों ने हजारो वर्ष पूर्व ही कर ली थी जब कि बाकी सभी संस्कृतियां अभी अपने शैशव काल मे ही थी,

इस बात को कुछ उदाहरण दे कर आप के समक्ष रखना चाहूंगा,भारतीय संस्कृति में भगवान के दशावतारों को हम काल्पनिक एवं कोरी गप्प बताते है जबकि अगर इस पर ध्यान दे तो आप पाएंगे कि यही थ्योर्री डार्विन के क्रमिक वंशवाद के विकास की थ्योरी की नींव है,की कैसे मानव सभ्यता का पानी से आविष्कार हुआ और क्रमशः विकाश होता हुआ कलयुग(कल मतलब मशीन युग) मे आया,

रामायण काल मे पुष्पक विमान की कल्पना आज के जम्बो बोइंग जेट की नींव है,इसे हमने कहानी बताया लेकिन विदेशियों ने इससे प्रेरणा ली,समुद्र पार पत्त्थर के सेतु आज हर बड़ी परियोजना की नींव है,

महाभारत काल मे जब कुरुक्षेत्र के  युद्ध का विवरण जब संजय हस्तिनापुर में बैठकर अन्धे धृतराष्ट्र को सूनाते है तो यही आज के लाइव टेलिकास्ट के लिए प्रेरणा है,मगर हम इसे सिर्फ काल्पनिकता के लिहाज से लेते है,

आगे चलकर महाकवि कालिदास ने महाकाव्य मेघदूत लिखा जिसमे एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को बादलो में अपना संदेश लिख कर भेजता है और हम इसे पढ़कर अपने पूर्वज कवियो की कल्पना का मजाक उड़ाते है जबकि इसी तकनीक को गंभीरता से ले कर अगर हम प्रेरित हुए होते तो आज व्हाट्सएप्प,फेसबुक,क्लाउड टेक्निक सब भारत की देन होता,लेकिन हम पर पश्चिमी करण इतना हावी है कि आज कल समस्याओ में हमे सुपर मैन और स्पाइडर मैन याद आते है हनु मैन(मान) नही,

ये बात सत्य है कि हमने अपने धर्मगनाथो को सिर्फ आध्यत्मिक दृष्टि से पढ़ा है कभी प्रेरणात्मक दृष्टि से नही पढ़ा है,कभी हनुमान चालिशा को पढ़ कर संमझ कर देखिये,हमें शास्त्रों में  संकट में हनुमान चालीसा पढ़ने को कहा गया है तो इसलिए नही की किसी भी संकट में हनुमान जी आकार हामारे संकट दूर करेगे,बल्कि इसलिए कहा गया है कि हनुमान चालिसा से प्रभावित होकर हम स्वयं ये याद करेंगे कि किनसे संकट के समय हनुमान जी ने अपनी बिसरी हुई शक्ति को एकत्रित किया और फिर अपनी स्वयं की शक्ति से सौ योजन का समुद्र लांध गए,ये है प्रेरणा,

रामचरित मानस में जो श्रींराम का चरित्र है आदर्श है,इससे सिर्फ रामभक्ति नाहींश्री राम के आदर्शो को सीखिये की कैसे जंगलो में 14 वर्ष तकलीफ पाने के बाद ही प्रभु श्री राम *मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम* हुए,श्री राम से धैर्य सीखिये की विपत्ति में कैसे धैर्य रखा जाता है,

महाभारत काल मे श्री कृष्ण का चरित्र तो भारतीय संस्कृति की अतुलनीय चरित्र है जो बांसुरी भी बजाता है और सुदर्शन चक्र भी चलाता है,श्री कृष्ण का चरित्र किशोरवस्था में पवित्र प्रेम सिखाता है तो महाभारत के युद्ध मे गीता का ज्ञान देता है,

भारतीय ग्रंथ एवं धर्म ग्रहणीय एवं पठनीय है इसलिए नही किए सभी  धार्मिक मान्यताओं से जुड़े है बल्कि इसलिए पठनीय है क्योंकि ये दैन्यदिनी जीवन के हर क्षेत्र में हमारे लिए प्रेरणात्मक है

आपके आम जीवन के हर समस्या का हल हमारे पुराणों मे धर्म मे है बस इसे एक बार ठीक से पढ़ने की और  समझने की आवश्यकता है,हमारा धर्म और संस्कृति सिर्फ आध्यात्मिक ही नही बल्कि वैज्ञानिक और तार्किक भी है,इस बात को जिस दिन हम समझकर अपने धर्म को सिर्फ कोरी कल्पना न समझ कर एक प्रेरणादायक ग्रंथ के रूप में लेंगे उस दिन हमारी शिक्षा का स्तर सही मायने में बढ़ जाएगा,अपनी सोच का दायरा बढाइये,अपने धर्मग्रन्थो की और वापस आईये,

क्योकि
कमजोर हो  नीव  तो किला ध्वस्त हो जाता है,
गलत हो दिशाएं तो हौसला पस्त हो जाता है,
जरा बच कर रहिये पश्चिमी सभ्यता से
सूरज पश्चित में जाकर अस्त हो जाता है,

धन्यवाद
विकाश खेमका